
अपने दोनों बेटों के साथ मां लाली देवी। फोटो: पत्रिका
World Mother's Day: टोंक/देवली। विश्व मदर्स डे पर देवली गांव की लाली देवी गुर्जर की संघर्ष गाथा हर मां के त्याग, समर्पण और हौसले की मिसाल बनकर सामने आई है। 23 साल पहले एक सड़क दुर्घटना में पति को खोने के बाद उन्होंने अकेले दम पर दो छोटे बच्चों को पाला, पढ़ाया और बड़े बेटे को शिक्षक बनाकर अपना सपना साकार किया।
20 जुलाई 2004 को अहमदाबाद गुजरात में एक भीषण सड़क दुर्घटना में लाली देवी के पति वाहन चालक ब्रजराज की मृत्यु हो गई। उस समय लाली देवी के बड़े बेटे देवराज की उम्र 4 साल और छोटे बेटे सुनील की मात्र एक साल थी।
महज 23 साल की उम्र में विधवा हुईं लाली देवी पर जिम्मेदारियों का पहाड़ टूट पड़ा। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। बच्चों को पिता की कमी महसूस न होने देने का संकल्प लेकर खुद खेतों में मजदूरी की और स्कूल में मिड-डे मील में काम कर घर का खर्च चलाया।
लाली देवी ने दोनों बच्चों को पढ़ाकर काबिल बनाने की ठानी। उनकी मेहनत और जज्बे ने बेटे देवराज को भी प्रेरित किया। कड़ी मेहनत के बाद देवराज ने बीएसटीसी और बीएड किया और सितंबर 2023 में शिक्षक भर्ती परीक्षा पास कर बूंदी जिले की हिंडोली पंचायत समिति में तृतीय श्रेणी अध्यापक के पद पर नियुक्ति पाई। आज देवराज अपनी मां के सपने को साकार कर रहा है। छोटा बेटा सुनील भी पढ़ाई के साथ विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा है।
लाली देवी कहती हैं बच्चों को पालना और पढ़ाना आसान नहीं था, लेकिन मैंने ठान लिया था कि उन्हें काबिल बनाऊंगी। आज जब बेटा शिक्षक बना तो लगा कि मेरा संघर्ष सफल हुआ। लाली देवी ने बचपन से ही अपने दोनों बच्चों को मां के साथ-साथ पिता का भी प्यार दिया।
उसने कभी भी बच्चों को अपने पिता की कमी महसूस नहीं होने दी। मदर्स डे पर लाली देवी की कहानी उन सभी माताओं के लिए प्रेरणा है जो विपरीत परिस्थितियों में भी अपने बच्चों के भविष्य के लिए संघर्ष करती हैं।
Updated on:
10 May 2026 03:23 pm
Published on:
10 May 2026 10:11 am
बड़ी खबरें
View Allटोंक
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
