
शहर के समीप लहन-पालड़ा रोड पर संचालित ईंट भट्टे। फोटो- पत्रिका
टोंक। जिले में कृषि भूमि का बिना भू-रूपांतरण किए गैर कृषि एवं व्यावसायिक गतिविधियां संचालित किए जाने के मामलों ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। राजस्व विभाग की प्रारंभिक जांच में टोंक तहसील क्षेत्र में 35 खातेदार ऐसे पाए गए हैं, जिन्होंने नियमानुसार रूपांतरण कराए बिना ही खेतों का व्यावसायिक उपयोग शुरू कर दिया। विभाग ने सभी को कारण बताओ नोटिस जारी कर निर्धारित अवधि में जवाब तलब किया है।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार कई स्थानों पर कृषि भूमि का उपयोग बजरी भंडारण, ईंट भट्टों के संचालन, मिट्टी दोहन तथा अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा है। जबकि राजस्थान भू-राजस्व नियमों के तहत कृषि भूमि को अन्य प्रयोजन में लेने से पहले विधिवत भू-रूपांतरण की प्रक्रिया अनिवार्य है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए बिना भू-रूपांतरण कृषि भूमि का उपयोग करने वाले खातेदारों की भूमि को सिवायचक भूमि में बदलने की कार्रवाई शुरू की गई है। राजस्व विभाग ने इस संबंध में उपखंड अधिकारी को पत्र भेजकर आवश्यक कार्रवाई का अनुरोध किया है, ताकि कृषि भूमि का उपयोग व्यावसायिक रूप से नहीं किया जाए।
मंडावर क्षेत्र में बजरी के अवैध कारोबार की गतिविधियां सामने आई हैं। यहां कृषि खातेदारी भूमि पर बजरी का भंडारण एवं परिवहन किया जाना पाया गया। स्थानीय स्तर पर मिली शिकायतों के बाद राजस्व अमले ने मौके का निरीक्षण किया। प्रारंभिक जांच में बिना स्वीकृति बजरी कारोबार संचालित होने की पुष्टि हुई है। इससे न केवल राजस्व हानि हो रही है, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
लहन, पालड़ा, अहमगंज और अहमदपुरा गांवों में कृषि भूमि पर ईंट भट्टों का संचालन तथा मिट्टी दोहन के मामले सामने आए हैं। आरोप है कि संबंधित खातेदारों ने न तो भू-रूपांतरण कराया और न ही आवश्यक स्वीकृतियां लीं। खेतों से बड़े पैमाने पर मिट्टी निकाले जाने से भूमि की उपजाऊ शक्ति प्रभावित होने की आशंका भी व्यक्त की जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से इन गतिविधियों की जानकारी प्रशासन को दी जा रही थी, लेकिन समय पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से अवैध कार्यों को बढ़ावा मिला। खेतों में व्यावसायिक गतिविधियां खुलेआम संचालित होती रहीं।
35 खातेदारों को नोटिस जारी कर दिए गए हैं। नियमानुसार जवाब मिलने के बाद प्रकरणों की सुनवाई की जाएगी। रिपोर्ट उपखंड अधिकारी कार्यालय को भेजी गई है।
तहसील से भी सूची ली जाएगी। इसके बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
Published on:
13 Feb 2026 06:51 pm
बड़ी खबरें
View Allटोंक
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
