उदयपुर के सियासी गलियारों में इन दिनों Udaipur Files के नाम से एक ऐसा मामला गूँज रहा है जिसने न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि सत्तारूढ़ पार्टी की अंदरूनी राजनीति को भी कटघरे में ला खड़ा किया है। दुष्कर्म, ब्लैकमेलिंग और अश्लील वीडियो के जरिए डराने-धमकाने की यह कहानी अब शहर की चर्चाओं से निकलकर राजनीति का मुख्य केंद्र बन गई है।
लेकसिटी उदयपुर में एक हाई-प्रोफाइल दुष्कर्म और ब्लैकमेलिंग का मामला 'उदयपुर फाइल्स' के नाम से चर्चा में है। इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी, पीड़िता और इस विवाद के दायरे में आने वाले लगभग सभी प्रमुख किरदार भारतीय जनता पार्टी (BJP) से जुड़े बताए जा रहे हैं। मामला तब और गंभीर हो गया जब एक ऑडियो क्लिप सामने आई, जिसमें पुलिस कार्रवाई के दौरान एक वरिष्ठ नेता को बार-बार कॉल किए जाने का दावा किया जा रहा है।
पुलिस में दर्ज रिपोर्ट और अब तक की जांच के अनुसार, यह मामला करीब डेढ़ से दो साल पुराना है।
इस मामले में एक ऑडियो क्लिप ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। दावा किया जा रहा है कि जब पुलिस आरोपी के खिलाफ कार्रवाई कर रही थी, तब पुलिस टीम की मौजूदगी में ही एक वरिष्ठ नेता को तीन बार कॉल किए गए।
मामला तूल पकड़ते ही पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था। मंगलवार को जब आरोपी को अदालत में पेश किया गया, तो वहां उसकी जमानत अर्जी को सिरे से खारिज कर दिया गया।
चूंकि मामले के तार सीधे तौर पर सत्ता पक्ष के कार्यकर्ताओं और नेताओं से जुड़े दिख रहे हैं, इसलिए स्थानीय स्तर पर भाजपा बैकफुट पर नजर आ रही है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को हाथों-हाथ लिया है और इसे "बेटी बचाओ" के नारों के साथ जोड़कर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। सोशल मीडिया पर 'उदयपुर फाइल्स' हैशटैग के साथ लोग अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं।