
Rajasthan Agriculture: कभी खेतों की वाड़, मेड़ों और जंगल की झाड़ियों में स्वतः उगने वाला कीकोड़ा अब किसानों की नई उम्मीद बन गया है। बरसात के सीमित मौसम में मिलने वाली ये पारंपरिक सब्जी अब किसानों के लिए अतिरिक्त आय का मजबूत जरिया बन रही है। स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता और मांग के चलते कीकोड़ा की कीमतों में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है। राजस्थान के कई जिलों में यह 120 से 300 रुपए प्रति किलो तक बिक रहा है जिससे किसानों को सामान्य सब्जियों की तुलना में बेहतर मुनाफा मिल रहा है।
कभी ग्रामीण परिवार केवल अपने उपयोग के लिए खेतों की वाड़ और झाड़ियों से कीकोड़ा तोड़कर लाते थे, लेकिन अब इसकी मांग इतनी बढ़ गई है कि कई किसान इसकी व्यावसायिक खेती करने लगे हैं। स्थानीय मंडियों से लेकर जयपुर, उदयपुर, जोधपुर और अहमदाबाद तक इसकी आपूर्ति हो रही है।
कीकोड़ा का उत्पादन मुख्य रूप से जुलाई से सितंबर तक ही होता है। सीमित अवधि और कम उपलब्धता के कारण बाजार में इसकी कीमत अन्य हरी सब्जियों की तुलना में कई गुना अधिक रहती है। बारिश के मौसम में इसकी मांग लगातार बढ़ती है, जबकि आपूर्ति सीमित होने से किसानों को अच्छे दाम मिल जाते हैं।
कीकोड़ा में विटामिन-सी, फाइबर, आयरन, कैल्शियम और एंटीऑक्सीडेंट प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। आयुर्वेद में इसे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, पाचन तंत्र मजबूत करने और मौसमी संक्रमण से बचाव के लिए उपयोगी माना गया है। यही वजह है कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों की पहली पसंद बनता जा रहा है।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि कीकोड़ा की खेती में अन्य सब्जियों की तुलना में लागत कम आती है। बेल वाली यह फसल बरसात में तेजी से बढ़ती है और रासायनिक दवाओं की आवश्यकता भी अपेक्षाकृत कम पड़ती है। यदि किसानों को उन्नत बीज, तकनीकी मार्गदर्शन और विपणन की सुविधा मिले तो यह प्रदेश की महत्वपूर्ण नकदी फसल बन सकती है।
उदयपुर जिले के बिछडी निवासी किसान चुनीलाल डांगी का कहना है कि पहले कीकोड़ा खेत की वाड़ में अपने आप उग जाता था और घर में ही खा लेते थे। अब व्यापारी गांव तक खरीदने आने लगे हैं। अच्छी कीमत मिलने से अतिरिक्त आमदनी हो रही है।
गोटीपा निवासी किसान श्रवण सिंह देवल का कहना है कि बरसात के मौसम में कीकोड़ा की अच्छी मांग रहती है। मंडी में ले जाने पर तुरंत बिक जाता है। कम मेहनत में अच्छी कमाई होने से अब इसकी देखभाल भी पहले से ज्यादा करने लगे हैं।
कीकोड़ा एक पौष्टिक एवं औषधीय महत्व की सब्जी है। इसकी व्यावसायिक खेती की अच्छी संभावनाएं हैं। यदि किसान वैज्ञानिक तरीके से इसकी खेती करें और उचित विपणन व्यवस्था मिले तो यह उनकी आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
भावना डांगी, सहायक कृषि अधिकारी, डबोक