उदयपुर

Gig Workers : मंथली इनकम के बावजूद गिग वर्कर्स को नहीं मिल रहा आसान कर्ज, क्यों? राजस्थान में कराए गए सर्वे में हुआ खुलासा

Gig Workers Challenge : दक्षिणी राजस्थान में साल 2024 से 2025 के बीच 515 गिग वर्कर्स पर किए सर्वे में एक बड़ा खुलासा हुआ है। मंथली इनकम के बावजूद गिग वर्कर्स को नहीं मिल रहा आसान कर्ज, क्यों?
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Updated: 24 Jul 2026, 4:26 PM IST
Rajasthan Gig Workers monthly income but not getting easy loans why
Gig Workers Challenge : गिग वर्कर्स की फाइल फोटो पत्रिका

Gig Workers Challenge : भारत में तेजी से बढ़ती गिग इकोनॉमी ने रोजगार का ढांचा तो बदल दिया है पर आर्थिक सुरक्षा के मामले में इस वर्कफोर्स के सामने कई चुनौतियां है। आंकड़े बताते हैं कि गिग वकर्स डिजिटल रूप से बेहद सक्रिय हैं, पर पारंपरिक बैंकिंग फायदों से अब भी काफी दूर है। यह निष्कर्ष दक्षिणी राजस्थान में बैंकिंग उत्पादों के प्रति डिलीवरी वकर्स, प्लम्बर, इलेक्ट्रीशियन, ड्राइवर्स, जैसे गिग वर्कर्स की धारणा का अध्ययन करने पर सामने आया है। साल 2024 से 2025 के बीच 515 गिग वर्कर्स पर किए सर्वे में यह खुलासा हुआ है।

चौंकाने वाले आंकड़े

सुविवि के कॉमर्स कॉलेज के छात्र सुरेन्द्र दाहिमा के मुताबिक, शोध के दौरान गिंग वर्कर्स के वित्तीय व्यवहार को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। इसमें शामिल गिग वर्कर्स में 77 फीसदी पुरुष और 21 फीसदी महिलाएं हैं। इस वर्कफोर्स में 70 फीसदी वर्कर्स 35 वर्ष से कम आयु के हैं। अधिकतर गिग वर्कर्स की इनकम 20 से 30 हजार रुपए महीना है। अधिकतर गिग वर्कर्स की इनकम 20 से 30 हजार रुपए महीना होती है।

यह आ रही है दिक्कत

पारंपरिक कर्मचारियों के पास सैलरी स्लिप, फॉर्म-16 और आइटीआर जैसे पुख्ता दस्तावेज होते हैं, जिससे उन्हें बैंक लोन आसानी से मिल जाते हैं। वहीं गिग वर्कर्स का कोई निश्वित मासिक वेतन नहीं होता और न ही लोन के लिए जरूरी पारंपरिक कागजात होते हैं।

पारंपरिक क्षेत्र में कंपनियों की ओर से भविष्य निधि, पेंशन, सशुल्क छुट्टियां और स्वास्थ्य बीमा की सुविधाएं मिलती हैं। इसके विपरीत, गिग वर्कर्स को केवल 'पर-टास्क' के आधार पर भुगतान किया जाता है। कुछ निजी बैंकों ने जरूर गिग वर्कर्स के लिए खास तरह का अकाउंट लॉन्च किए हैं। यह एक जीरो बैलेंस खाता है, जिसमें बिना आईटीआर 35 लाख रुपए तक के होम लोन की सुविधा दी जा रही है।

वित्तीय सेवा उपयोग करने वाले इतने गिग वर्कर्स

खाता बचत 84 फीसदी
जीरो बैलेंस खाता 41 फीसदी
करंट खाता 36 फीसदी
सैलरी खाता 18.9 फीसदी
यूपीआइ उपयोग 91 फीसदी
डेबिट कार्ड 72 फीसदी
नेट बैंकिंग 39 फीसदी
क्रेडिट कार्ड 20.9 फीसदी
पर्सनल लोन 16.9 फीसदी
फिक्स्ड डिपॉजिट 14 फीसदी
बिजनेस लोन 13 फीसदी
रिकरिंग डिपॉजिट 10 फीसदी
विविध लोन 09 फीसदी
फ्रीलांसर्स क्रेडिट 4.9 फीसदी

गारंटी स्कीम की घोषणा होनी चाहिए

एम्पलॉयर्स एसो. ऑफ राजस्थान के अध्यक्ष एनके जैन का कहना है कि देश में गिग 1.52 करोड़ और राजस्थान में 10 लाख गिग वर्कर्स हैं। इनमें ज्यादातर ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों से आने वाले पढ़े लिखे गरीब वर्ग के युवा हैं। 20 लाख करोड़ के ई-कॉमर्स मार्केट का सप्लाई सिस्टम इन गिग वर्कर्स पर टिका हुआ है, लेकिन दस्तावेज नहीं होने के कारण इन्हें बैंक लोन नहीं देते। गिग वर्कर्स के लिए सरकार को अपनी गारंटी पर गिग वर्कर्स क्रेडिट स्कीम की घोषणा करनी चाहिए।

Updated on:
24 Jul 2026, 4:26 PM IST
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