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जयपुर। परिवहन विभाग और निजी बस संचालकों के बीच टकराव अब आर-पार की जंग में बदल गया है। राज्य सरकार की नीतियों और आरटीओ की कथित 'दमनात्मक' कार्रवाई के विरोध में निजी बस संचालकों ने मोर्चा खोल दिया है। बस ऑपरेटर एसोसिएशन ने ऐलान किया है कि यदि 23 फरवरी तक उनकी मांगें नहीं मानी गई तो प्रदेश में निजी बसों का चक्काजाम हो जाएगा। इस हड़ताल से न केवल अंतरराज्यीय मार्ग प्रभावित होंगे, बल्कि जयपुर से जैसलमेर तक गांव-ढाणियों की लाइफलाइन भी ठप हो जाएगी।
बस ऑपरेटर एसोसिएशन राजस्थान के अध्यक्ष सत्यनारायण साहू ने सरकार पर दोहरा मापदंड अपनाने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि परिवहन विभाग केवल निजी बसों को निशाना बना रहा है। साहू के अनुसार विभाग इमरजेंसी गेट नहीं होने के नाम पर निजी बसों को तुरंत सीज कर देता है, जबकि राजस्थान परिवहन निगम की एक भी स्लीपर बस में इमरजेंसी गेट की सुविधा नहीं है। इसके बावजूद आज तक एक भी सरकारी बस के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।
हड़ताल का सबसे बड़ा असर आम जनता और लंबी दूरी के यात्रियों पर पड़ने वाला है। अनुमान है कि हर दिन 12 लाख से ज्यादा यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। राजस्थान से दिल्ली, गुजरात, पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों के लिए चलने वाली लंबी दूरी की बसें हड़ताल में शामिल हो जाएगी। साथ ही ग्रामीण इलाकों में परिवहन का एकमात्र साधन मानी जाने वाली 'स्टेज कैरिज' बसें भी इस बार हड़ताल में शामिल होगी। जिससे लाखों ग्रामीणों को भी परेशानी होगी। इस बार हड़ताल में करीब 22 हजार स्टेज कैरिज और 8 हजार कांटेक्ट कैरिज बसें शामिल होंगी। यानी कुल 30 हजार बसों का संचालन पूरी तरह बंद रहेगा।
बस मालिकों का कहना है कि विभाग के पास नियम उल्लंघन पर चालान काटने का अधिकार है, लेकिन बसों को मौके पर सीज करना और आरसी निलंबित करना पूरी तरह से अनुचित है। संचालकों ने आरोप लगाया कि परिवहन विभाग नियम एस-052, 153 और 119 (वर्ष 2019 व 2025 में लागू) का गलत इस्तेमाल कर रहा है। इन नियमों की आड़ में उन वाहनों पर भी कार्रवाई की जा रही है जो 20 साल पुराने हैं और जिनके पास वैध दस्तावेज मौजूद हैं।
साहू ने बताया कि आरटीओ द्वारा मनमाने तरीके से बसों को बीच रास्ते में सीज किया जा रहा है। इससे न केवल सवारियों को सुनसान रास्तों पर परेशानी झेलनी पड़ती है, बल्कि पर्यटकों के बीच साख खराब हो रही है। बसों के अचानक जब्त होने से टूर ऑपरेटरों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
ऑपरेटर्स का विरोध आरटीओ की ओर से बस बॉडी कोड के नाम पर की जा रही अनुचित कार्रवाई को लेकर भी है। संचालकों का तर्क है कि जब बस का पंजीयन सभी तकनीकी जांच के बाद किया गया है तो सड़क पर चलते समय उन्हें बॉडी कोड के नाम पर परेशान करना गलत है। जबकी इन बसों को विभाग ने ही पहले पास किया था तो अब फिर यह बसें गलत कैसे हो गई।
Updated on:
18 Feb 2026 12:58 pm
Published on:
18 Feb 2026 12:13 pm
