Land Settlement: राजस्थान में टोंक जिले के तीन क्षेत्रों करीब 45 वर्ष बाद भूमि सेटलमेंट की प्रक्रिया फिर से शुरू होने जा रही है।
पीपलू। पीपलू, देवली और मालपुरा क्षेत्र में करीब 45 वर्ष बाद भूमि सैटलमेंट की प्रक्रिया फिर से शुरू होने जा रही है। इससे पहले वर्ष 1978-81 के दौरान सैटलमेंट कार्य किया गया था। इस बार पूरी कार्यवाही आधुनिक तकनीक और डिजिटल प्रणाली के माध्यम से की जाएगी, जिससे जमीन की नाप-जोख अधिक सटीक और पारदर्शी हो सकेगी।
प्रशासन के अनुसार सैटलमेंट का कार्य लगभग एक वर्ष तक चलेगा। इस दौरान गांव-गांव में ग्राम सभाएं आयोजित की जाएंगी। संबंधित हल्का पटवारी और सेटलमेंट टीम गांवों में पहुंचकर ग्रामीणों को सैटलमेंट प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी देगी तथा किसानों से संवाद कर उनकी समस्याएं सुनेगी। मौके पर ही आवश्यक जानकारी एकत्र की जाएगी और आपत्तियां भी दर्ज की जाएंगी।
पीपलू क्षेत्र में इस कार्य के लिए 13 सैटलमेंट अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। खेतों की माप आधुनिक उपकरणों से की जाएगी, जबकि पूर्व में जरीब के माध्यम से नाप-जोख होती थी। डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने से भविष्य में नामांतरण, बंटवारा और अन्य राजस्व संबंधी कार्यों में सुविधा होगी।
ग्राम पंचायत सोहेला में सैटलमेंट टीम द्वारा ग्राम सभा का आयोजन किया गया। ग्राम सभा में भू प्रबंधक (सेटलमेंट) विनोद जैन, सतीश यादव, पूजा, भू-अभिलेख निरीक्षक योगेंद्र भारद्वाज, हल्का पटवारी खेमराज वर्मा, पटवारी हाडीकला रामकुमार मीणा, ग्राम प्रत्यारी हरिओम चौबदार सहित ग्रामीणों में भेरुलाल गुर्जर, धर्मराज गुर्जर, किशन बैरवा, रफीक मंसूरी, हंसराज गुर्जर, रामस्वरूप खारोल, रामकिशोर बेरवा एवं अन्य ग्रामीण उपस्थित रहे।
गौरतलब है कि जिले की कुछ तहसीलों उनियारा, अलीगढ़ और दूनी में सैटलमेंट का कार्य लगभग पूर्ण हो चुका है। अब पीपलू, देवली और मालपुरा में इस प्रक्रिया के प्रारंभ होने से किसानों को अपनी भूमि से जुड़े रिकॉर्ड दुरुस्त कराने का अवसर मिलेगा।