उदयपुर

उदयपुर में सरकारी दफ्तर की नीलामी…6.75 करोड़ लगी बोली, कोर्ट के आदेश से मचा हड़कंप

Government Office Auction: वाणिज्यिक न्यायालय उदयपुर की ओर से पारित आदेश से बुधवार को उदयपुर में जल संसाधन विभाग के एक्सईएन का दफ्तर नीलाम किया गया। मामला हैदराबाद की एक कम्पनी के बकाया 2.21 करोड़ रुपए का भुगतान नहीं करने से संबधित है।
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XEN office auction Udaipur
उदयपुर में सरकारी संपत्ति की नीलामी, एक्सईएन ऑफिस की बोली लगी

Government Office Auction: वाणिज्यिक न्यायालय उदयपुर की ओर से पारित आदेश से बुधवार को उदयपुर में जल संसाधन विभाग के एक्सईएन का दफ्तर नीलाम किया गया। मामला हैदराबाद की एक कम्पनी के बकाया 2.21 करोड़ रुपए का भुगतान नहीं करने से संबधित है। बुधवार को दफ्तर नीलामी की प्रक्रिया पूरी करके प्रतिभागियों की बोली का दस्तावेजीकरण किया गया, जिसे कोर्ट में पेश किया जाएगा।

दफ्तर के बाहर कोर्ट के सेल अमीन और कम्पनी के अधिवक्ता अभिषेक हैवर नीलामी के लिए बैठे। दिनभर में 5 प्रतिभागी बोली लगाने पहुंचे। कोर्ट ने डीएलसी के मुताबिक दफ्तर की कीमत करीब 6.75 करोड़ रुपए आंकी थी। शहर और बाहर के खरीदारों ने इतनी ही कीमत में दफ्तर खरीदने की इच्छा जाहिर की। ऐसे में उनकी बोली को कलमबद्ध किया गया, जिसे कोर्ट में पेश किया जाएगा।

यह है पूरा मामला

मामला हैदराबाद की कम्पनी एससीएल इन्फ्राटेक बनाम राजस्थान सरकार का है। जनवरी 2023 के प्रकरण में डिक्री राशि की वसूली के लिए संपत्ति की सार्वजनिक नीलामी की गई। न्यायालय की ओर से जारी विक्रय उद्घोषणा के अनुसार यह कार्रवाई सिविल प्रक्रिया संहिता 1908 के आदेश 21 नियम 64 एवं 66 के तहत की जा गई है।

न्यायालय ने कम्पनी के पक्ष में बकाया राशि, ब्याज और वाद व्यय की वसूली के लिए एक्सईएन का दफ्तर नीलाम करने का आदेश दिया था। कुल 2 करोड़ 21 लाख 10 हजार 883 रुपए राशि और निर्धारित वार्षिक ब्याज की वसूली के उद्देश्य से दफ्तर नीलामी की प्रक्रिया की गई।

विभाग को दिया था मौका

भुगतान के बिल रोके जाने पर कॉमर्शियल कोर्ट में वाद दायर किया था। भुगतान रोके जाने में विभाग दोष सिद्ध नहीं कर सका। ऐसे में कोर्ट ने पहले एक्सईएन का चेंबर सीज करने का आदेश दिया था। प्रक्रिया बढ़ी और पहले अप्रेल में नीलामी आदेश आया। कोर्ट ने कहा कि राशि जमा होने पर नीलामी रोकी जाएगी। फिर भी विभाग से भुगतान प्रक्रिया पूरी नहीं हुई तो नीलामी की गई।

20 साल में दोगुना हुआ भुगतान

बताया गया कि वर्ष 2007 में कम्पनी की ओर से विभाग का काम किया। इसका भुगतान 2.21 करोड़ था। विभाग ने काम में खामी मानते हुए भुगतान रोका तो कम्पनी कोर्ट में चली गई। बीस साल के दरमियान ब्याज सहित राशि बढ़कर साढ़े 4 करोड़ हो गई। अब कोर्ट का आदेश आने पर विभाग की ओर से दौड़ भाग की जा रही है। विभागीय प्रक्रिया में मामला फाइनेंस डिपार्टमेंट में है।

इनका कहना है…

कम्पनी के भुगतान का मसला 2007 में किए गए काम का है। संभवतया: विभागीय शर्तों में कमी के कारण भुगतान रुका। मामला कोर्ट में चल रहा था, जिसमें विभाग हार गया। इस संबंध में सरकार से मार्गदर्शन के लिए पूरा प्रकरण फाइनेंस डिपार्टमेंट में भेज रखा है। वहां से निर्देशानुसार भुगतान किया जाएगा।

कोमल पाटीदार, एक्सईएन, जल संसाधन

Updated on:
14 May 2026 12:59 pm
Published on:
14 May 2026 12:58 pm