दिव्यांग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के युवक-युवतियों के लिए आयोजित सामूहिक विवाह समारोह में 51 जोड़ों ने वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच सात फेरे लेकर नए जीवन की शुरुआत की।
दिव्यांग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के युवक-युवतियों के लिए आयोजित सामूहिक विवाह समारोह में 51 जोड़ों ने वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच सात फेरे लेकर नए जीवन की शुरुआत की। सेवा महातीर्थ, लियों का गुड़ा परिसर में दो दिन तक चले समारोह में देश के विभिन्न राज्यों से आए जोड़ों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ विवाह संपन्न किया।
इस आयोजन में शामिल जोड़ों में कई युवक-युवतियाँ ऐसे थे जो विभिन्न प्रकार की दिव्यांगता से जूझ रहे हैं। कोई पैरों से दिव्यांग है, कोई एक हाथ या पैर से, तो कुछ दृष्टिबाधित हैं। कठिन परिस्थितियों के बावजूद इन जोड़ों ने विवाह के माध्यम से नई जिंदगी की शुरुआत की।
समारोह में शामिल 51 जोड़ों में 25 दिव्यांग और 26 आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से जुड़े थे। गुजरात के बनासकांठा जिले के विजय गमार ने उदयपुर के चिखला गुड़ा की मंजू से विवाह किया, जो पैरों से दिव्यांग हैं। विजय ने कहा कि मंजू भले ही शारीरिक रूप से दिव्यांग हों, लेकिन वे उनके जीवन की नई शुरुआत में साथ निभाएंगी। कई जोड़े ऐसे भी थे जिन्होंने पहले संस्थान में उपचार, कृत्रिम अंग या पुनर्वास सेवाएं प्राप्त की थीं।
यह सामूहिक विवाह समारोह नारायण सेवा संस्थान में आयोजित किया गया। आयोजन के दौरान सुबह पारंपरिक वाद्ययंत्रों और मंगल ध्वनियों के बीच तोरण और वरमाला की रस्में पूरी कराई गईं। इसके बाद 51 वेदियों पर आचार्यों ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ सात फेरे सम्पन्न कराए। विवाह के दौरान पारंपरिक रस्मों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने माहौल को उत्सवमय बना दिया।
विवाह के बाद प्रत्येक जोड़े को नई गृहस्थी शुरू करने के लिए पलंग, बिस्तर, अलमारी, बर्तन, गैस चूल्हा, डिनर सेट और पंखा सहित आवश्यक घरेलू सामान दिया गया। समारोह के अंत में नववधुओं की प्रतीकात्मक डोली विदाई हुई, जहां खुशी और भावनाओं से भरा माहौल देखने को मिला।
कार्यक्रम में प्रशांत अग्रवाल, पद्मश्री कैलाश ‘मानव’, कमला देवी, वंदना अग्रवाल, पलक अग्रवाल, दर्शना मेहता, यश मेहता और ओम प्रकाश सोनी सहित कई अतिथि मौजूद रहे। संस्थान में अब तक 2510 दिव्यांग और जरूरतमंद युवक-युवतियों के विवाह कराए जा चुके हैं।