जटिल वीजा नियमों, भारी फीस और इजरायल-ईरान युद्ध के चलते भारतीय छात्रों का कनाडा, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया से मोहभंग हो रहा है। साल 2025 में विदेश जाने वाले छात्रों की संख्या पहली बार घटकर 12.54 लाख रह गई। कनाडा में जीआईसी राशि दोगुनी होने और ऑस्ट्रेलिया में वीजा फीस 125% बढ़ने से पढ़ाई महंगी हुई है।
उदयपुर: विदेश जाकर पढ़ाई करने वाले भारतीय विद्यार्थियों की संख्या में इस साल कमी हुई है। जटिल वीजा प्रक्रिया और सख्त नीतियां रुकावट बन रही है। सबसे बड़े कारणों में ईरान-इजरायल युद्ध और देशों की सख्त इमीग्रेशन पॉलिसी है।
भारत से सबसे ज्यादा बच्चे यूके, यूएसए, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जाना चाहते हैं। यूनाइटेड किंगडम के अलावा तीनों देशों ने वीजा प्रक्रिया को जटिल और अधिक खर्चीला बना दिया है। इससे इन देशों में पढ़ने के इच्छुक विद्यार्थियों की संख्या तेजी से गिरी है।
खाड़ी देशों में खासकर दुबई की मांग थी, वहां भी इस बार बहुत कम स्टूडेंट जाने को तैयार हैं। इस मौके को भुनाने के लिए फ्रांस, इटली और साइप्रस जैसे यूरोपीय देशों ने भारतीय छात्रों के लिए वीजा प्रक्रिया आसान की है।
पिछले वर्षों के मुकाबले इस साल ट्रेंड में कुछ बदलाव भी दिख रहे हैं। विदेश में अध्ययन करने जाने वाले विद्यार्थी अब ट्रेडिशनल कोर्स की बजाय शॉर्ट टर्म स्किल्ड बेस्ड कोर्सेज की ओर बढ़ रहे हैं। इससे फीस में भी बचत होती है और स्किल भी मिल जाती है।
विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2022 से 2024 के बीच भारतीय छात्रों की संख्या में 7.5 लाख से 13.3 लाख तक की रिकॉर्ड बढ़त देखी गई। वर्ष 2025 में यह संख्या बढ़ने की बजाय घटकर 12.54 लाख रह गई, जो निरंतर बढ़ते आंकड़ों में पहली गिरावट है।
कनाडा ने वीजा सीमा लागू की है। रहने के खर्च के लिए आवश्यक जीआईसी राशि को दोगुना कर 20,635 डॉलर कर दिया। छात्र को वीजा पाने के लिए यह राशि पहले कनाडा के बैंक में जमा करनी होती है।
ऑस्ट्रेलिया ने वीजा फीस में 125% की भारी वृद्धि कर इसे करीब 90 हजार रुपए महंगा कर दिया। जेनुइन स्टूडेंट टेस्ट अनिवार्य किया। विजिटर वीजा से स्टूडेंट वीजा में स्विच करने पर पाबंदी लगाई।
यूके ने इमीग्रेशन हेल्थरी सरचार्ज में बड़ी बढ़ोतरी की, जिससे छात्रों को सालाना करीब 81,000 रुपए अतिरिक्त देने पड़ रहे हैं।
अमेरिका ने स्टूडेंट वीजा (एफ, एम, जे श्रेणी) आवेदन फीस को बढ़ा दी है। वीजा इंटरव्यू के लिए स्लॉट मिलने की लंबी प्रतीक्षा अवधि भी बड़ी चुनौती।