टोंक

SDM थप्पड़ कांड: अब मांगा नरेश मीणा की प्रॉपर्टी का रिकॉर्ड, कोर्ट ने 10 दिन पहले जारी किया था गिरफ्तारी वारंट

Naresh Meena: टोंक के देवली-उनियारा उपचुनाव के दौरान एसडीएम को थप्पड़ मारने के मामले में निर्दलीय प्रत्याशी रहे नरेश मीणा की मुश्किलें थमने का नाम नहीं ले रही है। कोर्ट से गिरफ्तारी वारंट जारी होने के 10 दिन बाद अब नगरफोर्ट थाना पुलिस ने नरेश मीणा से चल-अचल संपत्ति का रिकॉर्ड मांगा है।
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Jul 23, 2026
Naresh Meena
नरेश मीणा। पत्रिका फाइल फोटो

टोंक। टोंक के देवली-उनियारा उपचुनाव के दौरान एसडीएम को थप्पड़ मारने के मामले में निर्दलीय प्रत्याशी रहे नरेश मीणा की मुश्किलें थमने का नाम नहीं ले रही है। कोर्ट से गिरफ्तारी वारंट जारी होने के 10 दिन बाद अब नगरफोर्ट थाना पुलिस ने नरेश मीणा से चल-अचल संपत्ति का रिकॉर्ड मांगा है, जिसे एससी, एसटी मामलों की विशेष अदालत टोंक में पेश किया जाएगा। ऐसे में माना जा रहा है कि एसडीएम को थप्पड़ मारने वाले नरेश मीणा की फिर से गिरफ्तारी हो सकती है।

नगरफोर्ट थानाधिकारी राजेंद्र ताड़ा की ओर से नरेश मीणा की चल अचल संपत्ति के रिकॉर्ड के लिए ग्राम पंचायत नयागांव उर्फ नानवता के सरपंच (प्रशासक) को पत्र भेजा गया है। जिसमें कहा गया है कि टोंक कोर्ट की ओर से अभियुक्त नरेश पुत्र कल्याण सिंह मीणा निवासी नयागांव उर्फ नानवता थाना मोठपुर जिला बांरा का चल-अचल सम्पत्ति का रिकॉर्ड मांगा गया है। ऐसे में नरेश मीणा की चल-अचल सम्पत्ति रिकॉर्ड उपलब्ध कराए, ताकि कोर्ट के समक्ष रिकॉर्ड पेश किया जा सके।

कोर्ट ने जारी किया था गिरफ्तारी वांरट

बता दें कि समरावता थप्पड़ कांड के आरोपी तथा पूर्व निर्दलीय प्रत्याशी नरेश मीणा की 13 जुलाई को एससी, एसटी मामलों की विशेष अदालत टोंक ने जमानत अर्जी निरस्त करते हुए गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। नरेश मीणा को इस प्रकरण में 13 जुलाई 2025 को राजस्थान हाईकोर्ट से सशर्त जमानत मिली थी। आरोप है कि उन्होंने जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया। इसे आधार बनाते हुए नगरफोर्ट थाना पुलिस ने विशेष लोक अभियोजक रामावतार सोनी के माध्यम से एससी, एसटी कोर्ट में जमानत निरस्त करने का आवेदन प्रस्तुत किया गया था। अदालत ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद पुलिस की ओर से प्रस्तुत तथ्यों को देखते हुए नरेश मीणा की जमानत रद्द की थी और उनके विरुद्ध गिरफ्तारी वारंट जारी करने के आदेश दिए थे।

राकेश बैंसला बोला- नरेश मीणा की लोकप्रियता से घबराई सरकार

पुलिस की ओर से अदालत में प्रस्तुत आवेदन में बताया कि पीपलोदी स्थित सरकारी विद्यालय की छत गिरने से छात्रों की मौत के बाद हुए धरना-प्रदर्शन के दौरान नरेश मीणा को गिरफ्तार किया गया था। इस मामले में उनके खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज की गई थी। वहीं, नरेश मीणा के सहयोगी राकेश बैंसला का कहना है कि सरकार उनकी बढ़ती लोकप्रियता से डर गई है और पंचायत चुनाव से पहले उन्हें जेल में रखकर किसानों और छात्रों की आवाज दबाना चाहती है। राकेश बैंसला ने आरोप लगाया कि पहले स्पेशल लोक अभियोजक नियुक्त कर जमानत रद्द कराई गई और अब उनकी संपत्ति का रिकॉर्ड मंगवाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वे न्यायपालिका के आदेश का सम्मान करते हैं और उन्हें भरोसा है कि अदालत नरेश मीणा को न्याय देगी।

क्या है थप्पड़कांड और समरावता हिंसा?

बता दें कि यह मामला 13 नवंबर 2024 को देवली-उनियारा विधानसभा उपचुनाव के दौरान शुरू हुआ था। समरावता गांव में वोटिंग के दिन नरेश मीणा ने उपखंड अधिकारी (एसडीएम) अमित चौधरी को थप्पड़ मार दिया था, जिससे पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई। इसके बाद उनके समर्थकों ने पुलिस पर पथराव किया, वाहनों में आग लगा, और नरेश को पुलिस हिरासत से छुड़ा लिया। अगले दिन 14 नवंबर को भारी पुलिस बल ने नरेश मीणा को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने इस मामले में 59 लोगों को नामजद किया गया था। समरावता मामले में नरेश मीणा को राजस्थान हाईकोर्ट से जमानत मिली थी और वह टोंक जेल से रिहा हुए थे।

Updated on:
23 Jul 2026 10:07 am
Published on:
23 Jul 2026 10:07 am