उदयपुर

मास्टर प्लान ही नहीं, कैसे दें पट्टा? Uda दायरे में आए 70 गांवों में निर्माण पर संकट

UDA News: यूडीए के नियम, पुराने पट्टों पर सवाल, बढ़ते शुल्क और मास्टर प्लान की कमी ने 70 गांवों के लोगों को उलझन में डाल दिया है।

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Apr 29, 2026
Photo- Patrika

UDA News: राजस्थान के उदयपुर शहर के विस्तार के साथ यूडीए के दायरे में शामिल करीब 70 गांवों में इन दिनों निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर बड़ा संकट खड़ा हो गया। वर्षों पहले तहसीलदार, एसडीएम और जिला प्रशासन से स्वीकृतियां लेकर मकान, होटल और रिसोर्ट बना चुके या निर्माण कर रहे लोगों को अब यूडीए की ओर से नोटिस जारी कर काम रुकवाया जा रहा है।

सबसे बड़ी समस्या यह है कि इन क्षेत्रों का अब तक मास्टर प्लान तैयार नहीं हुआ। ऐसे में न तो पुराने नियम पूरी तरह लागू हो पा रहे है और न नए स्पष्ट रूप से लागू हो रहे हैं। इससे आमजन, निवेशक और पर्यटन व्यवसायी परेशान है।

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ये मुख्य परेशानियां आ रही सामने

  1. पुरानी स्वीकृतियां बनाम यूडीए के नए नियम

नए शामिल गांवों में कई लोगों ने पहले ही एसडीएम और जिला प्रशासन से वैध पट्टे और निर्माण स्वीकृतियां लेकर मकान, होटल और रिसोर्ट बना लिए या काम शुरू कर दिया। अब यूडीए इन निर्माणों को अवैध मानते हुए नोटिस जारी कर कार्य रुकवा रहा है। लोगों का कहना है कि उन्होंने नियमों के अनुसार शुल्क जमा कर स्वीकृति ली, लेकिन अब उनसे दोबारा कमर्शियल अनुमति लेने को कहा जा रहा है। वहीं यूडीए का कहना है कि मास्टर प्लान नहीं होने के कारण फिलहाल केवल आवासीय उपयोग की अनुमति दी जा सकती है। इससे पहले से संचालित होटल और रिसोर्ट सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।

  1. पट्टा, कन्वर्जन और बढ़ते शुल्क का विवाद

कई लोगों ने पहले ही कृषि भूमि का कन्वर्जन करवाकर पट्टा ले लिया और नियमानुसार 5 प्रतिशत आवासीय व 10 प्रतिशत कमर्शियल शुल्क भी जमा कराया था। अब निर्माण स्वीकृति के समय यूडीए नया पट्टा लेने और नामांतरण कराने की शर्त रख रहा है। लोगों का कहना है कि पुराने पट्टों को सरेंडर करने की प्रक्रिया स्पष्ट नहीं है। नए पट्टे के लिए करीब 125 रुपए प्रति वर्ग फीट तक विकास शुल्क मांगा जा रहा है। कमर्शियल उपयोग के लिए यह शुल्क 500-600 रुपए प्रति वर्ग फीट तक पहुंच रहा है। ऐसे में लोगों का सवाल है कि जब पहले ही भुगतान किया जा चुका है, तो दोबारा इतना भारी शुल्क क्यों लिया जा रहा है?

  1. पर्यटन नीति बनाम यूडीए की कार्रवाई

कई लोगों ने पर्यटन विभाग से एनओसी लेकर अपनी इकाइयों को पर्यटन प्रोजेक्ट के रूप में विकसित किया है। नीति के अनुसार, ऐसी इकाइयों को कुछ मामलों में अलग से कमर्शियल स्वीकृति की आवश्यकता नहीं होती। इसके बावजूद यूडीए इन पर भी कार्रवाई कर रहा है और पहले अपनी अनुमति लेना अनिवार्य बता रहा है। इससे पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों में असमंजस की स्थिति बन गई। लोगों का कहना है कि एक ओर सरकार पर्यटन को बढ़ावा दे रही है, वहीं दूसरी ओर विभागों के बीच समन्वय की कमी से निवेश प्रभावित हो रहा है।

मास्टर प्लान का अभाव बना सबसे बड़ी बाधा

यूडीए ने अगस्त 2025 में इन गांवों को अपने अधिकार क्षेत्र में शामिल किया, पर अब तक मास्टर प्लान तैयार नहीं हो पाया है। यही कारण है कि नए कमर्शियल पट्टे जारी नहीं हो पा रहे, केवल सीमित आवेदन ही स्वीकार किए जा रहे है। अधिकतम 2500 वर्गमीटर तक की प्रक्रिया ही स्पष्ट है। इस अधूरी स्थिति के चलते लोगों के सामने न पुरानी व्यवस्था लागू, न नई स्पष्ट जैसी स्थिति बन गई।

आमजन और निवेशक दोनों परेशान

यूडीए के नियम, पुराने पट्टों पर सवाल, बढ़ते शुल्क और मास्टर प्लान की कमी ने 70 गांवों के लोगों को उलझन में डाल दिया है। लोगों की मांग है कि पुराने पट्टों और स्वीकृतियों पर स्पष्ट नीति बनाई जाए, मास्टर प्लान जल्द लागू किया जाए, पर्यटन और यूडीए नियमों में तालमेल बैठाया जाए ताकि आमजन को राहत मिले और विकास कार्य बिना बाधा के आगे बढ़ सकें।

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Published on:
29 Apr 2026 01:59 pm
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