बच्चों के रपट पट्टी, झूले-चकरी, रोर्कस आदि लगाए, लेकिन लगाने के कुछ समय में ही ये क्षतिग्रस्त हो गए।
देवली. नगर पालिका की ओर से शहर के वार्ड 17 स्थित शहीद रामगोपाल पार्क में लगाए झूले-चकरियां लगाने के कुछ माह के बाद ही क्षतिग्रस्त हो गए। ऐसे में मनोरंजन के स्थान पर कॉलोनी के बच्चों को निराशा हाथ लग रही है।
उल्लेखनीय है कि गत 15 अप्रेल को विधायक, पालिकाध्यक्ष समेत जनप्रतिनिधियों ने शहर के चार पार्कों के जीर्णोद्धार कार्यों का लोकार्पण किया था। इनमें पटेल नगर पार्क, विवेकानंद पार्क, गांधी पार्क व शहीद रामगोपाल पार्क शामिल है।
इनमें रामगोपाल पार्क में नगर पालिका ने बच्चों के रपट पट्टी, झूले-चकरी, रोर्कस आदि लगाए, लेकिन लगाने के कुछ समय में ही ये क्षतिग्रस्त हो गए। इसके चलते पार्क आने वाले बच्चों को निराशा हाथ लग रही है।
कॉलोनीवासियों ने बताया कि बच्चों के खेल उपकरण टूटे काफी समय हो गया, लेकिन पालिकाकर्मी इनकी मरम्मत की सुध नहीं ले रहे। इसके अलावा विवेकानंद व गांधी पार्क में लोकार्पण के तीन माह बाद भी लाइटें नहीं लगी।
हालांकि दोनों पार्को में एलईडी लाइटों के लिए पोल तो खड़े कर दिए, लेकिन अभी तक इन पर लाइटें नहीं लगाई गई। लिहाजा क्षेत्रवासियों को रात्रि भ्रमण के दौरान असुविधा हो रही है। लोगों ने बताया कि अंधेरा होने के चलते उन्हें घूमने में दिक्कतें हो रही है।
लिहाजा मोबाइल फोन की टार्च जलाकर उन्हें घूमना पड़ता है। इधर, नगर पालिका मण्डल का जन सुविधाओं की ओर ध्यान नहीं है।
प्रकृति के शृंगार की कवायद
टोडारायसिंह. वनविभाग ने पर्यावरण सुरक्षा की दृष्टि से विभिन्न किस्मों के करीब डेढ़ लाख पौधे तैयार किए है। वनविभाग के तहत प्रतिवर्ष हजारों पौधे तैयार किए जाते है। लेकिन इस वर्ष पानी की कमी के बीच विपरीत परिस्थितियों में भी वनकार्मिकों ने पौधे तैयार किए है।
पहले पहाड़ी तलहटी में स्थित भाण्ड की बावड़ी पौध शाला में पौधे तैयार किए जाते थे। जहां पौधों को प्राचीन भाण्ड बावडी से ही सिंचित किया जाता था, लेकिन जल स्तर गिरने के कारण बावड़ी में पर्याप्त पानी नहीं है। हालाकि निम्न स्तर पर पौध शाला तैयार की गई है।
लेकिन इस बार बडे स्तर पर बीसलपुर बांध किनारे करीब 6 हैक्टेयर में फैली थड़ोला नर्सरी में वनकार्मिक छोटू माली, किशन समेत अन्य कार्मिकों ने विभिन्न किस्मों के पौधे तैयार किए गए है। वनपाल रघुवीर सिंह ने बताया कि पहली बार पौधे तैयार करने में पानी की कमी महसूस की गई है।
फिर भी नीम, बरगद, पीपल, बबूल, करेंज, गुलाब, शीशम, अमरूद, अनार, मोगरा, चम्पा, बिल्व समेत दर्जनों प्रजाति के करीब डेढ़ लाख पौधे तैयार किए गए है। पर्यावरण सुरक्षा को लेकर आमजन को प्रेरित करने के साथ विभिन्न संस्थाओं के माध्यम से प्रकृति के शृंगार को लेकर पौधे लगाए जाएंगे।