
निवाई (टोंक): निकाय चुनाव के नतीजे सामने आए तो जीत-हार का हिसाब भी साफ हो गया, लेकिन चुनावी घमासान के बाद एक सवाल अभी भी राजनीतिक गलियारों में गूंज रहा है। अपनी ही पार्टी के खिलाफ मैदान में उतरे बागियों पर कार्रवाई कब होगी? टिकट नहीं मिलने से नाराज होकर भाजपा और कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशियों के सामने चुनाव लड़ने वाले नेताओं को लेकर दोनों दलों के कार्यकर्ताओं में चर्चा तेज है। शहर के चौराहों से लेकर राजनीतिक बैठकों तक फिलहाल नतीजों से ज्यादा नजर पार्टी नेतृत्व के अगले कदम पर है।
निकाय चुनाव में टिकट वितरण के बाद दोनों दलों में असंतोष खुलकर सामने आया था। कई टिकट दावेदारों ने पार्टी के फैसले से नाराज होकर अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरने का फैसला किया। बागियों के चुनाव लड़ने से कई वार्डों में मुकाबला त्रिकोणीय हुआ और पार्टी प्रत्याशियों के समीकरण प्रभावित हुए। परिणाम के बाद जहां विजेता खेमे में जश्न का माहौल रहा, वहीं हारने वाले और उनके समर्थकों के बीच बगावत को लेकर चर्चा शुरू हो गई।
सबसे ज्यादा चर्चा आगामी पंचायतराज चुनाव को लेकर है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि निकाय चुनाव में बगावत करने वाले नेताओं पर कार्रवाई नहीं हुई तो आगामी चुनाव में टिकट वितरण के बाद भी ऐसी स्थिति सामने आ सकती है। इससे पार्टी प्रत्याशियों को भीतरघात और बगावत की चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। अब स्थानीय संगठन और पार्टी नेतृत्व के फैसले पर निगाहें टिकी हैं।
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि दोनों दल बागियों के मामले में क्या रुख अपनाते हैं। कार्रवाई हुई तो इसे संगठनात्मक अनुशासन से जोड़कर देखा जाएगा, जबकि कार्रवाई नहीं होने पर कार्यकर्ताओं के बीच उठ रहे सवालों की चर्चा आगे भी जारी रहने की संभावना है। निकाय चुनाव का परिणाम भले ही आ गया हो, लेकिन निवाई की सियासत में बागियों का अध्याय अभी बंद होता नजर नहीं आ रहा।
चुनाव में हार का सामना करने वाले कुछ प्रत्याशियों के समर्थक पार्टी नेतृत्व से बागियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि टिकट नहीं मिलने की नाराजगी अपनी जगह है, लेकिन अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ चुनाव लड़ना संगठन के अनुशासन से जुड़ा मामला है। ऐसे में कार्रवाई नहीं होने पर संगठन में अनुशासन को लेकर गलत संदेश जाने की आशंका जताई जा रही है।