
Udaipur Rishabhdeo Conversion Case: राजस्थान हाईकोर्ट ने उदयपुर के ऋषभदेव इलाके में कथित जबरन धर्मांतरण के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने 14 आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज करते हुए साफ किया कि उपलब्ध सबूत इस मामले के एक सुनियोजित नेटवर्क से जुड़े होने की ओर इशारा करते हैं।
जस्टिस सुनील बेनीवाल की बेंच ने मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस की जांच रिपोर्ट का गहराई से अध्ययन किया। रिकॉर्ड बताते हैं कि जून 2026 में ऋषभदेव में एक धार्मिक शिविर लगाया गया था। जांच के अनुसार, इस कैंप के जरिए स्थानीय ग्रामीणों को डरा-धमकाकर और लालच देकर ईसाई धर्म अपनाने के लिए मजबूर किया जा रहा था। पुलिस ने कोर्ट में दलील दी कि मुख्य आरोपी अमित कुमार का संपर्क पंजाब के अंकुर नरूला से था।
जांच एजेंसी ने आरोपी हरीश को लेकर कोर्ट में गंभीर जानकारी साझा की। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, हरीश पिछले चार साल में करीब 150 से 200 लोगों का धर्म बदलवा चुका है। पुलिस ने दावा किया है कि छापेमारी के दौरान आरोपियों के पास से बड़ी मात्रा में आपत्तिजनक सामग्री और धार्मिक साहित्य बरामद हुआ।
स्थानीय पुलिस के अनुसार, यह नेटवर्क पिछले एक दशक से इलाके के लगभग 50 गांवों में जड़ें जमाए हुए है। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि जो परिवार चर्च या उनकी प्रार्थना सभाओं में शामिल होने से इनकार करते थे, उन्हें अंजाम भुगतने की धमकियां दी जाती थीं। आरोपियों पर राजस्थान धर्म परिवर्तन निषेध अधिनियम 2025 की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है।
6 जून 2026 को ऋषभदेव थाने में मामले की पहली एफआईआर हुई। पुलिस ने उसी दिन हरीश, अमित कुमार, पलाश और आशीष सहित 12 लोगों को पकड़ा। 14 जून को प्रभुलाल और सोहनलाल को भी पुलिस ने न्यायिक हिरासत में ले लिया। पुलिस का दावा है कि आरोपी एक साथ 100 परिवारों के धर्मांतरण की बड़ी योजना पर काम कर रहे थे।
धर्मांतरण के इस मुद्दे ने राजस्थान के सियासी गलियारों में भी हलचल पैदा कर दी है। एक ओर जहां भाजपा सांसद ने इसे दूसरे राज्यों से जुड़ा एक गहरा षड्यंत्र बताया, वहीं कांग्रेस की पूर्व सांसद ने इन आरोपों को सिरे से नकारते हुए इसे आरएसएस का एजेंडा करार दिया। हालांकि, कोर्ट ने राजनीतिक बयानबाजी से हटकर पेश किए गए दस्तावेजों और प्रारंभिक सबूतों के आधार पर ही फैसला सुनाया है।
अदालत के फैसले के बाद अब सभी 14 आरोपी जेल में ही रहेंगे। हाईकोर्ट ने आरोपियों के लिए एक छोटा कानूनी रास्ता जरूर खुला रखा है। कोर्ट ने आदेश दिया कि पुलिस की तरफ से निचली अदालत में चार्जशीट पेश होने के बाद आरोपी नए सिरे से जमानत की अर्जी लगा सकते हैं। तब तक उन्हें जेल में ही रहना होगा।