बच्चों की मुस्कान देख परिवार, दोस्त, परिजन और स्टाफ के साथी भी बने हमकदम
कपिल सोनी/ गोगुन्दा. शैक्षिक और सामाजिक रूप से अलग-थलग पड़े आदिवासी बहुल कोटड़ा तहसील की उखलियात पंचायत के राजकीय उच्च माध्यमिक, माध्यमिक व प्राथमिक विद्यालय के बच्चों को मुख्य धारा में शामिल होने का बड़ा मौका मिला है। इन बच्चों का बर्थ डे वैसे ही सेलिब्रेट होता है, जैसे शहर के निजी विद्यालयों में होता है। इतना ही नहीं, प्रतिभावान विद्यार्थियों को रास्ता भी मिला है, ताकि वे जानकारों की देख-रेख में खुद को तराश-निखार सकें। यह बीड़ा उठाया है प्रतापनगर थाने के सीआई डॉ. हनुवंतसिंह राजपुरोहित ने, जो कुछ वर्षों पहले तक गोगुंदा थाने में भी रह चुके हैं। करीब छह साल पहले उन्होंने इन तीन विद्यालयों की जिम्मेदारी ली थी, जिनमें करीब 300 से ज्यादा बच्चे हैं। जरूरतमंद बच्चों की मुस्कान देख इस पहल से न सिर्फ राजपुरोहित का पूरा परिवार जुड़ा, बल्कि उनके कई देशी-विदेशी मित्र भी हमकदम हुए हैं। अब यह ग्रुप समय-समय पर बच्चों से मिलता है। उनकी जरूरतें-समस्याएं जानने के साथ पूर्ति और समाधान भी करता है। फिलहाल इसी इलाके के तीन प्रतिभावान बच्चे राजपुरोहित के साथ उनके परिवार का हिस्सा बने हुए हैं, जो उदयपुर में रहते हुए विद्याभवन में अच्छी पढ़ाई कर रहे हैं। लक्ष्य इन्हें उच्च शिक्षा दिलाना है।
सरकार ने दो बार बोर करवाए, पानी नहीं मिलता देख बनवाई टंकी: तीनों विद्यालयों में पानी की बड़ी परेशानी थी। सरकार की ओर से विभाग ने दो बार बोरिंग करवाई, लेकिन दुर्भाग्य से पानी का बंदोबस्त नहीं हो पाया और परेशानी बरकरार रही। यह राजपुरोहित परिवार ने स्कूल में पानी की टंकी बनवा दी। पास के बोरिंग से इसे पाइन लाइन के जरिए जोडकऱ शुद्ध पानी की व्यवस्था कर दी। जरूरत पाठ्य पुस्तकों, स्टेशनरी और फर्नीचर की हो, या खिलौने या खाने-पीने की, बच्चे अब किसी चीज के मोहताज नहीं हैं। इन स्कूलों में योग सत्र भी शुरू करवाया है ताकि वे कुदरती रूप से सेहतमंद रहना सीखें। बकौल राजपुरोहित, इस पहल का मसद इन बच्चों को शहरी बच्चों जैसा जीवन और रहन-सहन का माहौल देना है। बोर्ड परीक्षाओं में 70 फीसदी और इससे ज्यादा अंक लाने वाले बच्चों को उनके परिजनों की रजामंदी से उदयपुर लाए हैं। दसवीं-बारहवीं के बाद इन्हें कॅरियर काउंसलिंग के लिए उदयपुर लाकर मोटिवेट करने के साथ प्रतियोगी व भर्ती परीक्षाओं की तैयारी करवाएंगे। ऐसे ही बच्चों में कठार निवासी दुर्गाराम गमेती, गंगा राजपूत और मोनिका राजपूत निवासी भूताला शामिल हैं, जो राजपुरोहित परिवार के साथ रह रहे हैं। इन्हें उदयपुर के विद्याभवन में दाखिल कराया है। पढ़ाई के साथ उनकी हर जरूरत का ध्यान रखा जा रहा है।
इलाज की सुविधा, हर महीने उदयपुर की सैर : बीमार होने पर इन विद्यालयों के बच्चों को जरूरत के मुताबिक इलाज की व्यवस्था भी दी है। गंभीर स्थिति होने पर इन्हें उदयपुर में विशेषज्ञ चिकित्सकों के पास ले जाना, उपचार खर्च आदि किया जाता है। राजपुरोहित की पत्नी लतासिंह राजपुरोहित, बच्चे भूमिका सिंह, तन्मय, हर्षवर्धन , युवराज भी उनके हमकदम हैं। पत्नी लता स्कूल में पढ़ाई भी करवाती हैं, जबकि बच्चे शहरी पढ़ाई और रहन-सहन की जानकारी देते हैं। इस पहल का नतीजा है कि उंखलियात के ये बच्चे शहर के सभी बड़े मॉल-बाजारों समेत पार्क, झीलों और पर्यटक स्थलों की सैर के साथ होटल-रेस्टोरेंट्स पर खाने का स्वाद भी चख चुके हैं। अभियान में राजपुरोहित ने दोस्तों-रिश्तेदारों और स्टाफ को भी जोड़ा है, जो हर बड़े मौके-त्योहार पर कपड़े, खिलौने, स्टेशनरी सहित जरूरत के साजो-सामान इन बच्चों तक पहुंचाते हैं।