
राजस्थान कैडर के सबसे अनुभवी और प्रभावशाली नौकरशाहों में शुमार रहे सुबोध अग्रवाल के लिए साल 2026 की शुरुआत किसी डरावने सपने जैसी रही है। 31 दिसंबर 2025 को रिटायर होने वाले इस दिग्गज अधिकारी के खिलाफ मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने रिटायरमेंट से ऐन पहले अभियोजन (Prosecution) की मंजूरी दी। अब एसीबी की टीम उनके ठिकानों पर साक्ष्य जुटा रही है और कई संदिग्धों को हिरासत में लिया जा चुका है।
सुबोध अग्रवाल मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं और उनकी शिक्षा-दीक्षा ग्वालियर के मशहूर सिंधिया स्कूल से हुई। वे शुरू से ही मेधावी छात्र रहे:
सेवानिवृत्त आईएएस सुबोध अग्रवाल की तलाश की जा रही है। उनके दिल्ली और जयपुर स्थित घरों पर एसीबी ने मंगलवार तड़के 4 बजे रेड की तो वो वहां नहीं मिले। जानकारी के मुताबिक एसीबी टीम ने दिल्ली के घर में सीसीटीवी फुटेज खंगाले तो सामने आया कि वो देर रात को ही वहां से निकल गए थे। उनका मोबाइल भी बंद आ रहा है।
खबर ये भी है कि सुबोध अग्रवाल ने मुख्यमंत्री और एसीबी डीजी को पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने कई दलीलें देते हुए अपनी बेगुनाही की बात कही है। सूत्रों के अनुसार पत्र में दलील ये भी दी गई है कि
एसीबी द्वारा दर्ज एफआईआर में जिन 101 टेंडर का ज़िक्र है, उसमें से एक भी ऐसा टेंडर नहीं है, जो अग्रवाल की अध्यक्षता वाली समिति से अनुमोदित थे।
सुबोध अग्रवाल को हमेशा एक 'वर्कहॉलिक' और परिणाम देने वाले (Result-oriented) अधिकारी के रूप में देखा गया। उन्होंने कई नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना और सौर ऊर्जा परियोजनाओं में राजस्थान को अव्वल बनाने में बड़ी भूमिका निभाई। उनकी बेहतरीन शैक्षणिक पृष्ठभूमि और शांत स्वभाव ने लंबे समय तक उन्हें विवादों से दूर रखा। उन्हें सरकारों का 'संकटमोचक' माना जाता था।
एसीबी की हालिया कार्रवाई के दौरान जब टीम उनके ठिकानों पर पहुँची, तो उनकी अनुपलब्धता और गहन पूछताछ से बचने की खबरों ने 'फरार' होने जैसी चर्चाओं को जन्म दिया है। हालांकि आधिकारिक तौर पर उन्हें 'फरार' घोषित नहीं किया गया है, लेकिन 15 ठिकानों पर हुई छापेमारी और उनके करीबियों की गिरफ्तारी ने उनकी मुश्किलें चरम पर पहुँचा दी हैं।
कार्रवाई: राजस्थान एसीबी ने ₹960 करोड़ के कथित घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया।
जांच: विशेष जांच दल (SIT) ने 65 दिनों तक तकनीकी और दस्तावेजी साक्ष्यों की जांच के बाद जयपुर, उदयपुर, बाड़मेर और दिल्ली में एक साथ छापेमारी की।
घोटाला: मैसर्स श्री गणपति ट्यूबवेल कंपनी और मैसर्स श्री श्याम ट्यूबवेल कंपनी ने फर्जी कार्यपूर्णता प्रमाण पत्र (Completion Certificate) के आधार पर टेंडर हासिल किए।
4 आरोपियों की तलाश: सुबोध अग्रवाल (रिटायर्ड IAS), जितेंद्र शर्मा (अधीक्षण अभियंता), मुकेश गोयल (तत्कालीन एससी), और संजीव गुप्ता (निजी व्यक्ति)।
हाईकोर्ट की रोक: रमेश मीणा, रामकरण मीणा, महेश मित्तल (ठेकेदार), और पदम चंद जैन (ठेकेदार) की गिरफ्तारी पर रोक है।
घोटाले का तरीका: फर्जी दस्तावेजों के अलावा ₹50 करोड़ से अधिक के प्रोजेक्ट्स में टेंडर पूलिंग और नियमों के विरुद्ध बोलीदाताओं की पहचान उजागर करने का भी आरोप है।
Published on:
18 Feb 2026 11:45 am
