राजस्थान के सरकारी स्कूलों में अब सिर्फ किताबों का बोझ नहीं, बल्कि बच्चों की मुस्कान और मानसिक मजबूती भी पढ़ाई का हिस्सा बनेगी। 'खुशीशाला' पहल के तहत नन्हे विद्यार्थी जीवन कौशल, भावनात्मक संतुलन और खुशहाल जीवन के गुर सीखेंगे। जानिए कैसे यह अनोखा प्रयोग देशभर में शिक्षा की नई मिसाल बन रहा है।
उदयपुर। बदलते दौर में बच्चों पर बढ़ते मानसिक दबाव, अकेलेपन और भावनात्मक चुनौतियों के बीच राजस्थान ने शिक्षा के क्षेत्र में एक अनूठी पहल की है। अब सरकारी स्कूलों में केवल किताबों की पढ़ाई ही नहीं, बल्कि बच्चों की खुशी, भावनात्मक मजबूती और मानसिक स्वास्थ्य पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। स्कूलों में जीवन कौशल के गुर सिखाने की तैयारी है। प्रदेश के सिरोही और बांसवाड़ा में चलाए गए पायलट प्रोजेक्ट में इसके उत्साहजनक परिणाम मिले हैं।
राजस्थान राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (आरएससीईआरटी) की ओर से शुरू की गई खुशीशाला पहल ने राजस्थान को भारत का पहला ऐसा राज्य बना दिया है, जिसने प्राथमिक शिक्षा में मानसिक स्वास्थ्य और वेलबीइंग (खुशहाली व मानसिक स्वास्थ्य) कार्यक्रम लागू किया है। इस पहल को अब व्यापक स्तर पर लागू किया जाएगा।
यह पहल कक्षा 1 से 5 तक के विद्यार्थियों के लिए तैयार की गई है, इसमें बच्चों को भावनात्मक रूप से मजबूत बनाने, सामाजिक व्यवहार सुधारने और जीवन कौशल विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। कार्यक्रम के तहत बच्चों के साथ गतिविधि आधारित शिक्षण होगा, वहीं शिक्षकों को भी विशेष प्रशिक्षण देकर विद्यार्थियों की मानसिक और भावनात्मक जरूरतों को समझने के लिए तैयार किया जा रहा है।
खुशीशाला केवल विद्यार्थियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें शिक्षकों के मानसिक स्वास्थ्य, क्षमता निर्माण और व्यवहारिक प्रशिक्षण को भी अहम हिस्सा बनाया गया है। आरएससीईआरटी अधिकारियों के अनुसार, कार्यक्रम का उद्देश्य स्कूलों में ऐसा वातावरण तैयार करना है, जहां बच्चे खुद को सुरक्षित, आत्मविश्वासी और खुलकर अभिव्यक्त करने योग्य महसूस करें। विशेषज्ञ मानते हैं कि शिक्षक-नेतृत्व वाले वेलबीइंग कार्यक्रमों से बच्चों की कक्षा में सहभागिता बढ़ती है, सामाजिक संवाद बेहतर होता है और उनमें चुनौतियों से लड़ने की क्षमता विकसित होती है। इससे शिक्षक भी विद्यार्थियों की भावनात्मक स्थिति को बेहतर ढंग से समझकर सहयोग कर सकेंगे।
2024 में सिरोही और बांसवाड़ा जिलों में खुशीशाला का पायलट प्रोजेक्ट चलाया गया, इसमें 120 शिक्षकों को शामिल किया गया। इसके परिणाम बेहद सकारात्मक रहे। कार्यक्रम से जुड़े आंकड़ों के अनुसार 53 प्रतिशत विद्यार्थियों में मानसिक कल्याण में सुधार दर्ज किया गया, जबकि बालिकाओं में यह सुधार 69 प्रतिशत तक पहुंचा। पायलट की सफलता के बाद 2025 में तकनीकी सहयोगी संस्था क्षमतालय फाउंडेशन के साथ मिलकर राज्य संसाधन समूह के 165 शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया। इसमें तीन दिन का प्रत्यक्ष प्रशिक्षण और 60 घंटे का ऑनलाइन शिक्षण शामिल था। इसके अलावा राजस्थान के 33 डाइट्स में 40-40 शिक्षकों सहित कुल 1320 शिक्षकों को भी प्रशिक्षण दिया गया।
आरएससीईआरटी ने खुशीशाला के लिए कक्षा 1 से 5 तक की शिक्षक पुस्तिकाएं तैयार कर ली हैं, इनका उपयोग राज्य संसाधन समूह की ओर से किया जा रहा है। इन पुस्तिकाओं के मोबाइल संस्करण भी तैयार किए गए हैं, ताकि प्रशिक्षित शिक्षकों को लगातार सहयोग मिल सके। कार्यक्रम को और प्रभावी बनाने के लिए शिक्षकों के लिए एक विशेष दीक्षा ऑनलाइन पाठ्यक्रम भी जल्द शुरू किया जाएगा। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल राजस्थान में समग्र शिक्षा और मानसिक कल्याण को नई दिशा देने का काम करेगी।
खुशीशाला बच्चों को केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं रखेगी, बल्कि उन्हें भावनात्मक रूप से मजबूत और आत्मविश्वासी बनाने का काम करेगी। यह पहल स्कूलों में सकारात्मक और सुरक्षित वातावरण तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम है। पायलट प्रोजेक्ट के उत्साहजनक परिणामों के बाद अब इसे व्यापक स्तर पर लागू किया जा रहा है। - श्वेता फगेड़िया, राजस्थान राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद