
चंदनसिंह देवड़ा/ उदयपुर . संभाग के सबसे बड़े महाराणा भूपाल चिकित्सालय में मरीज को लेकर लोग इसलिए पहुंचते हैं कि इसमें हर तरह की चिकित्सा सुविधा मिल जाएगी लेकिन गुरुवार को इमरजेंसी से लेकर बर्न वार्ड की तस्वीर कुछ अलग ही नजर आई। शिशवी गांव में गर्म खीर के भगौने में गिरने से 4 साल का मासूम झुलस गया। उसे लेकर जब परिजन अस्पताल पहुंचे तो उन्हें न तो इमरजेंसी में ठीक से रिस्पोंस मिला और न ही बर्न वार्ड में इलाज। जलन से कहराते मासूम के परिजनों को बर्न वार्ड में मौजूद चिकित्सक और स्टाफ ने यह कह कर टरका दिया कि यहां पर इलाज संभव नहीं है। दो घंटे तक परिजनों ने पांच अस्पतालों की दौड़ लगाई, तब जाकर निजी हॉस्पिटल में उसका उपचार शुरू हुआ।
शिशवी ग्राम पंचायत के पूर्व सरपंच दलपतसिंह ने बताया कि केमरी गांव में हीरालाल गुर्जर के घर पर गुरुवार को कन्या पूजन कार्यक्रम था जिसके लिए पकवान बनाए जा रहे थे। इसी दौरान उसका 4 वर्षीय पुत्र आयुष खेलते हुए गर्म खीर के भगौने में गिर गया जिससे वह बुरी तरह से झुलस गया। रोते-बिलखते परिजन उसे लेकर पहले मोड़ी पीएचसी गए, जहां उसको इलाज नहीं मिला। इस पर वे गाड़ी में लेकर ट्रांसपोर्ट नगर स्थित एक निजी अस्पताल में पहुंचे लेकिन वहां पर भी बच्चे की हालत देखकर उन्हें एमबी अस्पताल में ले जाने को कहा गया। परिजन एमबी अस्पताल के इमरजेंसी में पहुंचे लेकिन मासूम को देखे बिना ही वहां मौजूद डॉक्टरों ने उसे बर्न वार्ड में भर्ती करवाने के लिए कह दिया। बर्न वार्ड में चिकित्सक और स्टाफ ने बच्चे को इलाज करने के बजाय टरकाते हुए संसाधन नहीं होने की बात कहकर हाथ खड़े कर दिए। परिजनों ने निराश होकर मासूम को निजी हॉस्पिटल में भर्ती करवाया।
...तो बंद कर दो ऐसे हॉस्पिटल
मासूम के चाचा हिम्मत गुर्जर ने पूरी बात बयां करते हुए बताया कि एमबी अस्पताल के इमरजेंसी और बर्न वार्ड में बच्चे को देखे बिना ही हमें टरका दिया गया। ऐसे में हमने निजी अस्पताल में उसे भर्ती करवाया है। गरीब को सरकारी अस्पताल में इलाज नहीं मिल सकता है तो बंद कर देने चाहिए ऐसे हॉस्पिटल को।