विद्यार्थियों को निजी विद्यालयों के समान सुविधाएं देने का दावा हुआ फेल...
टोंक। शिक्षा विभाग ने जिले के 230 उच्च माध्यमिक स्तरीय विद्यालयों को आदर्श का दर्जा भले दे दिया हो, लेकिन इनमें सुविधाओं की दरकार है। विभाग की ओर से कराए गए सर्वे में सामने आया कि इनमें से महज 53 विद्यालयों में ही निर्धारित सुविधाएं है। जबकि 15 विद्यालय आदर्श की सुविधाओं के नजदीक व अन्यों में अभाव है। दरअसल में जिले के 230 गांवों में संचालित बड़े विद्यालयों को विभाग की ओर से गत दिनों आदर्श का दर्जा दिया गया है।
इसके तहत इन विद्यालयों के विद्यार्थियों को भी निजी विद्यालयों के समान सुविधाएं देने का दावा किया गया। इनमें फर्नीचर समेत कई सुविधाएं विद्यार्थियों को दी जानी थी। स्काउट-गाइड, एनएसएस, एनसीसी, ईको, विज्ञान समेत कंज्यूमर क्लब गठित किए जाने थे। इसके अलावा सुसज्जित लैब भी बनानी थी। विभाग की ओर से जिले में चिह्नित आदर्श विद्यालयों में शुरू में रिक्त पदों को भरा गया है। विभागीय अधिकारियों का मानना है कि पद भरे होने से विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सकेगी। इसके बाद अन्य संसाधन भी जुटाए गए हैं।
ये था उद्देश्य
रमसा के अतिरिक्त परियोजना समन्वयक ओमप्रकाश जाट ने बताया कि सर्वे का उद्देश्य आदर्श विद्यालयों में सुविधाएं जांचना है। सरकार की मंशा है कि प्रत्येक आदर्श विद्यालय में बिजली, पानी, शौचालय, इन्टरनेट, आईसीटी कम्प्यूटर लैब समेत सभी आधारभूत सुविधाएं हों। उन्होंने बताया कि जिन विद्यालयों में जो सुविधाएं कम हैं, उनके लिए बजट का आवंटन कराकर उन्हें भी ‘ए’ श्रेणी विद्यालयों में शामिल किए जाने के प्रयास किए जाएंगे। जिससे कि विद्यालयों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ निजी विद्यालयों के समान सुविधाएं मिल सके।
विभाग कराएगा बजट का आवंटन
सवा दो सौ में से मात्र 53 में हैं सुविधाएं
230 गांवों में दिया दर्जा
रमसा की ओर से हुआ था
जिले में संचालित आदर्श विद्यालयों में मिल रही सुविधाओं का रमसा की ओर से गत दिनों सर्वे कराया गया है। इसके तहत आदर्श विद्यालयों को ‘ए’, ‘बी’, ‘सी’ व ‘डी’ श्रेणी में बांटा गया है। ‘ए’ ग्रुप में 53 विद्यालय सामने आए। इनमें पूरी सुविधाएं विकसित हैं। इसके अलावा ‘बी’ में उन विद्यालयों को शामिल किया गया है, जिन्हें प्रयास किए जाएं तो ‘ए’ श्रेणी में शामिल किया जा सकता है। यानि की इनमें इन्टरनेट, मैदान आदि का अभाव है। जिले में ऐसे 15 विद्यालय हैं। इसके अलावा ‘सी’ ग्रेड में 83 विद्यालयों को शामिल किया गया। इनमें कक्षा-कक्ष समेत अन्य सुविधाओं का अभाव है। इसी प्रकार ‘डी’ श्रेणी में 79 विद्यालय शामिल किए गए, जिनमें कमरों के अलावा कई सुविधाओं की दरकार है।