उदयपुर

PATRIKA CAMPAIGN: बाजार में जिस दूध की कीमत 70 रुपए वहीं दूध उदयपुर में बिक रहा इस कीमत पर कि जानकर आप भी रह जाएंगे हैरान

उदयपुर. उत्पादन क्षमता के बावजूद इस फार्म के दूध से पहले महाविद्यालय के स्टाफ एवं उनके परिवार का भरण पोषण औने-पौने दामों में किया जाता है।

2 min read
Feb 27, 2018

डॉ सुशील सिंह चौहान /उदयपुर. प्रतिदिन सैकड़ों लीटर दूध की उत्पादन क्षमता के बावजूद ‘गिर केटल ब्रिडिंग प्रोजेक्ट’ के बीते सात साल बाद भी आत्म निर्भर नहीं होने की नई वजह ‘बिल्ली’ के हाथ में दूध की रखवाली सामने आया है। उत्पादन क्षमता के बावजूद इस फार्म के दूध से पहले महाविद्यालय के स्टाफ एवं उनके परिवार का भरण पोषण औने-पौने दामों में किया जाता है। बाद में ठेका एजेंसी के माध्यम से इसे बाजार में बेचना सुनिश्चित होता है। भीलवाड़ा जिले में आदर्श पशुपालक की ओर से 70 रुपए प्रति लीटर बेचे जाना वाला दूध यहां वर्तमान ठेका व्यवस्था के तहत महज 29 रुपए किलो बिक रहा है।

पूर्व में महाविद्यालय के अधीन कार्य कर रही ठेका एजेंसी का आरोप था कि उन्हे बेचे जाने वाले दूध में पानी मिलाया जाता है। इतना ही नहीं गिर गाय के दूध की फेट 5 होने की बजाय उन्हें केवल 3 और साढ़े 3 ही मिलती है। स्टाफ एवं छात्रावास में दूध वितरण के लिए कोई मानक भी नहीं है। आवश्यकता के समय कई लीटर दूध अधिक लिया जाता है। छुट्टियों के दिनों में कई लीटर अतिरिक्त दूध की खपत सुनिश्चित करना ठेका एजेंसी के लिए मुसीबत बन जाता है। चिंता इस बात से है कि महंगाई में दूध की कीमत बढऩे की बजाय इसे दो रुपए प्रति लीटर कम लागत में बेचा जा रहा है।

READ MORE: उदयपुर में चलती ट्रेन में इस युवक के साथ हुआ ऐसा कि जिसने भी सुना उड़ गए होश

इनके लिए रिजर्व दूध
चौंकाने वाली बात यह है कि निविदा की शर्तों में ठेका एजेंसी को पहले महाविद्यालय स्टाफ एवं विद्यार्थियों के दूध की खपत सुनिश्चित करने को कहा जाता है। इसके बाद बचा हुआ दूध ही एजेंसी को बाजार में बेचने के लिए अधिकृत किया जाता है। औसत के हिसाब से यहां प्रतिदिन 350 लीटर दूध में से ठेका एजेंसी तक करीब 150 लीटर दूध ही पहुंचता है। छुट्टियों के दिन ठेका एजेंसी की यह सप्लाई कई बार पूरी की पूरी उठानी होती है। समस्या यह भी है कि गायों को अच्छा चारा एवं पोषाहार देने के बावजूद गिर गायों के दूध का फेट स्तर का नहीं मिलता।

एक नजर में दूध खपत
प्राध्यापक- 2
असिस्टेंट प्रोफेसर 25
एसोसिएट प्रोफेसर 2
नॉन टीचिंग स्टाफ- 70
केंटिन में सप्लाई 20 लीटर
पशु अनुसंधान केंद्र स्टाफ 55
बॉयज छात्रावास 100
बालिका छात्रावास 60

पहले की व्यवस्था
दूध की खपत पहले स्टाफ में पूरी करने की व्यवस्था पहले से चली आ रही है। निविदा में आने वाली दर से ही स्टाफ को दूध का बेचान होता है। यह राशि राजस्व में जमा होती है।
सी.एस. वैष्णव, अधिष्ठाता, पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय


हम पर ही आरोप
हमें कई मौकों पर फार्म की सप्लाई वाले दूध में पानी मिलता था। शिकायत करने पर हमारे ही आदमियों पर दूध में पानी मिलाने की शिकायतें करते थे। फेट भी कम मिलता था। घाटे के कारण ही मैंने निविदा में हिस्सा नहीं लिया।
पूर्णाशंकर, प्रतिनिधि, पूर्व दूध सप्लायर एजेंसी

ये भी पढ़ें

उदयपुर में चलती ट्रेन में इस युवक के साथ हुआ ऐसा कि जिसने भी सुना उड़ गए होश
Published on:
27 Feb 2018 02:32 pm
Also Read
View All