
उदयपुर . प्रदेश में खाद, बीज व कीटनाशक बेचना अब आसान नहीं होगा। अब यह काम वे ही कर सकेंगे जिनके पास बीएससी की डिग्री होगी। इसमें भी केमिस्ट्री का होना अनिवार्य होगा। जो डीलर्स पहले से काम कर रहे हैं उनमें भी ऐसे डीलर्स को जो दसवीं पास हैं उन्हें डिप्लोमा करना होगा। साथ ही वे डीलर्स जो दसवीं तक भी नहीं पढ़े हैं उनका लाइसेंस स्वत: ही निरस्त हो जाएगा। यह नियम कीटनाशी व उर्वरक डीलर्स पर लागू होगा। बीज डीलर्स के लिए बाध्यता नहीं रहेगी। प्रदेशभर में पहले चरण में डिग्री नहीं होने के बाद भी बीज, उर्वरक, कीटनाशी व अन्य दवाइयों को बेचने वाले करीब 12 हजार डीलर्स को राज्य सरकार डिप्लोमा इन एग्रिकल्चरल एक्सटेंशन सर्विसेज फॉर इनपुट डीलर्स (दैसी) करवाएगी।
दसवीं पास नहीं तो निरस्त होंगे लाइसेंस
इस डिप्लोमा के लिए न्यूनतम दसवीं पास की योग्यता निर्धारित की गई है। कीटनाशी व उर्वरक डीलर्स अगर दसवीं पास नहीं है तो उसका लाइसेंस निरस्त कर दिया जाएगा। हालांकि सरकार ने 2019 तक उन्हें छूट दी है जिसमें वे न्यूनतम दसवीं की पढ़ाई कर डिप्लोमा कर ले ताकि उनका लाइसेंस जारी रहे। बीज वालों के लिए ऐसी अनिवार्यता नहीं रहेगी।
ऐसा इसलिए किया
कृषि उपनिदेशक विस्तार केएन सिंह ने बताया कि डीलर्स जानकारी के अभाव में कई बार आवश्यकता से ज्यादा या गलत कीटनाशी दे देते हैं। इससे आगे फसल खराब हो जाती है व भूमि की उत्पादन क्षमता पर विपरित असर पड़ता है।
इससे अनाज उपयोग करने वालों के स्वास्थ्य पर भी विपरित असर पड़ता है। ऐसे में पुराने डीलर्स को कीटनाशी, उर्वरक व अन्य दवाइयों के प्रति जागरूक करने के लिए डिप्लोमा करवाया जा रहा है।
जिससे उन्हें कीटनाशी, उर्वरक के उपयोग की पूरी जानकारी हो सकेगी और वे किसानों को आवश्यकतानुसार व सही कीटनाशी उर्वरक दे पाएंगे।
40 दिन का मिलेगा प्रशिक्षण
डिप्लोमा के लिए डीलर्स को चालीस दिनों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह प्रशिक्षण सप्ताह में एक दिन रविवार व अन्य अवकाश के दिन दिया जाएगा। ताकि दुकान पर आने वाले किसानों को असुविधा नहीं हो। प्रशिक्षण के दौरान आठ बार फील्ड विजिट भी होगी। जिले में 40 डीलर्स की संख्या होने पर यह जिला स्तर पर होगा। पर्याप्त संख्या नहीं होने पर अन्यत्र प्रशिक्षण करवाया जाएगा। इसके लिए आवेदक को दस हजार रुपए शुल्क देना होगा।