
टोंक के सेंट जोसेफ विद्यालय में नवीन छात्रावास के उद्घाटन के दौरान बच्ची से फूल लेते सचिन पायलट। फोटो पत्रिका
Rajasthan Politics : कांग्रेस के दिग्गज नेता सचिन पायलट ने कहा कि शहर और गांव में अभी प्रशासक लगे हुए हैं जनता के रोज के काम अधिकारी ढंग से हल नहीं कर पाएंगे तो सबकी मांग है कि राजस्थान में जल्द से जल्द पंचायत व निकाय चुनाव कराए जाएं। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने सोमवार को सुबह टोंक सर्किट हाउस में मीडिया से बातचीत में यह मांग की।
उन्होंने कहा कि उन्हें खेद है कि भाजपा की सरकार जब से बनी है, न तो विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ के चुनाव हुए, न नगरपालिका के चुनाव हुए हैं और न ही पंचायत चुनाव हुए हैं। तो जो मूल भावना लोकतंत्र को मजबूत करने की संविधान में अंकित है, वो कैसी होगी।
सचिन पायलट ने कहा कि न जाने चुनाव आयोग क्या कर रहा है और न जाने सरकार क्या कर रही है। न्यायालय के निर्णय के बाद भी 15 अप्रैल की समय सीमा थी। उसके बाद भी यहां चुनाव नहीं कराए गए। तो सभी लोगों की मांग है कि चुनाव हों ताकि अपने वार्ड में मेंबर्स अपने निगम, परिषद में, अपने पंचायतों में लोग चुनकर जाएं ताकि जनता के काम रोज हों।
सचिन पायलट ने कहा कि अब छोटे-छोटे कामों के लिए कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक काम नहीं कर पाएंगे, सब जानते हैं। इसलिए लोगों में नाराजगी है कि बेवजह चुनाव टाले जा रहे हैं। सभी का मन है कि चुनाव हों और वह जानते है कि भाजपा की सरकार चुनाव कराना नहीं चाहती। चुनाव होंगे तो परिणाम उनके पक्ष में आने वाले नहीं हैं।
सचिन पायलट ने कहा इस डर से वह बार-बार बहाने मारकर चुनावों को टालते हैं। सबका मन है। हम कोर्ट-कचहरी का रास्ता भी अपनाएंगे और दबाव बनाएंगे कि चुनाव हों। बाकी यहां जो आम जन समस्या रहती है, उसका निराकरण करने के लिए लगातार अधिकारियों के संपर्क में हम रहते हैं लेकिन प्रदेश में मैं जिन गांव में कल गया, किसी भी गांव में मनरेगा का काम चल नहीं रहा है लगभग समाप्त है। तो मनरेगा का नाम बदलकर जो केंद्र सरकार ने पाखंड रचा था, वो अब सामने आ गया।"
सचिन पायलट ने कहा कि हम शुरू से कहते थे कि नाम बदलना उद्देश्य नहीं है, मनरेगा को समाप्त करना उद्देश्य है। आज इतिहास गवाह है, जब कांग्रेस की सरकार थी तो लाखों-लाख लोग रोज दिहाड़ी में कुछ पैसा कमाकर अपने घर जाते थे। आज राजस्थान में लगभग मनरेगा बंद हो गया। अब पूरे देश में ये हालात हो गए हैं।
सचिन पायलट ने कहा कि मनरेगा को बंद कर दिया गया। ग्रामीण क्षेत्र में विकास के लिए पैसा दे नहीं रहे हैं। पंचायतों के चुनाव करा नहीं रहे हैं। तो विकास सरकार का एजेंडा नहीं है। तो सिर्फ मैनेजमेंट कर-कर इश्तहार और अखबार पोस्टर छाप कर अपनी पीठ थपथपा रहे हैं।
इतनी घोषणाएं हो गई। अब जो बजट घोषणा हो रही है, कितनी कारगर हो रही है। चार लाख नौकरी की बात पहले बजट में की थी। अब ढाई साल पूरे हो गए हैं। कितने लोगों को नौकरी मिली है। सरकार का जो काम करने का तरीका है, वो जनता के हित में नहीं है। सब देख चुके हैं लेकिन हम पूरा दबाव बनाएंगे कि सरकार मजबूर होकर लोगों के काम करे।
गर्मी में पेयजल की व्यवस्था को लेकर सचिन पायलट ने कहा कि अभी अगले दो-चार हफ्तों के अंदर भारी किल्लत होने वाली है। तो सरकार को एहतियात बरत कर पहले से ही वॉटर सप्लाई, टैंक, वॉटर डिस्ट्रीब्यूशन, पाइपों की मरम्मत और अधिकारियों को पहले सचेत करना पड़ेगा कि दो महीने कैसे व्यवस्थित किया जाए। उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि प्रशासन इसको गंभीरता से लेकर कार्रवाई करेगा। (वार्ता)
Published on:
13 Apr 2026 02:55 pm
