टोंक. शहर की सडक़ों की मरम्मत में भी प्रशासन भेदभाव बरत रहा है।
टोंक. शहर की सडक़ों की मरम्मत में भी प्रशासन भेदभाव बरत रहा है। शहर के सिविल लाइन क्षेत्र में रहने वाले अधिकारियों के आवागमन को देखते हुए चकाचक सडक़ों का निर्माण कराया जा रहा है, लेकिन अन्य सडक़ों का पेचवर्क भी ठीक ढंग से नहीं कराया जा रहा है। इसके चलते लोगों को अन्य मार्गों से गुजरने में परेशानी हो रही है।
दरअसल सिविल लाइन की ये सडक़ें सीवरेज लाइन तथा पानी की पाइप लाइन डलने के बाद बनाईजा रही है। जबकि शहर के अधिकांश इलाकों में भी ये पाइप लाइन डाली गईथी, लेकिन दो साल बाद भी सुध नहीं ली गई। कईजगह पेचवर्ककर दिए गए, जबकि कई जगह मिट्टी डालकर ही इतिश्री कर दी गई। जबकि शहर के जनप्रतिनिधि खराब सडक़ों को लेकर अधिकारियों की बैठक लेकर बड़े दावे करते रहते हैं, लेकिन शहर की सडक़ों में हो रहे भेदभाव तथा लोगों की परेशानी पर कार्रवाई नहीं की जा रही है।
नई सडक़ का ही निर्माण
सिविल लाइन क्षेत्र में इन दिनों नईसडक़ का निर्माण कराया जा रहा है। जबकि घंटाघर से लेकर छावनी तक पेचवर्कका कार्यकिया जा रहा है। जबकि पाइप लाइन यहां भी डाली गई थी, लेकिन पेचवर्कमें भी खानापूर्तिकी जा रही है। वहीं चौंकाने वाली बात ये भी हैकि सबसे पहले जहां कार्यकी शुरुआत हुई, वो सडक़ आरयूआईडीपी तथा अन्य विभाग को दिख ही नहीं रही है। ये सडक़ हैबस स्टैण्ड से छावनी वाली। यहां पाइप लाइन डालने का कार्यढाईसाल पहले हुआ था। इसके पेचवर्कमें बरती गई, लापरवाही आज गड्ढों का रूप ले चुकी है।
यहां तो सुध तक नहीं ली
एक समय में शहर का हाइवे रहने वाली मोतीबाग-धन्नातलाईसडक़ इन दिनों गांवों की कच्ची राहों से भी बदतर है। यहां साल भर पहले सीवरेज लाइन डाल तो दी गई, लेकिन मरम्मत अब तक नहीं की गई। ऐसे में गड्ढों में तब्दील ये सडक़ वाहन चालकों को जख्म दे रही है।इसके अलावा शहर के अन्य इलाकों के भी ऐसे ही हालात है।
कैसे स्वागत होगा टोंक में
शहर में प्रवेश करने वाली मुख्य सडक़ें इन दिनों बदतर है। इसमें कोटा से डिपो होते हुए टोंक आनी वाली सडक़ का तो नामोनिशान तक मिट गया है। यहां सडक़ के नाम पर महज कंकरीट ही है। चालक चाहकर भी निर्धारित गति से वाहन नहीं चला सकता। इस मार्ग पर रहने वाले लोगों को मिट्टी से परेशानी हो रही है। इसी प्रकार जयपुर बायपाय तथा बमोर पुलिया से बस स्टैण्ड तक आने वाली सडक़ पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई है।