उदयपुर

Rajasthan: अंधेरे में कैसे आए दुल्हन? राजस्थान के नला गांव की विडंबना, बिजली के बिना नहीं हो रहा रिश्ता

गिर्वा ब्लॉक के नला गांव में दस घरों की बस्ती तक बिजली नहीं पहुंची है। बिना बिजली के यहां के रहवासियों की जिंदगी सामान्य से कुछ अलग है। स्थानीय निवासी युवक की उम्र शादी के लायक हो गई और रिश्ते भी आ रहे हैं। लेकिन कोई भी बेटी को ऐसे घर में देने को तैयार नहीं, जहां बिजली ही नहीं।

2 min read
Apr 05, 2026
दस घरों की बस्ती तक बिजली नहीं पहुंची (फोटो-एआई)

उदयपुर: आधुनिक भारत में जहां हम डिजिटल क्रांति और सौर ऊर्जा की बातें कर रहे हैं। वहीं, झीलों की नगरी उदयपुर के गिर्वा ब्लॉक से एक झकझोर देने वाली तस्वीर सामने आई है। यहां के नला गांव में बिजली का अभाव अब केवल अंधेरे का कारण नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य और उनके वैवाहिक जीवन की सबसे बड़ी बाधा बन गया है।

बता दें कि स्थिति यह है कि गांव की एक बस्ती के युवक कुंवारे बैठे हैं। क्योंकि कोई भी पिता अपनी बेटी को ऐसे घर में नहीं भेजना चाहता, जहां बिजली तक मयस्सर नहीं है।

ये भी पढ़ें

राजस्थान: थाली तक पहुंची ईरान-इजरायल युद्ध की आंच, 15 किलो तेल के टिन पर करीब 200 रुपए बढ़े, चेक करें ताजा भाव

अंधेरे में कैसे आए दुल्हन?

नला निवासी सुरेश पुत्र मेगा की व्यथा आज पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय है। सुरेश शादी के योग्य है, रिश्ते भी आ रहे हैं, लेकिन जैसे ही लड़की पक्ष को पता चलता है कि घर में बिजली नहीं है, वे पैर पीछे खींच लेते हैं।

सुरेश ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए बिजली निगम से सीधा सवाल किया, अंधेरे में दुल्हन कैसे आए? सुरेश आठवीं पास है और पास की एक माइंस में मजदूरी कर अपना जीवन यापन कर रहा है। वह अपनी जिंदगी सुधारना चाहता है, लेकिन बिजली विभाग की लापरवाही ने उसकी खुशियों पर ब्रेक लगा दिया है।

सिस्टम की पेचीदगियां और भ्रष्टाचार के आरोप

सुरेश ने बताया कि उसने तीन महीने पहले बिजली कनेक्शन के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाया, लेकिन सरकारी फाइलों और नियमों के जाल में उसकी गुहार दब गई। विभाग का तर्क है कि मुख्य बिजली लाइन बस्ती से लगभग 500 मीटर दूर है। दूरी अधिक होने के कारण नया बुनियादी ढांचा खड़ा करने में तकनीकी और वित्तीय अड़चनें हैं।

इतना ही नहीं, ग्रामीणों ने बिजली विभाग के कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सुरेश और अन्य ग्रामीणों का कहना है कि जब उन्होंने लाइनमैन से संपर्क किया, तो उसने कनेक्शन देने के एवज में भारी-भरकम राशि की मांग की। एक गरीब मजदूर के लिए इतनी बड़ी रकम जुटा पाना नामुमकिन है।

विकास की दौड़ में पीछे छूटी बस्ती

नला गांव की इस बस्ती में करीब 10 घर हैं, जो आज भी लालटेन और मोमबत्ती के युग में जीने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का आक्रोश अब चरम पर है। उनका कहना है कि एक तरफ सरकार 'हर घर बिजली' का दावा करती है, वहीं दूसरी तरफ महज 500 मीटर की दूरी एक युवक के घर बसने में दीवार बन गई है।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और बिजली निगम के उच्चाधिकारियों से गुहार लगाई है कि इस मानवीय समस्या का समाधान तुरंत किया जाए। ताकि नला गांव के आंगन में भी बिजली की रोशनी के साथ शहनाइयां गूंज सकें।

ये भी पढ़ें

राजस्थान: PNG लें या LPG? उलझन में उपभोक्ता, समझने में कहां आ रही समस्या

Published on:
05 Apr 2026 11:54 am
Also Read
View All