अब तक प्रशासन ने उनकी कोई मदद नहीं की। उनको वो राशि भी नहीं मिली जो न्यायालय में मामले का चालान पेश होने के बाद मिलती है।
टोंक. नाबालिग तथा शारीरिक रूप से कमजोर दुष्कर्म पीडि़ता गुरुवार को आखिर प्रशासन से मिलने पहुंची। इससे पहले तक प्रशासन ने उसकी कोई सुध नहीं ली।
जब राजस्थान पत्रिका ने 28 जून के अंक में ‘आंखों में रह गए सिर्फ आंसू’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया तो प्रशासन सचेत हुआ और चिकित्सा समेत अन्य सुविधा देने की तैयारी की।
साथ ही खबर प्रकाशित होने के बाद अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन की महिला प्रदेशाध्यक्ष नीलिमा सिंह आमेरा तथा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग में सखी वन स्टॉफ केन्द्र प्रशासक भावना सक्सेना घाड़ थाना क्षेत्र के पीडि़ता के गांव पहुंची।
उन्होंने दुष्कर्म की पीडि़ता तथा उनके परिजनों से मामले की जानकारी ली। इसमें सामने आया कि अब तक प्रशासन ने उनकी कोई मदद नहीं की। उनको वो राशि भी नहीं मिली जो न्यायालय में मामले का चालान पेश होने के बाद मिलती है।
पीडि़ता की मां ने बताया कि उसकी पुत्री नाबालिग होने के साथ शरीर से कमजोर है। वह शारीरिक रूप से बच्चे को जन्म देने के लिए तैयार नहीं है।
वहीं गांव में प्रसव पीड़ा या गर्भ से सम्बन्धित कोई समस्या हुई तो वे समय पर टोंक तथा अन्य अस्पताल भी नहीं पहुंच पाएंगे।
इसके बाद नीलिमा सिंह तथा भावना उन्हें टोंक ले आई। उन्होंने जिला कलक्टर आर. सी. ढेनवाल से मुलाकात की और सहायता की गुहार लगाई।
इस पर कलक्टर ने कहा कि वे पीडि़ता तथा उसकी मां को टोंक में रखने की व्यवस्था करेंगे। उसका उपचार भी समय-समय पर देखरेख के साथ होगा।
पीडि़ता तथा उसकी मां टोंक स्थित बाल कल्याण समिति की देखरेख में रहेगी। जहां उसका समय-समय पर उपचार तथा रहने की सुविधा होगी। इसके आदेश जारी किए हैं। मां-बेटी को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होगी।
आर. सी. ढेनवाल, जिला कलक्टर, टोंक
फिलहाल कोई आदेश नहीं मिला, लेकिन पीडि़ता व उसकी मां हमारे पास आती है तो हम सभी सुविधाएं देंगे।
रवि शर्मा, अध्यक्ष, बाल कल्याण समिति, टोंक
पीडि़ता नाबालिग के साथ शरीर से कमजोर है। साथ ही परिवार की आर्थिक स्थिति भी इतनी दयनीय है कि बताया नहीं जा सकता, लेकिन हम इनके साथ अंतिम समय तक रहेंगे।
नीलिमा सिंह आमेर, प्रदेशाध्यक्ष, महिला अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन