मरीजों को हो रही पीड़ा को सुनने व देखने वाला कोई नहीं है। शासन व प्रशासन चुप है।
टोंक. सेवारत चिकित्सक संघ से जुड़े चिकित्सकों की हड़ताल के चलते सरकारी अस्पतालों में सन्नाटा पसरा है। चिकित्सक आवासों पर ताले लटके हैं। वहीं निजी अस्पतालों में लोगों की भीड़़़ है। दूसरी ओर चिकित्सकों की हड़ताल के समर्थन में जिले के निजी चिकित्सकों ने भी सुबह दो घंटे कार्य का बहिष्कार किया।
इससे मरीजों को उपचार के लिए परेशान होना पड़ा। चिकित्सकों की हड़ताल को आठ दिन बीत चुके हैं। चिकित्सक व सरकार अड़े हैं। मरीजों को हो रही पीड़ा को सुनने व देखने वाला कोई नहीं है। शासन व प्रशासन चुप है। सरकारी अस्पतालों से मरीजों का मोह भंग हो रहा है।
हालत यह है कि दो सौ पलंग वाले सआदत अस्पताल में महज दो मरीज भर्ती है। वैकल्पिक व्यवस्था के तहत लगाए गए आयुष व आयुर्वेदिक चिकित्सक दवा तो लिख रहे है, लेकिन मरीजों को उपलब्ध नहीं हो रही। इन दिनों में कई मरीज अस्पताल से छुट्टी कराकर अन्यत्र उपचार कराने पर मजबूर हुए।
गम्भीर रोगियों को समय पर उपचार नहीं मिला। ऐसे में हड़ताल ने मरीजों को ऐसे कई घाव दे दिए जिन्हें वे उम्र नहीं भूल पाएंगे। इण्डियन मेडिकल एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष विजेन्द्र त्रिपाठी व जिला सचिव डॉ. राजेश मालपानी ने बताया कि सरकार को चिकित्सकों की मंागों का जल्द निराकरण करना चाहिए।
उन्होंने बताया कि मांगे माने जाने तक प्रतिदिन सुबह से 8 से 10 बजे तक चिकित्सा कार्य का बहिष्कार किया जाएगा। इसके बावजूद मांगे नहीं मानी गई तो 25 दिसम्बर को दिनभर निजी अस्पताल बंद रखे जाएंगे। इधर, सआदत समेत जनाना अस्पताल में मरीजों की संख्या कम रही।
इससे नर्सेज भी ठाले बैठे रहे। दूसरी ओर निजी अस्पतालों में दिनभर मरीजों का तांता लगा रहा। सुरेली गांव से आए रामफूल का कहना था कि निजी में उपचार महंगा पर सेहत की फ्रिक भी तो जरूरी है।
नीम-हकीमों की हो रही चांदी
चिकित्सकों की हड़ताल का फायदा दूरदराज के गांवों में नीम-हकीम भरपूर उठा रहे हैं। इसके बावजूद चिकित्सा विभाग सुस्त है। मरीज भी मजबूरन उनसे उपचार करा रहे हैं। गांव-गली में बिना डिग्री उपचार करने में जुटे चिकित्सक मोटी रकम ऐंठने की एवज में मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।
पलाई. आयुर्वेदिक औषधालय भी हड़ताल के चलते सुनसान पड़ा है। आयुर्वेद चिकित्सक अवधेश गौतम की ड्यूटी अलीगढ़ मुख्यालय पर होने व कम्पाउण्डर की पोस्ट खाली होने से मरीजों को इलाज के अभाव में परेशान होना पड़ रहा है। औषधालय मात्र चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के हवाले है।