
मो. इलियास/उदयपुर . शहर में हाइकोर्ट बैंच की मांग को लेकर 36 वर्ष के संघर्ष व एक माह के क्रमिक अनशन के बावजूद सरकार का सकारात्मक रूख नहीं दिखने पर अब अधिवक्ता करो या मरो की नीति अपनाने का निर्णय किया है। हाइकोर्ट संघर्ष समिति के संयोजक व पूर्व विधानसभा अध्यक्ष शांतिलाल चपलोत ने 16 मई को आमरण अनशन पर बैठने की घोषणा की।
चपलोत ने कहा कि अब आश्वासन नहीं, कार्रवाई चाहिए। जो भी स्थितियां बनेगी, उसके लिए राज्य सरकार जिम्मेदार होगी। अब मरने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। चपलोत के साथ अधिवक्ता व स्वयंसेवी संगठन के प्रतिनिधि 24 घंटे क्रमिक अनशन में शामिल रहेंगे। अनशन के साथ ही जनजागरण के लिए हर जिला मुख्यालय के साथ शहर में रथ घुुमाया जाएगा। इससे पूर्व सोमवार को शहर में रैली निकाली जाएगी। हाइकोर्ट संघर्ष समिति के संयोजक रमेश नंदवाना ने पत्रकार वार्ता में बताया कि इस बार आंदोलन को नया रूप देकर न्यायिक कार्य का बहिष्कार नहीं किया। जनता के पूरे सहयोग लेते हुए क्रमिक अनशन चलाया तो इसका सकारात्मक परिणाम आया। कई संगठन स्वेच्छा से अनशन में शामिल हुए और लगातार अपना समर्थन दे रहे हैं, लेकिन राजनेताओं ने इस मांग को पूरा करने में विशेष रुचि नहीं दिखाई। मेवाड़ के नेताओं मंत्रियों, सांसदों व विधायकों ने इस मुद्दे पर जनता के साथ वादा खिलाफी की है। इस दौरान समिति के महासचिव शांतिलाल पामेचा, भरत वैष्णव, पूर्व अध्यक्ष रोशनलाल जैन, फतहलाल नागौरी, बार अध्यक्ष रामकृपा शर्मा, उपाध्यक्ष डॉ. सत्येन्द्र सांखला, महासचिव चेतनपुरी गोस्वामी, सचिव ओमप्रकाश प्रजापत, वित्त सचिव हरीश शर्मा,पुस्तकालय सचिव हेमंत पालीवाल,अरुण व्यास, कमलेश दवे, हरीश पालीवाल, पूर्व अध्यक्ष महेन्द्र नागदा,मनीष शर्मा आदि ने भी विचार व्यक्त करते हुए आंदोलन उग्र रूप देने की बात कही।
हमारा हक फिर भी नहीं मिल रही
देश में विभिन्न छोटे राज्यों में राजनीतिक इच्छा शक्ति के चलते एक तो कहीं दो हाइकोर्ट बेंच स्थापित की है, लेकिन मेवाड़ में 36 साल के आंदोलन पर सरकार अब तक हरकत में नहीं आई है। आदिवासी बहुल क्षेत्र उदयपुर ? संविधान के विशेष अनुसूची-5 से गर्वन होता है और ऐसे में सरकार को तत्काल प्रभाव से उदयपुर आदिवासी क्षेत्र में राजस्थान उच्च न्यायालय की खंडपीठ की अनुशंसा राज्यपाल के माध्यम से राष्ट्रपति भिजवानी चाहिए। इस मांग को लेकर आगामी दिनों मुख्यमंत्री की प्रस्तावित बांसवाड़ा यात्रा में बांसवाड़ा व डूंगरपुर के अधिवक्ता उन्हें ज्ञापन देंगे।