जिला कलेक्टर टीना डाबी के अचानक औचक निरीक्षण (Surprise Inspection) से सरकारी महकमों में हड़कंप मच गया, जहाँ उन्होंने उपखंड और तहसील कार्यालयों में फाइलों की बारीकी से जांच की।
राजस्थान की चर्चित आईएएस और टोंक जिला कलेक्टर टीना डाबी अपने कड़े अनुशासन और कार्यशैली के लिए जानी जाती हैं। मंगलवार को टोडारायसिंह उपखंड मुख्यालय पर कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जब कलेक्टर की गाड़ी अचानक सरकारी दफ्तरों के बाहर आकर रुकी। कलेक्टर के औचक निरीक्षण की खबर जैसे ही फैली, दफ्तरों में तैनात अधिकारी और कर्मचारी अपनी सीटें छोड़कर रिकॉर्ड व्यवस्थित करने और फाइलें छिपाने की जद्दोजहद में जुट गए।
जिला कलेक्टर टीना डाबी ने बिना किसी पूर्व सूचना के उपखंड अधिकारी (SDO) कार्यालय, तहसीलदार कार्यालय और पंचायत समिति का रुख किया।
कलेक्टर ने केवल कार्यालयों का भौतिक निरीक्षण ही नहीं किया, बल्कि राज्य सरकार की फ्लैगशिप और जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट भी जांची।
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर टीना डाबी का मानवीय चेहरा भी सामने आया। दफ्तरों के बाहर अपनी शिकायतों के समाधान का इंतजार कर रहे पीड़ितों को देखकर कलेक्टर ने उन्हें पास बुलाया और उनकी समस्याएं सुनीं।
निरीक्षण के बाद बार एसोसिएशन टोडारायसिंह के अध्यक्ष राकेश गांगवाल के नेतृत्व में अधिवक्ताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलेक्टर से शिष्टाचार भेंट की।
टीना डाबी के इस 'छापेमार' स्टाइल निरीक्षण के बाद टोडारायसिंह के प्रशासनिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि क्या कुछ लापरवाह कर्मचारियों पर गाज गिरने वाली है? कलेक्टर ने जिस तरह से फाइलों की जांच की और रिकॉर्ड में विसंगतियां देखीं, उससे संकेत मिल रहे हैं कि जल्द ही कुछ कड़े प्रशासनिक आदेश देखने को मिल सकते हैं। आखिर टीना डाबी ने अपनी डायरी में किन खामियों को नोट किया है, इसका खुलासा होना अभी बाकी है।