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IAS Subodh Agrawal : ‘नवरत्न’ अधिकारी से ‘महा-घोटाले’ के फरार आरोपी तक, क्या जानते हैं सीनियर आईएएस डॉ सुबोध अग्रवाल की ये 10 बड़ी बातें?

राजस्थान की नौकरशाही में 'मिस्टर क्लीन' माने जाने वाले 1988 बैच के सबसे सीनियर आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल आज भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के घेरे में हैं। जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले की आंच उन तक पहुँच चुकी है और हाल ही में एसीबी (ACB) द्वारा उनके ठिकानों पर की गई छापेमारी ने पूरे प्रदेश में सनसनी फैला दी है।

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राजस्थान कैडर के सबसे अनुभवी और प्रभावशाली नौकरशाहों में शुमार रहे सुबोध अग्रवाल के लिए साल 2026 की शुरुआत किसी डरावने सपने जैसी रही है। 31 दिसंबर 2025 को रिटायर होने वाले इस दिग्गज अधिकारी के खिलाफ मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने रिटायरमेंट से ऐन पहले अभियोजन (Prosecution) की मंजूरी दी। अब एसीबी की टीम उनके ठिकानों पर साक्ष्य जुटा रही है और कई संदिग्धों को हिरासत में लिया जा चुका है।

कौन हैं सुबोध अग्रवाल?

सुबोध अग्रवाल मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं और उनकी शिक्षा-दीक्षा ग्वालियर के मशहूर सिंधिया स्कूल से हुई। वे शुरू से ही मेधावी छात्र रहे:

  • IIT बैकग्राउंड: उन्होंने IIT दिल्ली से सिविल इंजीनियरिंग में बी.टेक किया।
  • उच्च शिक्षा: उनके पास प्रिंसटन यूनिवर्सिटी (USA) से पब्लिक पॉलिसी में मास्टर डिग्री और राजस्थान यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स में Ph.D. भी है।

सुबोध अग्रवाल से जुड़ी 10 बड़ी बातें

  1. 37 साल का अनुभव: वे 1988 बैच के आईएएस हैं और राजस्थान के सबसे सीनियर अधिकारियों में से एक रहे हैं।
  2. महत्वपूर्ण पदों पर रहे: वे जलदाय विभाग (PHED), माइन्स, एनर्जी और चिकित्सा विभाग जैसे मलाईदार महकमों के अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) रह चुके हैं।
  3. नीति आयोग से तारीफ: बतौर स्वास्थ्य सचिव, उनके द्वारा किए गए 'अन्नपूर्णा भंडार योजना' जैसे कार्यों की नीति आयोग ने भी सराहना की थी।
  4. JJM घोटाले का केंद्र: जलदाय विभाग में उनके कार्यकाल के दौरान ₹900 करोड़ के घोटाले के आरोप लगे हैं।
  5. फर्जी सर्टिफिकेट मामला: आरोप है कि उनके समय में फर्जी अनुभव प्रमाण पत्रों के आधार पर चहेती कंपनियों को टेंडर दिए गए।
  6. ED की रेड: 2023 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उनके घर और दफ्तर पर छापेमारी की थी, जहाँ से कई दस्तावेज और नकदी जब्त की गई थी।
  7. भजनलाल सरकार का एक्शन: सरकार ने उनके रिटायरमेंट से ठीक पहले भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) को उनके खिलाफ जांच की मंजूरी दी।
  8. 170 अफसर रडार पर: सुबोध अग्रवाल अकेले नहीं हैं, उनके साथ करीब 170 अन्य अधिकारी-कर्मचारी भी जांच के दायरे में हैं।
  9. हाई-प्रोफाइल परिवार: उनकी पत्नी आयकर विभाग में मुख्य आयुक्त (Chief Commissioner) हैं और बेटा भी भारतीय राजस्व सेवा (IRS) अधिकारी है।
  10. आखिरी पोस्टिंग: रिटायरमेंट के वक्त वे राजस्थान वित्त निगम (RFC) के सीएमडी थे, जहाँ उन्होंने निगम को ₹18 करोड़ के मुनाफे में पहुँचाकर अपनी कार्यकुशलता साबित की थी।

घर से नदारद, फोन भी बंद

सेवानिवृत्त आईएएस सुबोध अग्रवाल की तलाश की जा रही है। उनके दिल्ली और जयपुर स्थित घरों पर एसीबी ने मंगलवार तड़के 4 बजे रेड की तो वो वहां नहीं मिले। जानकारी के मुताबिक एसीबी टीम ने दिल्ली के घर में सीसीटीवी फुटेज खंगाले तो सामने आया कि वो देर रात को ही वहां से निकल गए थे। उनका मोबाइल भी बंद आ रहा है।

बचाव में 'सरकार' को पत्र

खबर ये भी है कि सुबोध अग्रवाल ने मुख्यमंत्री और एसीबी डीजी को पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने कई दलीलें देते हुए अपनी बेगुनाही की बात कही है। सूत्रों के अनुसार पत्र में दलील ये भी दी गई है कि

एसीबी द्वारा दर्ज एफआईआर में जिन 101 टेंडर का ज़िक्र है, उसमें से एक भी ऐसा टेंडर नहीं है, जो अग्रवाल की अध्यक्षता वाली समिति से अनुमोदित थे।

पहले छवि 'साफ़' क्यों रही?

सुबोध अग्रवाल को हमेशा एक 'वर्कहॉलिक' और परिणाम देने वाले (Result-oriented) अधिकारी के रूप में देखा गया। उन्होंने कई नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना और सौर ऊर्जा परियोजनाओं में राजस्थान को अव्वल बनाने में बड़ी भूमिका निभाई। उनकी बेहतरीन शैक्षणिक पृष्ठभूमि और शांत स्वभाव ने लंबे समय तक उन्हें विवादों से दूर रखा। उन्हें सरकारों का 'संकटमोचक' माना जाता था।

अब 'फरार' या 'भगोड़े' जैसी चर्चा क्यों?

एसीबी की हालिया कार्रवाई के दौरान जब टीम उनके ठिकानों पर पहुँची, तो उनकी अनुपलब्धता और गहन पूछताछ से बचने की खबरों ने 'फरार' होने जैसी चर्चाओं को जन्म दिया है। हालांकि आधिकारिक तौर पर उन्हें 'फरार' घोषित नहीं किया गया है, लेकिन 15 ठिकानों पर हुई छापेमारी और उनके करीबियों की गिरफ्तारी ने उनकी मुश्किलें चरम पर पहुँचा दी हैं।

JJM महा-घोटाला, बड़ी बातें

कार्रवाई: राजस्थान एसीबी ने ₹960 करोड़ के कथित घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया।

जांच: विशेष जांच दल (SIT) ने 65 दिनों तक तकनीकी और दस्तावेजी साक्ष्यों की जांच के बाद जयपुर, उदयपुर, बाड़मेर और दिल्ली में एक साथ छापेमारी की।

घोटाला: मैसर्स श्री गणपति ट्यूबवेल कंपनी और मैसर्स श्री श्याम ट्यूबवेल कंपनी ने फर्जी कार्यपूर्णता प्रमाण पत्र (Completion Certificate) के आधार पर टेंडर हासिल किए।

4 आरोपियों की तलाश: सुबोध अग्रवाल (रिटायर्ड IAS), जितेंद्र शर्मा (अधीक्षण अभियंता), मुकेश गोयल (तत्कालीन एससी), और संजीव गुप्ता (निजी व्यक्ति)।

हाईकोर्ट की रोक: रमेश मीणा, रामकरण मीणा, महेश मित्तल (ठेकेदार), और पदम चंद जैन (ठेकेदार) की गिरफ्तारी पर रोक है।

घोटाले का तरीका: फर्जी दस्तावेजों के अलावा ₹50 करोड़ से अधिक के प्रोजेक्ट्स में टेंडर पूलिंग और नियमों के विरुद्ध बोलीदाताओं की पहचान उजागर करने का भी आरोप है।

गिरफ्तार किए गए व्यक्ति:

  1. दिनेश गोयल (सीई प्रशासन) - उदयपुर की ताज होटल से गिरफ्तार।
  2. विशाल सक्सेना (निलंबित एक्सईएन) - बाड़मेर रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार।
  3. अरुण श्रीवास्तव (रिटायर्ड एसीई) - दिल्ली स्थित घर से गिरफ्तार।
  4. के. डी. गुप्ता (सीई, ग्रामीण) - जयपुर स्थित घर से गिरफ्तार।
  5. सुभांशु दीक्षित (तत्कालीन सचिव) - जयपुर स्थित घर से गिरफ्तार।
  6. दिलीप कुमार गौड़ (रिटायर्ड सीई) - जयपुर स्थित घर से गिरफ्तार।
  7. सुशील शर्मा (वित्तीय सलाहकार) - जयपुर स्थित घर से गिरफ्तार।
  8. निरिल कुमार (मुख्य अभियंता, चूरू) - जयपुर स्थित घर से गिरफ्तार।
  9. मुकेश पाठक (दलाल) - छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से गिरफ्तार।
  10. महेंद्र प्रकाश सोनी (सेवानिवृत्त एसई) - जयपुर स्थित घर से गिरफ्तार

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