उदयपुर जिले में 2230 बूथ, इनमें 11 बूथ दुर्गम स्थलों पर, मतदाताओं का बूथ तक पहुंचने का नजारा करता है दंग, झाड़ोल व जयसमंद के गांवों के वोटर नाव में जाते हैं वोट डालने, कोटड़ा के एक बूथ पर जंगल में होकर 22 किमी. जाते है वोटर
उदयपुर/कोटड़ा/झाड़ोल/खेरवाड़ा/जयसमंद. लोकतंत्र के उत्सव में शत प्रतिशत मतदान के लिए इस बार जिले में कुल 2230 पोलिंग बूथ बनाए गए है, लेकिन इनमें से 11 बूथ दुर्गम स्थलों पर अवस्थित है। मतदाताओं की बूथ तक पहुंच का नजारा ही न केवल रोमांचित करने वाला होता है बल्कि देखने वाला एकबारगी दंग रह जाता है। आदिवासी बहुल झाड़ोल पंचायत समिति की चंदवास पंचायत समिति की बात करे तो यहां का एक बूथ रायड़ाखेड़ा फला में है। यहां पहुंचने के लिए ग्रामीणों को नाव की सवारी करनी होती है। मानसी वाकल के वर्ष पर्यन्त बहने वाले इस बेकवाटर को पार कर 110 परिवार मतदाता बूथ तक पहुंचते है। मतदान के दौरान ग्रामीणों का उत्साह देखते ही बनता है लेकिन हादसे का अंदेशा हर पल बना रहता है। इसी प्रकार कोटड़ा पंचायत समिति में फुलवारी की नाल प्राकृतिक छटा ओढ़े हुए है और हर आगन्तुक यहां गदगद हो जाता है। मजबूरी है कि वनविभाग के अधीन इस इलाके में पांच गांव ऐसे हैं, जहां मतदाता उबड़ खाबड़, पथरीले, पगडंडीनुमा रास्ते पर होकर 22 किलोमीटर पैदल वोट डालने जाते है। कभी कभार कोई ग्रामीण जीप या अन्य वाहनों में आसरा दे देता है।
खेरवाड़ा मुख्यालय में 58 किलोमीटर दूर है भीमपुर। यहां के वोटर 3 किमी. पैदल सफर कर पोलिंग बूथ तक पहुंचते है। सलूम्बर के बाबामगरा व भटवाड़ा टापू के 59 मतदाता नाव में बैठकर सात किलोमीटर दूर गामड़ी में वोट करने जाते है। इसी तरह जिले में गोगुंदा, उदयपुर ग्रामीण, मावली, वल्लभनगर व नवगठित सलूम्बर जिले के कई बूथ ऐसे हैं, जहां पहुंचने के लिए ग्रामीण मतदाताओं को ढेरों मुसीबतें झेलनी पड़ती है। खासकर महिलाएं छोटे बच्चों को गोद में उठाए बड़ी मुश्किल से बूथ पर पहुंचती है और लोकतंत्र के इस उत्सव में भागीदारी सुनिश्चित करती है, लेकिन कई महिलाएं ऐसी भी हैं जो वोट के महत्व से अनभिज्ञ हो मतदान से किनारा करती है और बूथ तक पहुंचती नहीं ।
5 गांव के 1007 वोटर जाते हैं 22 किलोमीटर दूर
वन्य जीव अभयारण्य फुलवारी की नाल में स्थित कोटड़ा क्षेत्र का राप्रावि दोतड़ ऐसा बूथ केंद्र है। जहां राजस्व गांव लोहारी, आंबा, सुरा, मणासी, खारावनी गांव के कुल 1007 मतदाताओं को 22 किलोमीटर दूर उबड़खाबड़ और जंगल के कच्चे रास्ते पैदल चलकर जाते है। यहां पर बुजुर्ग और गर्भवती महिलाएं वोट देने बहुत कम जाती है। अभ्यारण्य क्षेत्र होने से डामरीकरण सडक़ें नहीं है। पथरीले रास्ते से सरकारी परिवहन की कोई सुविधा नहीं है। इस बूथ की दूरी लोहारी से 22 किमी, आंबा 18 किमी, सुरा 15 किमी, मणासी 17 किमी और खारावनी की दूरी 14 किलोमीटर है।
110 परिवार यहां नाव से आते है वोट डालने
जिले की झाड़ोल तहसील के ग्राम पंचायत चन्दवास के अंतर्गत रायड़ाखेड़ा फला के मतदाता लनाव पर सवार होकर वोट डालने तलाई बूथ पर पहुंचते हैं। वर्ष 2006 में मानसी वाकल बांध परियोजना देवास प्रथम निर्माण के दौरान 110 परिवारों की जमीन डूब क्षेत्र में आने से इस गांव के लोगों को अक्सर परेशानी होती है। तलाई से रायड़ाखेड़ा फला आने जाने के लिए ग्रामीणों द्वारा अपने स्तर से 4.5 नावों का निर्माण कर संचालन किया जा रहा है। हर काम के िलए ये नाव इनका सहारा है। लोकतंत्र के महापर्व में इस बार भी यहां के लोग वोट करने जाएंगे।
खेरवाड़ा से 58 किमी. दूर बूथ, दो किमी पैदल सफर
खेरवाड़ा विधान सभा क्षेत्र का सबसे दूरस्थ मतदान केंद्र राजकीय प्राथमिक विद्यालय भीमपुर है। यहां मतदाताओं को 2 से 3 किलोमीटर पैदल जाना पड़ता है। यह बूथ खेरवाड़ा मुख्यालय से 58 किमी दूर है। बूथ संख्या 282 है जहां कुल मतदाता 566 अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इस मतदान केन्द्र के ग्रामीण पूर्व में भी बूथ को पास करने की मांग कर चुके है लेकिन अब तक समाधान नहीं हुआ। इसी तरह उदयपुर ग्रामीण में राउमावि सरूपाल की दूरी 65 किमी. व गोगुंदा के राप्रावि टेपुर की दूरी 60 किमी है। इन बूथों पर ग्रामीणों को आने जाने में काफी दिक्कत होती है।
नाव में सवारी कर जाते है यहां सात किमी.
सलूम्बर जिले के जयसमंद पंचायत समिति के गामड़ी ग्राम पंचायत के बाबामगरा व भटवाड़ा टापू के वोटर नाव में बैठकर सात किलोमीटर दूर गामड़ी पोलिंग बूथ पर वोट करने जाते है। यहां पर दोनों ही जगह मात्र 55 वोटर है लेकिन वोट डालने के दौरान हर समय हादसे का अंदेशा बना रहता है।