टोंक

Naresh Meena: समरावता थप्पड़कांड में नरेश मीणा की जमानत खारिज, गिरफ्तारी वारंट जारी

Samravata Slap Case: समरावता थप्पड़ कांड के आरोपी नरेश मीणा की जमानत एससी-एसटी मामलों की विशेष अदालत ने रद्द कर दी है। अदालत ने जमानत की शर्तों के उल्लंघन का हवाला देते हुए उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट भी जारी किया है।
2 min read
Jul 13, 2026
Naresh Meena
नरेश मीणा। फाइल फोटो- पत्रिका

टोंक। समरावता थप्पड़ कांड के आरोपी और पूर्व निर्दलीय प्रत्याशी नरेश मीणा की टोंक स्थित एससी, एसटी मामलों की विशेष अदालत ने जमानत निरस्त करते हुए गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया है। अदालत के आदेश के बाद अब पुलिस कभी भी उनकी गिरफ्तारी कर सकती है। नरेश मीणा को इस प्रकरण में 13 जुलाई 2025 को राजस्थान हाईकोर्ट से सशर्त जमानत मिली थी। आरोप है कि उन्होंने जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया।

पुलिस ने दिया था आवेदन

इसे आधार बनाते हुए नगरफोर्ट थाना पुलिस ने विशेष लोक अभियोजक रामावतार सोनी के माध्यम से एससी, एसटी कोर्ट में जमानत निरस्त करने का आवेदन प्रस्तुत किया। अदालत ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद पुलिस की ओर से प्रस्तुत तथ्यों को देखते हुए नरेश मीणा की जमानत रद्द कर दी और उनके विरुद्ध गिरफ्तारी वारंट जारी करने के आदेश दिए।

पुलिस की ओर से अदालत में प्रस्तुत आवेदन में बताया कि पीपलोदी स्थित सरकारी विद्यालय की छत गिरने से छात्रों की मौत के बाद हुए धरना-प्रदर्शन के दौरान नरेश मीणा को गिरफ्तार किया गया था। इस मामले में उनके खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज की गई थी। पुलिस ने इसे हाईकोर्ट की ओर से दी गई जमानत की शर्तों के उल्लंघन का आधार बताते हुए जमानत निरस्त करने की मांग की थी।

संविधान की भावना के खिलाफ

वहीं दूसरी तरफ नरेश मीणा ने कहा कि नगरफोर्ट थाना पुलिस ने झालावाड़ स्कूल हादसे में जान गंवाने वाले सात बच्चों के परिजनों से मिलने के दौरान हुई उनकी गिरफ्तारी को हाईकोर्ट की जमानत की शर्तों का उल्लंघन बताकर टोंक की एससी-एसटी कोर्ट में आवेदन पेश किया। उनका कहना है कि अगर पीड़ित परिवार से मिलने जाना भी जमानत का उल्लंघन माना जाएगा, तो यह संविधान की भावना के खिलाफ होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि अदालत को गलत जानकारी देकर गुमराह किया गया। नरेश मीणा ने कहा कि उन्हें लगता है कि पूरे मामले में सत्ता का दबाव था। उन्होंने भाजपा पर गरीबों, मजदूरों, किसानों और युवाओं के खिलाफ काम करने का आरोप भी लगाया।

क्या है थप्पड़कांड और समरावता हिंसा?

आपको बता दें कि यह मामला 13 नवंबर 2024 को देवली-उनियारा विधानसभा उपचुनाव के दौरान शुरू हुआ था। समरावता गांव में वोटिंग के दिन नरेश मीणा ने उपखंड अधिकारी (एसडीएम) अमित चौधरी को थप्पड़ मार दिया था, जिससे पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई। इसके बाद उनके समर्थकों ने पुलिस पर पथराव किया, वाहनों में आग लगा, और नरेश को पुलिस हिरासत से छुड़ा लिया। अगले दिन 14 नवंबर को भारी पुलिस बल ने नरेश मीणा को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने इस मामले में 59 लोगों को नामजद किया गया था। समरावता मामले में नरेश मीणा को राजस्थान हाईकोर्ट से जमानत मिली थी और वह टोंक जेल से रिहा हुए थे।

Updated on:
13 Jul 2026 09:30 pm
Published on:
13 Jul 2026 09:16 pm