महाराणा भूपाल चिकित्सालय का एमटीसी वार्ड : कुपोषित बच्चों के लिए रखे खिलौने जस के तस, परिजनों के लिए लगा टेलीविजन महीनों से खराब
डॉ. सुशील कुमार सिंह/उदयपुर . संभाग के सबसे बड़े महाराणा भूपाल राजकीय चिकित्सालय में कुपोषित बच्चों की जिंदगी ‘बेबसी’ का शिकार है। जनजाति बहुल संभाग के जिलों से आने वाले कुपोषित बच्चों के लिए चिकित्सालय के एमटीसी (मालन्यूट्रेशन ट्रीटमेंट केंप) वार्ड-१ में ढेरों खिलौनों की सुविधा के बावजूद वे इनसे वंचित हैं। बेदर्दी व्यवस्था के चलते बच्चे इन सुविधाओं को देखकर दूर से ही मन बहलाते दिखते हैं। बच्चों के साथ रहने वाली माताओं को प्रतिदिन की न्यूनतम मजदूरी देन का प्रावधान तो है, लेकिन बंद कमरे में बच्चों के साथ ऊबती माताआें के लिए मनोरंजन के आवश्यक संसाधन नहीं है। वार्ड में लगा टेलीविजन कई महीनों से खराब है।
बच्चों का घुटता है दम
कुपोषित वार्ड में कहने को १० बेड की सुविधा है। सरकारी खर्चे पर कुपोषित बच्चों को दूध-फल, चावल, हलवा उपलब्ध करवाया जाता है। इसी तरह माताओं को चिकित्सालय की रसोई से भोजन की सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावे भी किए जाते हैं, लेकिन हकीकत चौंकाने वाली है। छोटे से वार्ड में १० बेड बिछने के बाद बच्चों के खिलौने खेलने की जगह नहीं रहती। बहुत से खिलौने तो केवल सुंदरता का पर्याय बनकर प्लास्टिक से ढके हुए हैं। वॉकर जैसी सुविधाएं केवल शोपिस तक सीमित हैं। हकीकत में प्रवेश के साथ ही इस कक्ष में दम घुटने जैसी शिकायतें रहती हैं। वार्ड के भीतर एक्जोस फेन जैसी सुविधाएं भी नाकाफी है। बच्चे पूरे दिन बिस्तर पर ही पड़े रहने को मजबूर हैं।
चोरी होते हैं खिलौने
स्टाफ का तर्क है कि छोटे खिलौने बच्चों को नहीं दे पाते। पहले परिजनों को खिलौने दिए तो चोरी हो गए। जाते समय अधिकतर परिजन खिलौने जमा नहीं कराते हैं। एेसे में छोटे खिलौने खत्म हो गए हैं। दानदाताओं से ही खिलौने मिले हैं। टेलीविजन भी सालों पुराना है, जो अधिकतर समय खराब ही रहता है।
चला रहे हैं व्यवस्था
वार्ड संचालन के नाम पर ज्यादा बजट नहीं मिलता है। दानदाताओं को वार्ड में दान करने के लिए प्रेरित करते हैं। बजट का पर्याप्त उपयोग होता है। टेलीविजन बहुत पुराना है। मजबूरी है क्या करें।
डॉ. आर.एल. सुमन, प्रभारी, एमटीसी वार्ड, एमबी हॉस्पिटल