Bisalpur dam water withdrawals continue: पिछले पखवाड़े से बीसलपुर बांध में निरंतर क्षमता से अधिक पानी आने से गेट खुलने के बाद बनास नदी में पानी की आवक बढ़ी है। इस कारण दर्जनों गांवों की जिला मुख्यालय से दूरी बढ़ गई है।
टोडारायसिंह. बनास नदी उफान पर है, वहीं टोडारायसिंह क्षेत्र के करीब डेढ़ दर्जन गांवों की अब जिला मुख्यालय से तीन गुना दूरी बढ़ जाने से क्षेत्रवासियों को चक्कर काटना पड़ रहा है। बीसलपुर बांध के पूर्ण भराव बाद परियोजना के तहत गेट खोलकर डाउन स्ट्रीम में पानी छोड़ा जा रहा है।
पिछले पखवाड़े से बांध में निरंतर क्षमता से अधिक पानी आने से गेट खुलने के बाद बनास नदी में पानी की आवक बढ़ी है। स्थिति यह है कि देवली मुख्यालय को जोडऩे वाले राजमहल-बोटूंदा मार्ग के अलावा टोडारायसिंह क्षेत्र को छाण-खरेड़ा मार्ग को छोडकऱ जिला मुख्यालय को जोडऩे वाले सभी मार्ग अवरुद्ध हो गए है।
स्थिति यह है कि चार गेट से पानी छोडऩे के बाद बनास में पानी पूरी गति से बह रहा है। चूली-पालड़ा व नानेर-गहलोद रपटे व बरवास-मेहंदवास मार्ग पर खतरे के निशान 2 से ढाई मीटर से अधिक पानी का बहाव है, जिसके चलते प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी करते हुए मार्ग पर आवाजाही बंद कर रखी है।
इधर इंदोकिया, हमीरपुर, नानेर, बावड़ी, रीण्डल्यारामपुरा, मोर, गोपालपुरा, बरवास, छाणबास सूर्या समेत अन्य पंचायतों के दर्जनों गांवों की जिला मुख्यालय से दूरी बढ़ गई है। नदी किनारे उक्त गांवों की दूरी 20-30 किमी. थी। अब उन्हें झिराना-सोहेला या छाण खरेड़ा मार्ग से 50 से 60 किमी. का चक्कर काटकर जाना पड़ रहा है।
आवागमन के साधनों के अभाव में यह दूरी तय करना मुश्किल हो गया है। इधर कांग्रेस अभाव अभियोग जिला प्रवक्ता महावीर गुर्जर ने बताया की टोंक के राजस्व व रोजमर्रा कार्यो के अलावा निजी व सरकारी कॉलेज में पढऩे वाले विद्यार्थी व कार्मिकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट से टोंक विधानसभा क्षेत्र की 11 पंचायतों को टोंक जिला मुख्यालय से जौडऩे के लिए पालडा-बनास रपटे पर पुलिया निर्माण कराने की मांग की है।