
मो. इलियास/उदयपुर . अलकापुरी में दो बेशकीमती भूखंडों को हड़पने के लिए भूमि दलालों ने धोखाधड़ी में ऐसी चाल चली कि पुलिस भी जांच में गश खा गई। आरोपितों ने एंटिक सामान की दुकान से पुराना ताम्रपत्र खरीदा, जिससे फर्जी सजरा बनाया। बाद में एक गरीब मजदूर को चंद पैसे देकर फर्जी अंगूठा लगाकर पावर ऑफ एटर्नी तैयार कर ली। इतना ही नहीं आरोपितों ने भू-भवन कार्यालय की फर्जी मुहर लगाकर जमीन का अजमेर के सेठ से करोड़ों में सौदा तक कर डाला, लेकिन 50 लाख की ही एक नम्बर में लेन-देन हुई।
इसका खुलासा होने पर भूखंड के असली मालिक की रिपोर्ट पर अम्बामाता थाना पुलिस ने पांच आरोपितों को गिरफ्तार किया। थानाधिकारी चेनाराम पचार ने बताया कि फतहपुरा निवासी सुनील जैन ने 12 सितम्बर 2017 को इस्तगासे के जरिये धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज करवाई थी।
जांच के बाद एएसआई जगदीश वैष्णव मय टीम ने ऊपर की मस्जिद सिलावटवाड़ी निवासी इस्लाउद्दीन उर्फ इस्लामुद्दीन पुत्र अहमद बक्ष, चमनपुरा हाल अहमद हुसैन कॉलोनी मल्लातलाई निवासी मोहम्मद उस्मान पुत्र बाबू खां, वारियों की पोल जगदीश मंदिर रोड निवासी मुकेश पुत्र जानकीलाल कंसारा, माकड़ादेव झाड़ोल निवासी आजमा पुत्र नाथू डामोर व छीपा कॉलोनी मल्लातलाई निवासी सामीर पुत्र साजिद खां को गिरफ्तार किया। आरोपितों से पूछताछ के बाद पुलिस ने जमीन खरीदार अजमेर निवासी मुक्कमील खां हुसैन, इस्लाउद्दीन की दूसरी पत्नी शहनाज को नामजद किया है जिनसे अभी तफ्तीश की जानी है।
सारे पैंतरे आजमाए आरोपितों ने
महाकालेश्वर से आगे अलकापुरी में भूखंड संख्या 26 व 27 विजय इन्टरप्राइजेज भागीदार सुनील जैन के नाम दर्ज है। मेवाड़ रिसायत के समय यह भूखंड राव मनोहर ङ्क्षसह बेदला व उनके परिजनों ने खरीदा था। बाद में यह बसंतीलाल भंडारी व रणजीत सिंह चतुर के नाम आया। बाद में इस जमीन का कंचन देवी के माध्यम से संबंधित फर्म के पास आ गई। बरसों से यह भूखंड खाली पड़े थे। आरोपित भूमि दलालों ने इसे हड़पने के लिए पूरी योजना बनाई।
धोखाधड़ी का था ऐसा मकडज़ाल
गोगुन्दा थाना क्षेत्र के कालोड़ा गांव में फर्जी सरकारी अधिकारी बन कर बाबूड़ा नामक गरीब आदिवासी के घर पहुंचे। पेंशन चालू करने का झांसा देते हुए उसकी आईडी, आधार व वोट कार्ड लेकर आ गए।
जगदीश चौक व घंटाघर क्षेत्र में गाइड बनकर आरोपितों ने एंटिक सामान की दुकान पर 10 हजार में एक ताम्रपत्र खरीदा। बताया कि विदेशी को जरूरत है, मगर पांव में चोट के कारण वह नहीं आ सका।
ताम्रपत्र पर लिखावट में किसी उमा नाम के व्यक्ति के संबंध में कोई जानकारी थी, उसकी इबारत का गलत रूपातंरण कर फर्जी सजरा तैयार किया। सजरा में मेवाड़ रिसायत के समय बाबूड़ा के पूर्वजों के नाम जमीन बता दी। इस सजरा पर उन्होंने फर्जी सरकारी मुहर भी लगा दी।
आरोपितों ने बाद में हाथीपोल से आजमा नाम के मजदूर को पकड़ा, उसे गाड़ी छुड़वाने के लिए अंंगूठे की जरूरत बताते हुए मजदूरी के पांच सौ रुपए दिए। कोर्ट से स्टाम्प पर लिखापढ़ी कर बाबूड़ा के फोटो व आईडी लगाते हुए आजमा के साइन कर फर्जी पावर ऑफ एटर्नी तैयार की।
फर्जी पावर से आरोपितों ने अजमेर के मुकम्मील खां को बेच दी।
पुलिस ने पुरातत्व विभाग से ताम्रपत्र की जांच करवाई तो ऐसी कोई इबारत ही नहीं मिली।