
Actor Raghu Ram: रियलिटी शो ‘रोडीज’ से अपनी दबंग और बेबाक छवि के लिए मशहूर रघु राम एक बार फिर सुर्खियों में हैं। अपनी निजी जिंदगी को लेकर हमेशा खुलेपन से बात करने वाले रघु ने अब महिलाओं पर एक बड़ा और चौंकाने वाला बयान दिया है। इससे पहले वह यह खुलासा कर चुके हैं कि उन्होंने बहुत कम (21) उम्र में अपनी वर्जिनिटी खो दी थी, अब उनका नया बयान सोशल मीडिया पर जमकर चर्चा में है।
‘रोडीज’ के पूर्व जज और एक्टर रघु राम ने महिलाओं को लेकर टिप्पणी की है। हाल ही में एक पॉडकास्ट पर बातचीत के दौरान रघु ने कहा कि कई मर्दों की मेंटल और फिजिकल प्रॉब्लम्स की जड़ औरतें होती हैं। 60 साल की उम्र के बाद कई मर्द हार्ट अटैक या डिप्रेशन की वजह से मर जाते हैं, इसके पीछे महिलाओं के साथ उनके रिश्तों की अहम भूमिका होती है।
रघु यहीं नहीं रुके। उन्होंने बताया कि ‘रोडीज’ के दौरान उन्होंने ऐसी कई महिलाओं को देखा जो मर्दों से भी ज्यादा एग्रेसिव थीं। कुछ लड़कियों को देखकर तो हमारे कान लाल हो गए थे, धुआं निकल गया था। वो इतनी तेज और गुस्से में थीं कि हमें नोट्स लेने पड़े। लड़कियां जब लड़ती हैं, तो उनका कोई लिमिट नहीं होता। उनकी बातों से हम डर जाते थे।”
रघु ने आगे कहा कि औरतें कहती तो हैं कि उन्हें इमोशनली ओपन मर्द पसंद हैं, लेकिन जब कोई मर्द अपने जज्बात दिखाता है, तो वही महिलाएं उसे लड़की जैसा कहकर रिजेक्ट कर देती हैं। फिर वही मर्द अपनी भावनाएं दबाकर रखते हैं और 60 साल की उम्र में हार्ट अटैक से मर जाते हैं। रघु के इन बयानों ने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी है।
रघु राम ने अपने बयान में यह साफ किया कि उन्हें इस बात से कोई दिक्कत नहीं है कि मर्द कमाते हैं, लेकिन उन्हें इस सोच पर एतराज है कि क्या किसी औरत की नजर में मर्द की इज्जत सिर्फ उसकी कमाई से तय होती है?
उन्होंने 'रघु वॉक्स' को दिए इंटरव्यू में आगे कहा, “मैं यह नहीं कह रहा कि मर्दों या औरतों में कोई कमी है, लेकिन हमारे समाज में ये सोच बहुत गहराई से बैठ चुकी है कि मर्द को हर हाल में पैसे कमाने ही पड़ते हैं। भारत में 75 परसेंट आत्महत्याएं मर्द करते हैं, उनमें से आधे पैसे की कमी या आर्थिक दबाव की वजह से होते हैं। समाज ने मर्दों की पहचान ही ‘कमाने वाले इंसान’ के रूप में तय कर दी है। आप किसी मर्द की इज्जत इसलिए नहीं करते कि वो अच्छा पति है या इंसान है, बल्कि इसलिए करते हैं कि वो कितना कमाता है। यही सबसे बड़ी समस्या है। और दुख की बात ये है कि लड़कियों के लिए यह सोच अब बहुत आम हो गई है।