
भुवनेश पण्ड्या / उदयपुर . अब पशुओं में दूध बढ़ाने के लिए कोई इंजेक्शन लगाने, दवा देने और अन्य किसी विकल्प की आवश्यकता नहीं पडेग़ी। दूध बढ़ाने के लिए केवल उन्हें महज एक पोषक मिश्रण खिलाना होगा, जिसे महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय ने तैयार किया है।
यह मिश्रण मेवाड़ परिक्षेत्र के छह जिलों में हुए सर्वे के बाद तैयार किया गया है, ताकि पशुओं को किसी प्रकार का नुकसान नहीं हो। ये मिश्रण दूध बढ़ाने के साथ ही पशुओं में ताकत भी बढ़ाएगा। विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत पशुओं के लिए खनिज मिश्रण तैयार किया जा रहा है जिसका उद्देश्य राजस्थान के जनजातीय क्षेत्र में पशु खाद्य के रूप में विशिष्ट खनिज मिश्रण का मानकीकरण करना एवं डेयरी संचालित करने वाले किसानों में इसे लोकप्रिय बनाना है।
परियोजना में 954 प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया गया है, इसमें से इस वर्ष 654 किसानो को प्रशिक्षण दिया गया। विश्वविद्यालय ने सर्वे के तहत सभी गांवों में पशु चारे, रक्त और मिट्टी के नमूने जुटाए। इनके विश्लेषण के बाद पशुधन में आयरन, जिंक, कॉपर, कैल्सियम, फास्फोरस जैसे सूक्ष्म एवं पोषक तत्वों की कमी की बात सामने आई जिससे पशुओं के स्वास्थ्य और दुग्ध उत्पादन पर बुरा प्रभाव पड़ रहा था। इसके लिए 12 पोषक तत्वों की जरूरत होती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि खनिज मिश्रण उन्ही तत्वों की पूर्ति करेगा, जो चारे में अपर्याप्त होते हैं।
ये कम तो बीमारी
- कैल्शियम - ज्वर व हाइपो कैल्शियम
- फास्फोरस- पीका रोग, भूख विकास और प्रजनन दर में कमी
- मैग्नीशियन- ग्रास टीटेनी रोग
- सोडियम व पोटेशियम- छेरा रोग, दुग्ध व पशु के वजन में गिरावट
- तांबा- एनीमिया, वजन घटने व दस्त लगने की बीमारी
- कोबाल्ट, आयोडिन, जिंक व मोल्ब्डिेनम की कमी से भी बीमारियां होती हैं।
इनकी है जरूरत
वैज्ञानिकों के अनुसार 400 किलोग्राम शरीर भार और 10 किलोग्राम दूध देने वाले पशुओं को प्रतिदिन औसतन 18.20 ग्राम कैल्सियम, 14-15 ग्राम फास्फोरस और 8-10 ग्राम नमक की जरूरत होती है। वही दुधारू पशु को दैनिक रूप से 28 ग्राम कैल्सियम, 20 ग्राम फास्फोरस और 15 ग्राम नमक की जरूरत होती है।
पशुओं को लेकर बाजार में मिलने वाले मिश्रण में कुछ कमी रह जाती है, जिसे हमने पूरा किया है। सर्वे के बाद तैयार इस मिश्रण से पशुओं में दूध की मात्रा बढऩे के साथ ही ताकत बढेग़ी।
डॉ लोकेश गुप्ता, असिस्टेंट प्रोफेसर व प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर प्रोजेक्ट, एमपीयूएटी