उदयपुर

राजस्थान में दांव पर स्टूडेंट्स का भविष्य, कृषि शिक्षा और अनुसंधान में 90 फीसदी पद खाली

उदयपुर के कृषि शिक्षण और अनुसंधान संस्थानों में शिक्षकों व वैज्ञानिकों के 90 फीसदी तक पद खाली पड़े हैं। स्टॉफ की भारी कमी से पढ़ाई, प्रयोगशाला कार्य और फील्ड रिसर्च प्रभावित हो रहे हैं।

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Feb 23, 2026
दांव पर स्टूडेंट्स का भविष्य (फोटो पत्रिका नेटवर्क)

उदयपुर: केंद्र और राज्य सरकारें भले ही खेती को लाभकारी बनाने, नवाचार को बढ़ावा देने और अनुसंधान के जरिए किसानों की आय दोगुनी करने के दावे कर रही हों, लेकिन जमीनी हकीकत इससे उलट है। महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय से जुड़े विभिन्न कृषि महाविद्यालयों, प्रसार शिक्षा निदेशालय और अनुसंधान निदेशालय शैक्षणिक और वैज्ञानिक पदों की भारी कमी से जूझ रहे हैं।

स्थिति यह है कि इन संस्थानों में 75 से 93 फीसदी तक पद रिक्त हैं। मैन पावर की कमी से न केवल कृषि अनुसंधान प्रभावित हो रहा है, बल्कि खेती में भविष्य तलाश रहे हजारों विद्यार्थियों और किसानों की उम्मीदों पर भी पानी फिरता नजर आ रहा है।

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प्रसार निदेशालय में 93 फीसदी शैक्षणिक पद खाली

कृषि क्षेत्र में किसानों को नई तकनीक, उन्नत बीज, आधुनिक खेती के तरीके और जलवायु परिवर्तन से निपटने के उपायों की जानकारी देने वाला प्रसार शिक्षा निदेशालय खुद ही मैन पावर के संकट का शिकार है। अखिल भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) और राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत किसानों को प्रशिक्षण देने वाले इस निदेशालय में स्वीकृत 228 पदों में से 155 पद खाली हैं।

यानी करीब 93 फीसदी शैक्षणिक पदों पर नियुक्तियां नहीं हैं। इससे किसानों तक नई तकनीक और शोध आधारित जानकारी पहुंचाने का तंत्र कमजोर पड़ रहा है।

प्रभावित हो रहा अनुसंधान

कृषि अनुसंधान की रीढ़ माने जाने वाले अनुसंधान निदेशालय की स्थिति भी कम चिंताजनक नहीं है। यहां स्वीकृत 485 पदों में से 371 पद खाली हैं, यानी करीब 77 फीसदी स्टॉफ की कमी।

विशेषज्ञों का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर रिक्तियों के कारण नई फसलों का विकास, रोग प्रतिरोधक किस्मों पर काम, जैविक खेती, प्राकृतिक खेती और जलवायु अनुकूल कृषि जैसे विषयों पर होने वाला शोध प्रभावित हो रहा है।

दांव पर विद्यार्थियों का भविष्य

शैक्षणिक पदों की कमी का सीधा खामियाजा विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है। सीमित स्टॉफ के भरोसे पढ़ाई कराई जा रही है। कई विषयों में अतिथि व्याख्याताओं से काम चलाया जा रहा है। प्रयोगशालाओं, फील्ड रिसर्च और प्रायोगिक प्रशिक्षण भी प्रभावित हो रहा है। इससे कृषि क्षेत्र में करियर बनाने का सपना देख रहे युवाओं का भविष्य अधर में लटक गया है।

संस्थानस्वीकृत पदरिक्त पदरिक्ति प्रतिशत (%)
प्रसार शिक्षा निदेशालय22815593%
कृषि महाविद्यालय, डूंगरपुर302692%
प्रौद्योगिकी एवं अभियांत्रिकी महाविद्यालय28717075%
डेयरी एवं खाद्य महाविद्यालय573584%
राजस्थान कृषि महाविद्यालय29720785%
निदेशालय अनुसंधान48537177%

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Published on:
23 Feb 2026 01:48 pm
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