चिकित्सा आयुष व आयुर्वेद के भरोसे रहने से गम्भीर रोगियों को समय पर उपचार नहीं मिला।
टोंक. चिकित्सकों की हड़ताल के चलते सरकारी अस्पतालों का आउटडोर घट गया है। सआदत अस्पताल में भी रविवार को सभी वार्डों में सन्नाटा पसरा रहा। अन्य दिनों का भी आउटडोर घटकर औसतन 200 रह गया।
जबकि चिकित्सकों की हड़ताल से पहले सआदत अस्पताल का आउटडोर डेढ़ हजार से अधिक था। इसी प्रकार इन्डोर दो सौ रहता था। इधर, चिकित्सा आयुष व आयुर्वेद के भरोसे रहने से गम्भीर रोगियों को समय पर उपचार नहीं मिला। कई रोगी अस्पताल आए तो सही, लेकिन उपचार नहीं मिलने से निराश लौट गए।
निजी अस्पतालों में भी सुबह दो घंटे चिकित्सकों ने कार्य का बहिष्कार कर विरोध जताया। इण्डियन मेडिकल एसोसिएशन के सचिव डॉ. राजेश मालपानी ने बताया कि सोमवार को दिनभर अस्पताल बंद रखने का निर्णय फिलहाल टाल दिया गया है। इसके तहत अब महज दो घंटे ही चिकित्सा कार्य बंद रखा जाएगा।
इधर, सआदत समेत जनाना अस्पताल में मरीजों की संख्या कम रही। इससे नर्सेज भी ठाले बैठे रहे। दूसरी ओर निजी अस्पतालों में दिनभर मरीजों का तांता लगा रहा। सुरेली गांव से आए रामफूल का कहना था कि निजी में उपचार महंगा पर सेहत की फ्रिक भी तो जरूरी है।
पलाई. आयुर्वेदिक औषधालय भी हड़ताल के चलते सुनसान पड़ा है। आयुर्वेद चिकित्सक अवधेश गौतम की ड्यूटी अलीगढ़ मुख्यालय पर होने व कम्पाउण्डर की पोस्ट खाली होने से मरीजों को इलाज के अभाव में परेशान होना पड़ रहा है। औषधालय मात्र चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के हवाले है।
जनप्रतिनिधि भी नहीं ले रहे सुध
गांव से लेकर शहर तक मरीजों को पूरा उपचार नहीं मिल पा रहा। आयुर्वेद व आयुष चिकित्सक मरीजों को परामर्श तो दे रहे हैं, लेकिन वे आयुर्वेदिक दवा ही लिख रहे हैं। आयुर्वेदिक दवा का अभाव होने से मरीज निराश लौट रहे हैं।
दूसरी ओर इस बार जनप्रतिनिधि भी मरीजों की सुध नहीं ले रहे हैं। जबकि पिछली बार कई जनप्रतिनिधियों ने अस्पताल पहुंचकर मरीजों की पीड़ा सुनी थी व व्यवस्थाओं का जायजा लिया था।