उदयपुर

एथेनॉल मिक्सिंग से बढ़ी परेशानी, घटा माइलेज; जयपुर में ‘स्पीड-100’ 169 रुपए लीटर, जानें विशेषज्ञों की राय

E20 Petrol Impact: पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल (ई-20) मिश्रण लागू होने के बाद पिछले कुछ महीनों में खासकर पुराने दुपहिया और चार पहिया वाहनों में फ्यूल सिस्टम से जुड़ी शिकायतें बढ़ी हैं।
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Jul 07, 2026
E20 Petrol Impact
फोटो पत्रिका नेटवर्क

उदयपुर/जयपुर। पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल (ई-20) मिश्रण लागू होने के बाद पिछले कुछ महीनों में खासकर पुराने दुपहिया और चार पहिया वाहनों में फ्यूल सिस्टम से जुड़ी शिकायतें बढ़ी हैं। स्थिति यह है कि कई वाहन मालिक सर्विसिंग करवाने के कुछ ही दिनों बाद माइलेज कम होने, इंजन की कार्यक्षमता घटने और स्टार्टिंग की समस्या लेकर दोबारा वर्कशॉप पहुंच रहे हैं। वहीं जयपुर के तीन पेट्रोल पंप पर स्पीड-100 के नाम से 169 रुपए प्रति लीटर की कीमत में भी पेट्रोल बिक रहा है और इस पेट्रोल में समान्य ई-20 पेट्रोल की तरह एथनॉल की मिलावट नहीं है। हालांकि इसकी खपत महंगी कारों व रेसर बाइक्स में ज्यादा है।

ई-20 ईंधन पर क्या बोले विशेषज्ञ

मैकेनिकों का कहना है कि सबसे ज्यादा परेशानी उन वाहनों में आ रही है जो ई-20 ईंधन के अनुरूप डिजाइन नहीं किए गए थे। वहीं नई ई20-कम्पैटिबल वाहनों में ऐसी शिकायतें अपेक्षाकृत कम हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि केवल एथेनॉल मिश्रण ही हर खराबी का कारण नहीं है। खराब गुणवत्ता वाला ईंधन, फ्यूल में नमी या पानी, समय पर सर्विस नहीं होना और पुराने फ्यूल सिस्टम भी वजह हो सकते हैं।

रोज साफ करनी पड़ रही हैं पेट्रोल टंकियां

कई मैकेनिकों का कहना है कि पहले महीने में कभी-कभार किसी वाहन की टंकी खोलनी पड़ती थी, लेकिन अब लगभग प्रतिदिन एक-दो वाहनों की फ्यूल टंकी साफ करनी पड़ रही है। उनका कहना है कि कई बार टंकी में नमी, पानी या गंदगी मिलने से फ्यूल फिल्टर और इंजेक्टर चोक हो जाते हैं। ऐसे मामलों में पूरी टंकी खाली कर उसकी सफाई करनी पड़ती है और फिल्टर भी बदलना पड़ता है। मैकेनिकों के अनुसार, यदि पेट्रोल में पानी चला जाए तो समस्या और गंभीर हो जाती है। ऐसे मामलों में केवल फ्यूल बदलना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि पूरी फ्यूल लाइन, टैंक और कई बार इंजेक्टर तक की सफाई करनी पड़ती है।

जयपुर में 169 रुपए प्रति लीटर भी बिक रहा पेट्रोल

इधर, जयपुर में जहां लाखों कार व मोटर साइकिल चालक 112 रुपए प्रति लीटर की कीमत वाले पेट्रोल को महंगा बता रहे हैं। वहीं शहर के तीन पंप पर स्पीड-100 के नाम से 169 रुपए प्रति लीटर की कीमत में भी पेट्रोल बिक रहा है और इस पेट्रोल में समान्य ई-20 पेट्रोल की तरह एथनॉल की मिलावट नहीं है।

पेट्रोलियम प्रोडक्ट एक्सपर्ट संदीप भगेरिया ने बताया कि महंगी कारों के इंजन ऑक्टेन-100 डिजाइन होते हैं और कंपनियां इन कारों के लिए स्पीड-100 पेट्रोल के उपयोग की सलाह देती हैं। उधर शहर के कुछ पंप पर इस महंगे पेट्रोल की बिक्री को लेकर पड़ताल की तो सामने आया कि कुछ समय पहले इस महंगे पेट्रोल के सीमित ग्राहक थे लेकिन महंगी कारों की संख्या बढ़ने, एथनॉल रहित होने से इसकी बिक्री में भी 10 से 12 फीसदी तक इजाफा देखा जा रहा है। 169 रुपए प्रति लीटर पेट्रोल अजमेर रोड, रामबाग और मानसरोवर क्षेत्र के एक पेट्रोल पंप पर बिक रहा है।

वर्कशॉप में सबसे ज्यादा ये शिकायतें

-माइलेज पहले की तुलना में कम होना
-सुबह इंजन स्टार्ट होने में परेशानी
-फ्यूल इंजेक्टर का चोक होना
-फ्यूल फिल्टर जल्दी जाम होना
-फ्यूल पंप की खराबी
-इंजन मिसफायर और झटके आना।
-एक्सेलरेशन में कमी
-पुरानी गाड़ियों पर ज्यादा असर

वाहन मालिक क्या करें?

-निर्माता की गाइडलाइन के अनुसार ही ईंधन का उपयोग करें
-केवल अधिकृत और विश्वसनीय पेट्रोल पंप से ही पेट्रोल भरवाएं
-यदि इंजन स्टार्ट होने, माइलेज या झटकों की समस्या हो तो तुरंत जांच कराएं
-फ्यूल फिल्टर और इंजेक्टर की समय-समय पर सर्विस करवाएं
-लंबे समय तक वाहन को बिना चलाए खड़ा न रखें।

ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों का कहना है कि 2023-24 से पहले बने कई वाहन पूरी तरह ई-20 के अनुरूप विकसित नहीं किए गए थे। ऐसे वाहनों में रबर पाइप, सील, फ्यूल लाइन और कुछ धातु वाले हिस्सों पर लंबे समय में अधिक प्रभाव पड़ सकता है। जबकि नई गाड़ियों में निर्माता पहले से ई-20 के अनुरूप सामग्री और इंजन तकनीक का उप योग कर रहे हैं।

उदयपुर के व्यापारियों और मैकेनिकों की जुबानी

पिछले दो-तीन महीनों में पुराने वाहनों की शिकायतें निश्चित रूप से बढ़ी हैं। पहले कभी-कभार फ्यूल इंजेक्टर खोलना पड़ता था, लेकिन अब रोज एक-दो गाड़ियों की टंकी और फ्यूल सिस्टम साफ करना पड़ रहा है। कई ग्राहक सर्विस के बाद भी माइलेज कम होने की शिकायत लेकर दोबारा लौट रहे हैं।

बाबूलाल चौहान, वाहन गैराज संचालक, अंबामाता

सबसे ज्यादा दिक्कत पुराने दुपहिया और कारों में आ रही है। कई बार टंकी में पानी या नमी मिलने से फ्यूल फिल्टर और पंप खराब हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में पूरी टंकी खाली कर सफाई करनी पड़ती है। पहले इस तरह के मामले बहुत कम आते थे। अभी प्रतिदिन एक दो गाडि़यों की सफाई कर रहे है।

जाकिर हुसैन, वाहन रिपेयर मिस्त्री, आरटीओ रोड

ग्राहक सबसे पहले माइलेज कम होने की शिकायत लेकर आते हैं। जांच करने पर कई बार फ्यूल लाइन और इंजेक्टर में गंदगी मिलती है। हम किसी एक कारण को जिम्मेदार नहीं ठहरा सकते, लेकिन पिछले कुछ समय में ऐसी शिकायतों की संख्या जरूर बढ़ी है।
मोहम्मद सलीम, वाहन सर्विस सेंटर संचालक, आयड़

पुराने वाहनों में फ्यूल सिस्टम के पार्ट्स जल्दी खराब होने के मामले बढ़े हैं। कई ग्राहकों को फिल्टर और पंप समय से पहले बदलवाने पड़ रहे हैं। हमारी सलाह रहती है कि केवल भरोसेमंद पेट्रोल पंप से ईंधन भरवाएं और समय-समय पर वाहन की जांच कराते रहें।
जयप्रकाश चावला, स्पेयर पार्ट्स एवं ऑटो सर्विस व्यवसायी

एथेनॉल से ये आ रही समस्या

1-एथेनॉल हवा से नमी को सोख लेता है, जिससे ईंधन में वैपर आ जाते है और जंग की समस्या शुरू होती है।

2-एथेनॉल गाड़ी की रबर सील को पूरी तरह से खराब कर देता है, जिसकी वजह से ईंधन का रिसाव (लीकेज) होने लगता है।

3-टैंक और फ्यूल लाइनों में कीचड़ जमा हो जाता है, जो इन्हें बंद कर देता है और गाड़ी का परफॉर्मेंस घटाता है।

4-जंग लगने की वजह से फ्यूल सेंसर की रीडिंग प्रभावित होती है, जिससे डैशबोर्ड पर ईंधन का स्तर गलत दिखाता है और इंजन में दिक्कतें आती है।

5-कीचड़ और कचरा जमने से ईंधन का प्रवाह रुक जाता है, जिससे माइलेज कम होता और इंजन का पावर घटता है।

क्या है एथेनॉल

यह गन्ने के रस, मक्के, टूटे चावल और कृषि अवशेषों से तैयार होने वाला 99 प्रतिशत शुद्ध बायोफ्यूल है।

क्यों मिला रहे

भारत अपना 80 प्रतिशत से ज्यादा कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। पेट्रोल में एथोनॉल मिलाने से कच्चे तेल का आयात घटता है।

Updated on:
07 Jul 2026 02:16 pm
Published on:
07 Jul 2026 12:01 pm