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बीसलपुर बांध पर जाने वाला दो किलोमीटर का वीआईपी मार्ग पांच माह बाद भी नहीं बन पाया

बांध बनने के दौरान बनाए गए मार्ग पर बीस साल बाद पहली बार दोबारा नया निर्माण कार्य करवाया जा रहा है।  

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Roadway

पांच माह निर्माण कार्य चलने के बाद भी महज दो किमी दूरी का सडक़ मार्ग पूरा नहीं हो पाया।

राजमहल. बीसलपुर बांध परियोजना के गेट संख्या दो से तीन तक दुर्दशा का शिकार हो रहे वीआईपी मार्ग पर निर्माण कार्य की कछुआ चाल के कारण पांच माह निर्माण कार्य चलने के बाद भी महज दो किमी दूरी का सडक़ मार्ग पूरा नहीं हो पाया। यहां से गुजरते वीआईपी सहित परियोजना के अभियंताओं व कर्मचारियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

पांच माह पूर्व बांध परियोजना की ओर से दो करोड़ 40 लाख की लागत से गेट संख्या दो से तीन तक दो किमी दूरी तक सडक़ का निर्माण, जलभराव किनारे सुरक्षा दिवार, पानी के करीब उगे बबूल हटाने, पुलिस चौकी भवन का निर्माण, सडक़ किनारे एलईडी लाइटें आदि कार्य होने थे। इसमें कई कार्य तो ठेकेदार की ओर से पूर्ण कर दिए, लेकिन निर्माण का कार्य अभी तक पूरा नहीं कराया गया।


बांध बनने के दौरान बनाए गए मार्ग पर बीस साल बाद पहली बार दोबारा नया निर्माण कार्य करवाया जा रहा है। वो भी लापरवाही के कारण पांच माह गुजर जाने पर भी पत्थर-गिट्टी बिछाकर छोड़ दिया गया है। बीसलपुर बांध के किनारे पहाड़ी क्षेत्र की तरफ बीसलपुर टोंक उनियारा पेयजल परियोजना की ओर से दीवार का निर्माण कराया था, लेकिन उसे एक वर्ष भी नहीं हुआ और दीवार दरकने लगी है। ऐसे में बारिश के दौरान दीवार ढहने के साथ ही सडक़ को नुकसान होगा।

निर्देश दिए हैं
ठेकेदार को जल्द सडक़ निर्माण कराने के निर्देश दिए हैं। पहाड़ी क्षेत्र की दीवार सडक़ निर्माण के दौरान क्षतिग्रस्त हुई है। इसे ठीक कराएंगे।
मनीष बंसल, सहायक अभियंता बीसलपुर बांध परियोजना देवली

थड़ोली में लगेंगे नारियल के पौधे

बंथली. जिले के उद्यानिकी नवाचार तकनीकी केन्द्र थड़ोली में नारियल पौधों का रोपण किया जाएगा। ये पौधे भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के केन्द्रीय रोपण फसल अनुसंधान संस्थान कासरगोड़, केरला से मंगाए हैं। उत्कृष्टता केन्द्र देवड़ावास उपनिदेशक प्रतापसिंह कुशवाह ने बताया कि नारियल पौधों की तीन लम्बी, बोनी एवं शंकर प्रजाति के कुल 400 पौधों की पहली खेप अमरूद उत्कृष्टता केन्द्र देवड़ावास पहुंच चुकी है।

वैज्ञानिकों की देखरेख में ग्रीन हाउस में रख नियमित सिंचाई, नमी देकर बराबर तापक्रम का ध्यान रखा जा रहा है। नारियल फसल दक्षिण भारत में बोई जाने वाली प्रमुख फसल है। नारियल फसल को जिले में लगाने का राजस्थान में पहला नवाचार होगा। नारियल के पौधों का रोपण बीसलपुर डेम के जल भराव क्षेत्र के समीप किया जाएगा।


टीम गठित कर लाए पौधे
नारियल पौधों को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के केन्द्रीय रोपण फसल अनुसंधान संस्थान कासरगोड़ केरला से लाने को लेकर देवड़ावास उपनिदेशक प्रतापसिंह कुशवाह के निर्देशन में चार सदस्यों की टीम गठीत की थी। इसमें उपनिदेशक कृषि योगेशकुमार शर्मा, कृषि अनुसंधन अधिकारी गोविन्द श्रीवास्तव व सहायक कृषि अधिकारी संजय आरोड़ा थे।