
उदयपुर। जिले के बाघपुरा क्षेत्र से सात बच्चों को पढ़ाई के नाम पर तमिलनाडु ले जाने के मामले में जांच अब तेज हो गई है। गोवा से रेस्क्यू कर उदयपुर लाए गए बच्चों की काउंसलिंग और उनके परिजनों से पूछताछ के बाद पुलिस को कुछ नए तथ्य मिले हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि बच्चों को तमिलनाडु में एक मिशनरी संस्थान से जुड़े हॉस्टल में ठहराने की तैयारी थी। इन जानकारियों के आधार पर मानव तस्करी विरोधी यूनिट और बाघपुरा थाना पुलिस की संयुक्त टीम जल्द ही तमिलनाडु जाकर जांच करेगी।
बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) की निगरानी में बच्चों की काउंसलिंग कराई गई। इसके साथ ही परिजनों के अलग-अलग बयान भी दर्ज किए गए। परिजनों ने अधिकारियों को बताया कि उन्होंने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने के उद्देश्य से तमिलनाडु भेजने की सहमति दी थी। वहीं बच्चों के बयानों में यह बात भी सामने आई कि वे अपने गांव के चर्च में नियमित रूप से जाते थे।
पुलिस जांच के दौरान यह भी जानकारी मिली है कि जिस संस्थान में बच्चों को ले जाया जा रहा था, वहां मिशनरी गतिविधियां संचालित होने और बच्चों के रहने के लिए हॉस्टल की व्यवस्था होने की बात सामने आई है। इन तथ्यों की पुष्टि और पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने के लिए मानव तस्करी विरोधी यूनिट के प्रभारी भंवरलाल माली और बाघपुरा थाने के एक एएसआई सहित पुलिस टीम तमिलनाडु जाएगी।
टीम गोवा से लेकर तमिलनाडु तक बच्चों को ले जाने की पूरी प्रक्रिया, संबंधित व्यक्तियों, संस्थाओं और वहां संचालित गतिविधियों की जांच करेगी। साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि इस पूरे मामले के पीछे किसी अंतरराज्यीय संगठित नेटवर्क की भूमिका तो नहीं है।
इस मामले को लेकर सांसद डॉ. मन्नालाल रावत पहले ही एसआईटी गठित करने और एनआईए, सीबीआई तथा आईबी जैसी केंद्रीय एजेंसियों से जांच कराने की मांग कर चुके हैं। उनका आरोप है कि शिक्षा की आड़ में बच्चों को राज्य से बाहर ले जाकर धर्मांतरण कराने की सुनियोजित साजिश रची जा रही है। मामले के सामने आने के बाद विश्व हिंदू परिषद ने भी चिंता जताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार जांच के दौरान यह पता लगाया जाएगा कि बच्चों के प्रवेश, आवास और यात्रा की व्यवस्था किसने की, पूरा खर्च किसने उठाया और इस प्रक्रिया में किन-किन लोगों की भूमिका रही। संबंधित संस्था का पंजीकरण, उसका संचालन और वहां पहले से रह रहे अन्य बच्चों की स्थिति भी जांच के दायरे में रहेगी।
इसके अलावा यह भी जांच होगी कि जिन बच्चों का स्थानीय स्कूलों में पहले से प्रवेश था, उन्हें बिना ट्रांसफर सर्टिफिकेट (टीसी) के दूसरे राज्य में पढ़ाई के लिए कैसे भेजा जा रहा था। पुलिस यह भी परखेगी कि बच्चों को दूसरे राज्य भेजने में बाल संरक्षण से जुड़े नियमों और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया था या नहीं। यदि जांच में किसी तरह की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। साथ ही स्थानीय स्कूलों के शिक्षकों से भी पूछताछ की जाएगी कि बच्चों की अनुपस्थिति को लेकर उन्होंने क्या कदम उठाए थे।