उदयपुर

विश्व कैंसर दिवस से पहले मरीजों को मिली बड़ी सौगात, गांवों के लोगों को भी मिलेगा सीधा फायदा

Digital Health App For Cancer Patient: विश्व कैंसर दिवस से पहले उदयपुर में एक खास डिजिटल हेल्थ ऐप लॉन्च होने जा रहा है, जो स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक नई क्रांति ला सकता है। यह ऐप क्यूआर कोड के माध्यम से आमजन के लिए उपलब्ध होगा और लोगों को बीमारी की पहचान और रोकथाम में मदद करेगा।

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Feb 03, 2026
File Photo: Patrika

विश्व कैंसर दिवस 2026 से पहले उदयपुर के नागरिकों को स्वास्थ्य के क्षेत्र में डिजिटल सौगात मिलने जा रही है। मंगलवार को एक विशेष डिजिटल हेल्थ ऐप क्यूआर कोड के माध्यम से आमजन के लिए लॉन्च किया जाएगा। यह ऐप सामान्य मोबाइल एप्लिकेशन नहीं, बल्कि एक अत्याधुनिक क्लिनिकल डिसीजन सपोर्ट सिस्टम (सीडीएसएस) है, जिसका मुख्य उद्देश्य इलाज से पहले बीमारी की पहचान और रोकथाम को बढ़ावा देना है।

यह डिजिटल हेल्थ ऐप उदयपुर और आसपास के क्षेत्रों की जीवनशैली, स्थानीय पर्यावरण, प्रमुख व्यवसायों जैसे मार्बल उद्योग और खनन कार्य, तथा यहां पाई जाने वाली प्रमुख बीमारियों को ध्यान में रखते हुए विकसित किया है। इस ऐप का विकास वरिष्ठ ऑन्कोलॉजिस्ट और आरएनटी मेडिकल कॉलेज के रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग विभागाध्यक्ष डॉ. नरेंद्र राठौड़ ने किया है।

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इलाज नहीं, बचाव पर केंद्रित पहल

अक्सर देखा गया है कि लोग तब डॉक्टर के पास पहुंचते हैं, जब बीमारी गंभीर रूप ले चुकी होती है। यह ऐप इसी सोच को बदलने का प्रयास है। इसमें शामिल सीबीएसी (कम्युनिटी बेस्ड असेसमेंट चेकलिस्ट) से यह आकलन किया जाता है कि कोई व्यक्ति वर्तमान में स्वस्थ दिखने के बावजूद भविष्य में डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग या कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के जोखिम में तो नहीं है। कुछ आसान सवालों के उत्तर देने पर ऐप तुरंत जोखिम स्तर बताता है। आगे की जरूरी जांच, जीवनशैली में बदलाव तथा सावधानियों की स्पष्ट सलाह देता है।

मार्बल और माइन श्रमिकों के लिए विशेष असेसमेंट

उदयपुर क्षेत्र में बड़ी संख्या में श्रमिक मार्बल फैक्ट्रियों और खदानों में कार्यरत हैं। इन स्थानों पर उड़ने वाली सिलिका युक्त धूल से श्रमिकों में फेफड़ों की गंभीर बीमारी सिलिकोसिस का खतरा बना रहता है। इस ऐप में ऐसे श्रमिकों के लिए विशेष लंग असेसमेंट सिस्टम शामिल किया है, जिससे फेफड़ों की बीमारी को शुरुआती अवस्था में ही पहचाना जा सके और समय रहते उपचार संभव हो सके।

ग्रामीण महिलाओं के स्वास्थ्य पर विशेष फोकस

ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी बड़ी संख्या में महिलाएं लकड़ी, उपले या कोयले के चूल्हे पर खाना बनाती हैं। लंबे समय तक चूल्हे के धुएं के संपर्क में रहने से फेफड़ों को गंभीर नुकसान होता है। यह ऐप ऐसी महिलाओं को फेफड़ों की जांच, जोखिम स्तर और आवश्यक सावधानियों के बारे में सरल और सटीक जानकारी प्रदान करता है।

कैंसर की शुरुआती पहचान में प्रभावी

यह ऐप कैंसर की प्रारंभिक पहचान पर विशेष जोर देता है, जिससे इलाज अधिक आसान और सफल हो सके। मुंह का कैंसर: तंबाकू, गुटखा या सुपारी सेवन करने वालों में मुंह के अंदर सफेद या लाल धब्बे दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क की सलाह।

महिला स्वास्थ्य: महिलाओं में सर्वाइकल और ब्रेस्ट कैंसर के खतरे का आकलन कर सरकारी गाइडलाइंस के अनुसार सही समय पर जांच की सिफारिश।

पूरी तरह सुरक्षित, गोपनीय और ऑफलाइन ऐप

इस ऐप की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उपयोगकर्ता की कोई भी व्यक्तिगत या मेडिकल जानकारी किसी सर्वर पर अपलोड नहीं होती। पूरा डेटा मोबाइल फोन में ही सुरक्षित रहता है। यह ऐप बिना इंटरनेट भी कार्य करता है, जिससे दूरदराज़ गांवों में आशा और एएनएम कार्यकर्ता टैबलेट से लोगों की जांच कर सकेंगी।

डॉक्टरों के लिए प्रोफेशनल मेडिकल रिपोर्ट

ऐप से एक प्रोफेशनल पीडीएफ मेडिकल रिपोर्ट तैयार होती है, जिसे व्हाट्सएप्प के माध्यम से डॉक्टर को दिखाया जा सकता है। रिपोर्ट मेडिकल टर्म्स में होती है, जिससे डॉक्टर मरीज की स्थिति तुरंत समझकर इलाज शुरू कर सकते हैं।

अनुमान नहीं, गाइडलाइंस पर आधारित तकनीक

यह ऐप किसी एआइ चैटबॉट या अनुमान आधारित प्रणाली पर काम नहीं करता, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय चिकित्सकीय गाइडलाइंस पर आधारित नियमों के अनुसार तैयार किया है। इससे हर व्यक्ति को भरोसेमंद, समान और सटीक सलाह मिलती है।

क्यूआर कोड स्कैन करें, स्वास्थ्य जांच शुरू करें

आम लोगों को सिर्फ क्यूआर कोड स्कैन करना है, जरूरी जानकारी भरनी है और तुरंत हेल्थ स्कोर, बीमारी का खतरा और आगे की सलाह प्राप्त हो जाती है। विश्व कैंसर दिवस से पहले यह पहल उदयपुर को डिजिटल हेल्थ और कैंसर रोकथाम के क्षेत्र में राज्य स्तर पर एक नई पहचान दिलाने वाली मानी जा रही है।

विश्व कैंसर दिवस से पहले शुरू हो रही यह डिजिटल हेल्थ पहल स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक दूरदर्शी कदम है। यह ऐप लोगों को बीमारी होने के बाद नहीं, बल्कि बीमारी से पहले सतर्क करने का कार्य करेगा। क्यूआर कोड और ऑफलाइन सुविधा के कारण यह शहरी ही नहीं, ग्रामीण क्षेत्रों तक भी प्रभावी रूप से पहुंचेगा। इस तरह की तकनीक भविष्य में जनस्वास्थ्य को मजबूत आधार प्रदान करेगी।
डॉ. विपिन माथुर, प्रिंसिपल आरएनटी मेडिकल कॉलेज, उदयपुर

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Updated on:
03 Feb 2026 07:58 am
Published on:
03 Feb 2026 07:57 am
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