
उदयपुर . पन्द्रह बार के राष्ट्रीय चैम्पियन पी. सुरेश ने बताया कि एक समय था कि उसने पत्थर तोडकऱ जीवन की शुरुआत की थी। मजदूरी की और जीवन के शुरुआती दिनों में खूब संघर्ष किया, लेकिन बाद में जब उनकी मेहनत और किस्मत ने पलटा खाया और वेट लिफ्टिंग में नेशनल लेवल पर उन्होंने खिताबों के ढेर लगा दिए।
पत्रिका से विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि मूलत: केरल निवासी होकर मुम्बई रेलवे में नौकरी करते हैं। सुरेश ने देश के अलावा विदेशी धरती पर भी सोना जीता है। उन्होंने डेनमार्क और दक्षिण अफ्रीका में भी अपना लोहा मनवाया है। वर्ष 2004 में एशियन मुकाबले में सोना जीत चुके हैं। सुरेश ने बताया कि वर्ष 2003 से 59 किलोग्राम भार वर्ग के खिलाड़ी सुरेश ने कॉलेज से अपनी शुरुआत की थी। सुरेश सुबह और शाम नियमित रूप से प्रेक्टिस करते हैं। अन्तरराष्ट्रीय सीनियर वल्र्ड में रजत पदक विजेता रहे हैं। उदयपुर वेट लिफ्टिंग प्रतियोगिता में आए सुरेश को खुद पर खूब भरोसा है।
माता-पिता ने हर बार दिया साथ
मूलत: उत्तर प्रदेश की अंजलि 52 किलोग्राम भार वर्ग में खुद को देश-विदेश में साबित कर चुकी हैं। उनका कहना है कि उन्हें वेट लिफ्टिंग की चार विधाओं में महारत हासिल है। पांच बार नेशनल खेल चुकी अंजलि ने दो बार विजेता का खिताब हासिल किया है। किसान परिवार से निकली यह बेटी भार उठाने के मामले में खुद को बेहतर मानती है। अंजलि ने वर्ष 2008 में खेल जगत में प्रवेश किया। इसके बाद अंजलि ने विवि स्तर पर वेट लिफ्टिंग में अपना नाम किया था। बकौल अंजलि माता-पिता खूब सहयोग करते हैं। उनके मार्गदर्शन और मदद से ही वह यहां त क प हुं ची है।