Tonk Mandi : टोंक के निवाई की थोक फल-सब्जी मंडी में अलग तस्वीर नजर आ रही है। मंडी में तरबूज और खरबूजे की बंपर आवक के बावजूद किसानों के चेहरों पर मायूसी छाई हुई है। जानें क्यों?
Tonk Mandi : भीषण गर्मी के बीच जहां तरबूज और खरबूजे की मांग चरम पर होनी चाहिए, वहीं टोंक के निवाई की थोक फल-सब्जी मंडी में इन दिनों अलग ही तस्वीर नजर आ रही है। मंडी में तरबूज और खरबूजे की बंपर आवक के बावजूद किसानों के चेहरों पर मायूसी छाई हुई है। जिसकी वजह फलों में कम मिठास और गिरते दाम है। किसानों ने उम्मीद के साथ दिन-रात मेहनत कर फसल तैयार की थी, लेकिन मौसम के लगातार बदलते मिजाज ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया। बेमौसम बारिश और तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण फलों की गुणवत्ता प्रभावित हो गई। नतीजतन बाजार में मिठास और रंगत की कमी साफ नजर आ रही है, जिससे खरीदारों का रुझान घट गया है।
व्यापारियों का कहना है कि बेहतर गुणवत्ता होने पर बाहरी बाजारों में भी अच्छी मांग बनती है, लेकिन इस बार गुणवत्ता प्रभावित होने से बाहरी खरीदार भी सीमित रहे हैं। इससे स्थानीय बाजार पर दबाव बढ़ गया है और कीमतों में गिरावट आई है। शहर के प्रमुख चौराहों और सड़कों पर इन दिनों तरबूज और खरबूजे के ठेले बड़ी संख्या में नजर आ रहे हैं।
विक्रेता ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए कम कीमत और छूट का सहारा ले रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद अपेक्षित बिक्री नहीं हो पा रही है। बंपर आवक के बीच फीकी मिठास ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है और उन्हें आर्थिक संकट की ओर धकेल दिया है।
निवाई और पीपलू उपखंड क्षेत्र के गांवों में किसानों ने छोटी-छोटी बाड़ियों में इन फसलों की बुवाई की थी। उत्पादन तो संतोषजनक रहा, लेकिन फलों में अपेक्षित मिठास और अंदरूनी रंग नहीं आने से बाजार में मांग कमजोर पड़ गई। पहले जहां ग्राहक एक साथ 5 से 10 किलो तक तरबूज और खरबूजे खरीदते थे, अब वे 2 से 4 किलो तक ही सीमित हो गए हैं।
इस स्थिति का असर मंडी की रौनक पर भी साफ दिख रहा है। जहां एक ओर फलों के ढेर लगे हैं, वहीं दूसरी ओर बिक्री की रफ्तार धीमी है। कई बार फल लंबे समय तक पड़े रहने से खराब होने का खतरा भी बढ़ जाता है, जिससे किसानों और व्यापारियों दोनों को नुकसान उठाना पड़ता है।
मंडी में प्रतिदिन करीब 100-100 टन तरबूज और खरबूजा पहुंच रहा है। थोक व्यापारी खुली बोली के जरिए बिक्री करवा रहे हैं, लेकिन गुणवत्ता कमजोर होने से किसानों को लागत के अनुरूप कीमत भी नहीं मिल पा रही।
वर्तमान में खुली बोली में तरबूज 10 से 12 रुपए तथा खरबूजा 10 से 25 रुपए किलो के हिसाब से बिक रहे है। कई किसानों का कहना है कि इस बार तो फसल बेचने के बाद भी लागत निकालना मुश्किल हो गया है।