उदयपुर

लीड…..पाबंदी के बाद भी झील किनारे फिर डाला कचरा, एनएचएआई की कार्यप्रणाली पर सवाल

Aug 05, 2026
Rajasthan

Bपत्रिका की खबर के बाद प्रशासन ने किया पाबंद, कचरे का ढेर समतल कर फिर उसी जगह डंपिंगB
Bराजसमंद. B ऐतिहासिक राजसमंद झील को कचरे से बचाने के लिए प्रशासन की सख्ती भी बेअसर नजर आ रही है। राजस्थान पत्रिका में 30 जुलाई को ‘अनदेखी की भेंट चढ़ रही राजसमंद झील, कचरे से प्रदूषण का खतरा’ शीर्षक से खबर प्रकाशित होने के बाद प्रशासन हरकत में आया और मामले की पड़ताल शुरू करते हुए एनएचएआई को झील किनारे कचरा नहीं डालने के लिए पाबंद किया। इसके बावजूद राजनगर हाइवे की सर्विस रोड से एकत्रित कचरा फिर झील के पास डाल दिया गया। बताया जा रहा है कि खबर प्रकाशित होने के बाद एनएचएआई अधिकारियों ने झील किनारे पड़े कचरे के ढेर को हटाने के बजाय वाहनों से समतल करवा दिया। इसके बाद सर्विस रोड से एकत्रित कचरा दोबारा उसी स्थान पर डाल दिया गया। इतना ही नहीं, कचरे के लिए जगह बनाने के उद्देश्य से वहां उगे जंगली पेड़ों को काटे गए। इससे उच्चाधिकारियों के निर्देशों के बावजूद एनएचएआई अधिकारियों की गंभीरता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
Bधीरे-धीरे पानी तक पहुंच रहा कचराB
राजसमंद झील शहर की पहचान, गौरव और जीवनरेखा मानी जाती है। झील किनारे डाला जा रहा कचरा धीरे-धीरे पानी तक पहुंच सकता है, जिससे जल गुणवत्ता प्रभावित होने और प्रदूषण बढ़ने की आशंका है। विडंबना यह है कि जिस ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण के लिए जनभागीदारी और प्रशासनिक प्रयासों की जरूरत है, वहीं जिम्मेदार एजेंसियों की कार्यप्रणाली इसके अस्तित्व पर संकट खड़ा कर रही है।

Bविरासत का अनूठा नमूना है राजसमंद झीलB

मेवाड़ के महाराणा राजसिंह द्वारा निर्मित राजसमंद झील ऐतिहासिक, प्राकृतिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यह झील राजसमंद की पहचान होने के साथ पर्यटन का प्रमुख आकर्षण भी है। प्राकृतिक जल स्रोतों से भरने वाली झील का पानी शहरवासी वर्षभर उपयोग में लेते हैं। ऐसे में झील के आसपास बढ़ता कचरा, गंदगी और अव्यवस्थाएं इसके भविष्य को लेकर चिंता बढ़ा रही हैं।
Bझील का मुख्य सेतु नौचौकी B
(लगभग 581 गज लंबा) सहित करीब सवा किलोमीटर लंबी पाल में कई स्थानों पर दरारें और धंसाव देखने को मिल रहे हैं। चूहों द्वारा बनाए गए बिलों ने मिट्टी के बांध को अंदर से खोखला कर दिया है। हालांकि नौचौकी क्षेत्र में पुरातत्व विभाग द्वारा कुछ मरम्मत कार्य किए गए हैं, लेकिन झील की कच्ची पाल जो इसकी असली सुरक्षा है अब भी उपेक्षित है।

Bपांच सेतुओं में बंटी झील, सभी पर संकटB
राजसमंद झील की संरचना पांच प्रमुख सेतुओं में विभाजित है:-

नौचौकी सेतु
बिंब सेतु

कांकरोली सेतु

आसोटिया सेतु

वांसोल सेतु

विशेषज्ञों के अनुसार, कांकरोली, आसोटिया और वांसोल सेतुओं की पाल तेजी से जर्जर हो रही है। किसी भी बांध या एनीकट के लिए नियमित तकनीकी मरम्मत आवश्यक होती है, लेकिन आज़ादी के बाद इस दिशा में ठोस योजना का अभाव रहा है।
Bऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्वB
झील का निर्माण वर्ष 1676 में महाराणा राज सिंह द्वारा कराया गया था।

इसका उद्देश्य अकाल के समय लोगों को रोजगार देना था।

नौचौकी घाट भारतीय प्रस्तर कला का उत्कृष्ट उदाहरण है।

Updated on:
05 Aug 2026 06:00 am
Published on:
05 Aug 2026 06:00 am