उमेश को मिली नई जिंदगी
फलासिया . उमेश आखिर तीन वर्षो बाद हमउम्र के नन्हे-मुन्ने बच्चों के बीच पहुंचने के साथ ही सामान्य जीवन की ओर एक कदम बढ़ा दिया है। उसकी बुधवार को नेत्र सहित अन्य जांचें भी करवाई गई। पत्रिका में आठ वर्षीय मासूम उमेश पुत्र भगवती लाल दरोगा के मां-बाप की मौत के बाद तीन वर्षों से खूंटे से बंधे होने की खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। बाल अधिकारिता विभाग सहित कई स्वयंसेवी संस्थाएं सहायता के लिए आगे आई और बालक को नारायाण सेवा संस्थान उदयपुर को सुपुर्द किया।
संस्थान के प्रशांत अग्रवाल ने बताया कि उमेश की बुधवार को नेत्र जांच करवाई गई। अपरान्ह चार बजे के लगभग उमेश को अचानक ताण का दौरा पड़ा केयरटेकर रमेश पडिहार उसे सेटेलाइट अस्पताल लेकर पहुंचे। जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उमेश की एमआरआई करवाने के साथ ही न्यूरो सर्जन को दिखाने की सलाह दी। उमेश की नेत्र जांच करने वाले अलख नयन मन्दिर उदयपुर के डॉ. लक्ष्मण सिंह झाला ने बताया कि उमेश की आंखों की रोशनी मद्धम है।
नाराज दादी नहीं छुपा पाई खुशियां
उमेश को जब बाल अधिकारिता विभाग सहित स्वयंसेवी संस्थाओं की टीम लेने पहुंची थी तो सबसे ज्यादा नाराजगी उसकी दादी पेपी बाई ने जताई थी। यहां तक कि वो उमेश को नहीं ले जाने देने की जिद पर भी अड़ गई थी। बुधवार को स्थानीय ग्रामीणों ने खेत पर पहुंच जब उसकी दादी को पत्रिका में प्रकाशित खबर दिखाई तो उनके चेहरे पर संतुष्टि सहित खुशी के भाव छुपाए नहीं छुप रहे थे। गौरतलब है कि टीम जब बच्चे के घर पहुंची तो उसकी हालत बदतर थी। उसका एक हाथ भी जख्मी था। रिपोर्ट की टीम के आधार पर उसे बाल संंरक्ष्ाण समिति के सुपुुुर्द किया गया।