
टोंक। राजस्थान स्टेट माईन्स एण्ड मिनरल्स लिमिटेड जयपुर के तत्वावधान में मंगलवार को ड्रेजिंग कोर्पोरेशन इन्डिया विशाखापट्टनम के दल ने जलभराव क्षेत्र का निरीक्षण किया। वहीं बांध पर स्थित रेस्ट हाउस में बांध परियोजना के अभियंताअभियंताओं के साथ बैठक की। बैठक के दौरान बांध के कुल जलभराव क्षेत्र, बजरी की गुणवत्ता, पानी से निकाली जाने वाली बजरी व मिट्टी के स्टोक के लिए खाली जमीन आदि पर चर्चा की गई।
बांध के जल भराव में होगी बढ़ोतरी
विशाखापट्टनम के दल ने बनास नदी व डाई नदियों के किनारों पर जाकर बजरी व मिट्टी की गहराई आदि का निरीक्षण किया। बांध से निकलने वाली बजरी को निर्यात कर राजस्व आय मे बढ़ोतरी होने के साथ ही बांध के जल भराव में भी बढ़ोतरी होगी। इस दौरान बीसलपुर बांध परियोजना में अभियंताओं के साथ खनिज विभाग जयपुर के अतिरिक्त निदेशक एम पी मीणा, बांध परियोजना के अधिक्षण अभियंता वीएस सागर, अधिशासी अभियंता आर सी कटारा, तहसीलदार देवली मानसिंह सिंह आमेरा सहित दर्जनभर अधिकारी कर्मचारी मौजूद रहे।
बीसलपुर बांध राजस्थान जिले की बनास नदी पर बना है। इसका निर्माण कंक्रीट से हुआ हैं। यह बांध जयपुर, टोंक, अजमेर सहित कई शहरों की प्यास बुझाता है व सिंचाई की जरूरतों को पूरा करता है। बीसलपुर राजस्थान के टोंक जिले में स्थित एक गाँव है और यह अपने भगवान गोकर्णेश्वर के प्राचीन मंदिर के लिए प्रसिद्द है। बनास नदी पर बनाया गया बीसलपुर बाँध बीसलपुर का दूसरा आकर्षण है जो इस गाँव को चर्चा में लाता है। यह बाँध दो चरणों में बनाया गया। पहले चरण का उद्देश्य गाँव के लोगों को पीने का पानी उपलब्ध करवाना था जबकि दूसरे चरण का उद्देश्य सिंचाई की सुविधाओं में सुधार लाना था। यह बाँध 574 मीटर लंबा और 39.5 मीटर ऊँचा है।