Isarda Drinking Water Project: ईसरदा पेयजल परियोजना के आरएल मीटर 262.80 मीटर के डूब क्षेत्र में आने वाले गांवों के किसानों ने 21 सूत्री मांगों को लेकर शहर में रैली निकाल प्रदर्शन किया।
टोंक। ईसरदा पेयजल परियोजना के आरएल मीटर 262.80 मीटर के डूब क्षेत्र में आने वाले गांवों के किसानों ने 21 सूत्री मांगों को लेकर शहर में रैली निकाल प्रदर्शन किया। डूब क्षेत्र के 39 गांवों के किसान पहले मेहगांव में एकत्र हुए। यहां से रैली के रूप में नारे लगाते हुए जयपुर-कोटा हाईवे पर चक्का जाम करने के लिए रवाना हुए। उन्हें पुलिस और प्रशासन ने हाईवे किनारे पर पक्का बंधा क्षेत्र में रोक लिया गया। जहां किसान धरने पर बैठ गए।
इसके बाद मौके पर पहुंचे एडीएम पुनर्वास, एसडीओ तथा पुलिस के अधिकारी पहुंचे और वार्ता शुरू की। जहां किसानों ने अपनी 21 सूत्री मांग रखी। प्रशासन ने किसानों को हाईवे जाम करने से रोका और 21 में से 18 मांगों पर वार्ता शुरू की। जहां दोनों के बीच सहमति बन गई। इसके बाद किसान अपने गांव के लिए रवाना हो गए।
किसानों ने अधिकारियों को बताया कि क्षेत्र की समस्त भूमि सिंचित है एवं सरकार की ओर से बारानी का मुआवजा दिया जा रहा है। सिंचित भूमि की दर से मुआवजा दिया जाए। भूमि अर्जन पुनर्वासन और पुन: व्यवस्थापन में नियमों की पालना की जाए। ग्रामीण क्षेत्र की दशा में निकटतम शहरी क्षेत्र सीमा से अवाप्ति के लिए प्रस्तावित परियोजना की दूरी के आधार पर देय प्रतिकर पैकेज के निर्धारण में बाजार मूल्य को गुणा किया जाए। इसमें किलोमीटर की सीमा क्षेत्र हटाते हुए समस्त कृषि भूमि का बाजार दर का 4 गुणा मुआवजा दिया जाए। प्रत्येक परिवार के मुखिया और व्यस्क सदस्य को जो राशि दी जा रही है वो वर्तमान में जीवन यापन करने की दशा में बहुत ही कम है। उसे बढ़ाकर 21 लाख रुपए प्रति सदस्य एवं 60 गुणा 100 का भूखण्ड़ दिया जाए।
डूब क्षेत्र के किसानों को कृषि भूमि के रूप में हर परिवार को 6 बीघा जमीन बीसलपुर परियोजना की भांति विशेष पैकेज के रूप में दी जाए। डूब क्षेत्र में आने वाले सिंचाई के साधन कुआं, नल कूप, पाइप लाइन, बोरिंग, लाइट कनेक्शन के साथ पोल, खेली चाटा, होदी, पानी टंकी एवं चल अंचल सम्पति का वर्तमान वर्ष 2025 की बीएसआर दर से मुआवजा दिया जाए। कच्चे-पक्के मकानों का वर्तमान की बीएसआर दर 2025 से 4 गुणा मुआवजा दिया जाए। चरागाह व सिवायचक भूमि में बसे हुए परिवारों को भी आबादी की तरह मुआवजा दिया जाए।
डूब क्षेत्र के विस्थापितों को भूमि अधिकार नियम अधिनियम 2013 के आदेश की पालना में नजदीक ग्राम पंचायत में सुविधा युक्त भूमि आंवटन करके समस्त सुविधाओं के साथ उसमें बसाया जाए। डूब क्षेत्र में आने वाले मंदिर व धार्मिक स्थानों का मुआवजा भी सभी से राय कर दिया जाए। प्रसिद्ध मंदिरों के परकोटा बनाया जाए। डूब क्षेत्र के प्रत्येक परिवार के मुखिया को संविदा पर नौकरी दी जाए। प्रथम चरण के किसानों व विस्थापितों का भी दोबारा से सर्वे करवाकर समस्त मांगों के आधार पर मुआवजा दिया जाए। डूब क्षेत्र की भराव क्षमता 258 आर एल मीटर रहे।
प्रशासनिक अधिकारियों ने कहा कि अभी विधानसभा सत्र चल रहा है। फिर भी उनकी मांगों को सरकार तक पहुंचाकर पूरा कराया जाएगा। उन्होंने भूमि जमाबन्दी अनुसार सिंचित के अनुसार मुआवजा निर्धारित करने को कहा। प्रतिकर निर्धारण में बाजार मूल्य को गुणा किया जाएगा। पुनर्वासन एवं पुन:व्यवस्थापन की स्थिति में अधिनियम 2013 की द्वितीय अनुसूची के उपबंधों के अनुरूप मुआवजा दिया जाएगा।
परिसम्पत्तियों की मूल्यांकन कीमत तथा शत प्रतिशत तोषण राशि देय होगी। चरागाह में बसे परिवार अतिक्रमी की श्रेणी में होने से राज्य सरकार की ओर से अनुग्रह राशि स्वीकृत करने की स्थिति में निर्माण राशि अनुग्रह के रूप में दी जा सकती है। विस्थापन की दशा में निकटतम स्थित विकसित कॉलोनी में भूखण्ड का आवंटन किया जा सकेगा। धारा 16 के तहत पुनर्वासन एवं पुन:व्यवस्थापन स्कीम तैयार की जाएगी। इसमें पात्र परिवारों को नियमानुसार देय समस्त लाभ दिए जाएंगे।
यह प्रदर्शन ईसरदा बांध डूब क्षेत्र संघर्ष समिति के बैनर तले किया गया। इसमें हंसराज फागणा, देवलाल गुर्जर, मुकेश, रामसहाय, छीतर, रामचन्द्र, मौजीराम, रामबिलास, कालू, सुखदेव, प्रकाश बैरागी, मनोहरलाल, देशीशंकर बैरवा समेत सैकड़ों लोग शामिल थे।