उदयपुर

राजस्थान के रोडवेज प्रबंधन का इस कस्बे से मोह हुआ भंग, ओवरलोड वाहनों में जोखिम बढ़ा

rajasthan roadways रोडवेज बसों का पहाड़ी हिस्सों में खराब होना बदस्तुर जारी
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राजस्थान के रोडवेज प्रबंधन का इस कस्बे से मोह हुआ भंग, ओवरलोड वाहनों में जोखिम बढ़ा
राजस्थान के रोडवेज प्रबंधन का इस कस्बे से मोह हुआ भंग, ओवरलोड वाहनों में जोखिम बढ़ा

उदयपुर/ झाड़ोल. rajasthan roadways जनजाति बाहुल्य झाड़ोल इलाके की सवारियों को लेकर रोडवेज प्रबंधन का मोहभंग होता जा रहा है। सरकारी दावों के विपरीत रोडवेज प्रबंधन, क्षेत्र को जोडऩे वाली सड़कों पर वाहनों की संख्या में निरंतर गिरावट कर रहा है। समस्या से स्थानीय जनजाति परिवारों का मुख्यालय से संपर्क कट रहा है। वहीं सुविधा के नाम पर रोडवेज बेड़ा अब तक भी मार्ग पर चल रही शेष बसों में सुधार को लेकर ठोस कदम नहीं उठा रहा है। नतीजा पहले की ही तरह बना हुआ है। वर्तमान में भी रोडवेज बसों का पहाड़ी इलाकों में तकनीकी कारणों से खराब होना बदस्तुर जारी है। दूसरी ओर यात्रा के नाम पर गरीब तबका ओवरलोड वाहनों का जोखिम उठा रहा है। इतना ही नहीं गरीब तबका यात्रा के नाम पर जेब ढीली करने को भी मजबूर है।

58 में 18 गांव में रोडवेज
संभाग मुख्यालय से महज 50 किलोमीटर दूर स्थित आदिवासी बाहुल्य उपखण्ड क्षेत्र झाड़ोल की 59 ग्राम पंचायत में से 18 ग्राम पंचायतों में ही रोडवेज की सेवाएं मिल रही हैं। ऐसी स्थिति तब है, जब सरकार की ओर से पंचायत मुख्यालय को बेहतर रोडवेज सुविधा से जोडऩे के दावे हो चुके हैं। रोडवेज की रुसवाई का ही फायदा निजी चौपहिया टैक्सियां और निजी बस संचालक उठा रहे हैं। शाम होते ही निजी वाहन संचालक सवारियों से मनमाने किराए की वसूली कर रहे हैं। वाहनों की कमी के बीच ओवरलोड वाहनों की संख्या बढ़ रही है।

भाडेर में नहीं दिखी रोडवेज
भाडेर क्षेत्र की दूरदराज ग्राम पंचायतों के बाशिंदों के लिए तो रोडवेज एक सपने के समान है। स्थानीय ग्रामीणों को जिला मुख्यालय तक पहुंचने के लिए एक बार में तीन बसें बदलनी पड़ती हैं। स्थानीय प्रतिनिधियों के प्रयासों के बावजूद यहां कभी रोडवेज बस शुरू नहीं हो सकी। इधर, हरि क्षैत्र की कोचला, सुल्लातानजी का खेरवाड़ा, लुणावतों का खेड़ा, कन्थारिया, खरडिय़ा ग्राम पंचायत में एक भी रोडवेज बस का संचालन नहीं हो रहा। इसके अलावा ग्राम पंचायत देवास, गोराणा, ब्राह्मणों का खेरवाड़ा, चन्दवास, पीपलबारा, मादला, नैनबारा सहित कई पंचायतें हैं, जहां लोगों ने कभी रोडवेज सुविधा का सुख नहीं लिया।

अच्छी आय भी नहीं पची
शाम 6.30 बजे उदयपुर से कोटड़ा वाया झाड़ोल आने वाली बस से रोडवेज को बेहतर आए हो रही थी। बावजूद इसके रोडवेज बंद कर दी गई। वहीं 1.30 बजे उदयपुर से डैया अंबासा, पानरवा बस सेवा भी रोडवेज बंद कर चुका है।

...तो फायदा ही होता
स्थानीय सभी जनप्रतिनिधियों ने रोडवेज प्रबंधन से बस सेवा शुरू करने के लिए कई बार पत्र लिखे, लेकिन आज तक सुविधा के नाम पर कुछ नहीं मिला। मजबूरी में लोग निजी वाहनों के भरोसे मंजिल तय करते हैं।
कृष्णा देवी, सरपंच, बिरोठी

नहीं मिली सेवाएं
प्रशासनिक व सरकारी आदेश के बावजूद क्षेत्र में उप नगरीय सेवाओं को लेकर रोडवेज तंत्र सफल नहीं हुआ है। उल्टा पहले संचालित बसें भी बंद कर दी। दो से तीन दिन बाद प्रबंधक से मिलकर बसें शुरू करने की बात करेंगे। नहीं तो चक्काम जैसे कदम उठाए जाएंगे।
बाबूलाल खराड़ी, विधायक, झाड़ोल

और बंद होंगी
बसों की कमी के बीच झाड़ोल रूट की और बसें भी बंद हो सकती हैं। नए सर्कुलर में 27 रुपए प्रति व्यक्ति आए देने वाली बसों का ही संचालन संभव है। बीड़े में पहले ही 38 बसों की कमी है। rajasthan roadways इससे पर्याप्त व्यवस्था संचालन नहीं हो सकता।
महेश उपाध्याय, प्रबन्धक, उदयपुर डिपो

Published on:
14 Oct 2019 06:00 am