कथा में भगवान गोवर्धन की पूजा का चित्रण कर छप्पन भोग की झांकी सजाई गई।
निवाई. श्रीकंकाली माता मंदिर में चल रहे श्रीमद भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में प्रवचन करते हुए कथा वाचक स्वामी रामनिवास ने कहा कि भगवान ने पृथ्वी पर अवतार लेकर विभिन्न लीलाएं की और मनुष्य को सद्मार्ग पर चलने का रास्ता दिखाया।
उन्होंने पूतना लीला, माखन चोरी सहित भगवान कृष्ण के बाल चरित्र पर प्रवचन दिए। कथा वाचक ने बताया कि भगवान को मन भाव से ही प्रसन्न किया जा सकता है। भगवान के प्रति समर्पित मन से की गई भक्ति से भगवान की प्राप्ति आसानी से हो सकती है।
इस दौरान भगवान गोवर्धन की पूजा का चित्रण कर छप्पन भोग की झांकी सजाई गई। कथा के दौरान जिला प्रमुख सत्यनारायण चौधरी भी उपस्थित रहे, जिन्होंने भगवान की आरती की। इस दौरान चन्द्रशेखर माहुर, कमला माहुर, ओमप्रकाश शर्मा, राजमुरारी कुर्मी, राजेन्द्र माहुर, देवीलाल, मूलचन्द, पूर्णानन्द शर्मा, श्ंाकर सोनी, पुष्पा देवी, कृष्णा गुप्ता, सन्तरा देवी, मीरा देवी सहित अनेक श्रद्धालु मौजूद थे।
मालपुरा. आचार्य सुकुमालनन्दी के सान्निध्य में जयपुर रोड स्थित पाण्डुक शिला के शांतिनाथ जिनालय में समवशरण महामण्डल विधान में पं. मनोज कुमार शास्त्री टोंक की देखरेख में षष्ठम भूमि व कल्पवृक्ष भूमि की श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर अघ्र्य चढ़ाए। इस अवसर पर धर्मसभा में आचार्य सुकुमालनन्दी ने कहा कि मनुष्य को अपने जीवन में ईष्र्या से दूर रहते हुए ईश्वर के प्रति अपना ध्यान लगाना चाहिए।
उमड़े श्रद्धालु
निवाई. सकल दिगम्बर जैन समाज की ओर से संत निवास नसियां जैन मन्दिर में आचार्य सुबल सागर का केशलोंच समारोह हुआ। इसमें श्रद्धालु उमड़े। प्रवक्ता विमल जौला ने बताया कि इस दौरान णमोकार मंत्र , बारह भावना एवं महावीर चालीसा का आयोजन किया गया। इस दौरान अशोक चंवरिया, सतीश भाणजा, नितेश चंवरिया, शंभू, अंकुर चंवरिया एवं पदम चन्द जैन मौजूद थे।
आचार्य सुबल सागर का हुआ मंगल विहार: जैन समाज की ओर से जैन नसियां मंदिर से आचार्य सुबल सागर का मंगल विहार हुआ। समाज के विमल जौंला ने बताया कि 6 पिच्छी सहित जैन नसियां के मूल नायक भगवान शांतिनाथ के दर्शन करते हुए गाजे-बाजे के साथ रवाना हुए।
मंगलाचरण सतीश भाणजा ने किया। इससे पूर्व धर्मसभा हुई। आचार्य निवाई से बरोनी, सोहेला होते हुए टोंक पहुंचेंगे। इस दौरान समाज के मंत्री महावीरप्रसाद पराणा, प्रेमचन्द सावलिया, अंकुर चंवरिया थे।